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बस करो इमरान! अब जंग के लिए इनसे भी मांगने चले भीख

स्थानीय मीडिया क अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को बजट घाटा कम करने के उपाय सुझाने के लिये इस महीने एक सहायता 'एसओएस' मिशन भेज रहा है

Harsh Pandey

Harsh PandeyBy Harsh Pandey

Published on 7 Sep 2019 8:44 AM GMT

बस करो इमरान! अब जंग के लिए इनसे भी मांगने चले भीख
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नई दिल्ली: पाकिस्तान का कंगाली कहें या कुछ और ही.. दुश्मन देश की अर्थव्यवस्था का ये हाल हो गया है कि नकदी संकट के साथ सरकार का राजकोष पूरी तरह खाली हो गया है। अब वह IMF के सामने मदद के लिए हाथ फैलाया है।

स्थानीय मीडिया क अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को बजट घाटा कम करने के उपाय सुझाने के लिये इस महीने एक सहायता 'एसओएस' मिशन भेज रहा है।

आईएमएफ की क्षेत्रीय प्रमुख ने कहा...

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मीडिया खबरों के मुताबिक पाकिस्तान में आईएमएफ की क्षेत्रीय प्रमुख टेरेसा दबान शैंकेज के हवाले से कहा कि आईएमएफ की टीम राजकोषीय मुद्दों पर चर्चा करने तथा राजकोषीय घाटा को कम कर ऐच्छिक दायरे में लाना चाहती है।

बता दें कि राजकोषीय घाटा को कम के उपायों पर गौर करने के लिये 16-20 सितंबर के दौरान पाकिस्तान की यात्रा करेगी। यह निर्णय पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की खराब होती वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया गया है।

आईएमएफ़ की शर्तें...

पाकिस्तान आईएमएफ़ से छह अरब डॉलर का क़र्ज़ ले रहा है और इस क़र्ज़ के एवज में इमरान ख़ान की सरकार ने वादा किया है कि वो देश की आर्थिक नीतियां उसकी शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ाएंगे। पाकिस्तान पर दबाव है कि अगले 12 महीने में 700 अरब रुपए के फंड की व्यवस्था करे।

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आईएमएफ़ ने पाकिस्तान को खर्चों में कटौती और टैक्सों में बढ़ोतरी के लिए कहा है। पाकिस्तान का बजट इस मामले में ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि इससे उसके भविष्य की राह तय होगी। आर्थिक संकट के साथ पाकिस्तान में अमीरों और ग़रीबों के बीच की खाई भी बेतहाशा बढ़ी है।

पाकिस्तान में भीषण विषमता कराची, लाहौर और इस्लामाबाद के बाज़ार को देखकर भी समझा जा सकता है. हाल के वर्षों में इन शहरों में ऑटोमोबाइल के बेहतरीन ब्रैंड के सारे स्टोर खोले गए हैं जबकि इन शहरों से ओझल होते ही बड़ी आबादी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रही है।

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पाकिस्तान की पिछली मुस्लिम लीग की सरकार ने अपने आर्थिक सर्वे में बताया था कि कैसे आयात और निर्यात के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है।

इमरान ख़ान ने अपने चुनावी अभियानों में कहा था कि वो प्रधानमंत्री बनने के बाद ख़ुदकुशी करना पसंद करेंगे लेकिन क़र्ज़ नहीं लेंगे। इमरान ख़ान प्रधानमंत्री भी बन गए और लेकिन उन्हें क़र्ज़ के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखा।

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