Top

पाकिस्तानी लड़की होना अभिशाप: ऐसा क्यों कर रहा ये देश, वजह दिमाग हिला देगी

जामिया बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी और शेख जायद चिल्ड्रन अस्पताल के प्रमुख प्रोफेसर सैफुल्लाह जामड़ का कहना है कि इस साल कई माता-पिता अपना नाम और पता गलत लिखवाकर नवजात बच्चियों को लावारिस छोड़ कर लापता हो गए। 

Newstrack

NewstrackBy Newstrack

Published on 4 Nov 2020 11:20 AM GMT

पाकिस्तानी लड़की होना अभिशाप: ऐसा क्यों कर रहा ये देश, वजह दिमाग हिला देगी
X
पाकिस्तानी लड़की होना अभिशाप: ऐसा क्यों कर रहा ये देश, वजह दिमाग हिला देगी
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

इस्लामाबाद: देश और दुनिया ने चाहे लाख तरक्की कर लिया हो, लड़के और लड़कियों में समानता की बातें भी हो रही हों, लेकिन अभी कई जगहों पर लड़कियों के साथ भेदभाव रखा जाता है। हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के दक्षिणी प्रांत सिंध से कुछ इसी तरह की ख़बरें आ रही है। बताया जा रहा है कि देहाती इलाकों में कई लोग लड़की पैदा होने के बाद उसे अस्पताल में लावारिस छोड़ देते हैं।

लड़कियों को इलाज के लिए लाते हैं लेकिन छोड़कर चले जाते हैं

बताया जा रहा है कि यहां रहने वाले लोग अक्सर इलाज के लिए लाड़काना स्थित जायद चिल्ड्रन अस्पताल में ही आते हैं, इसलिए इस अस्पताल में लड़कियों को छोड़ने के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। कुछ महीने पहले लाड़काना के शेख जायद चिल्ड्रन अस्पताल में नवजात सायरा को गंभीर हालत में लाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान बच्ची तो ठीक हो गई है, लेकिन उसके माता-पिता उसको अपने साथ घर वापस लेकर नहीं गए। अस्पताल प्रशासन से ऐसी और भी कई लड़कियों के बारे में जानकारी मिली है।

pakistani girl-2

सायरा को एक नर्स ने गोद ले लिया

सायरा की किस्मत अच्छी थी कि उसे अस्पताल की ही एक नर्स ने गोद ले लिया, लेकिन सभी बच्चियों की किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती है। जामिया बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी और शेख जायद चिल्ड्रन अस्पताल के प्रमुख प्रोफेसर सैफुल्लाह जामड़ का कहना है कि इस साल कई माता-पिता अपना नाम और पता गलत लिखवाकर नवजात बच्चियों को लावारिस छोड़ कर लापता हो गए।

ये भी देखें: पति की दीर्घायु के लिए रखा निर्जल व्रत, खरीददारी में जुटी सुहागिने

लड़कों के मुकाबले लड़कियों को बोझ समझा जाता है

प्रोफेसर जानकारी देते हैं कि गंभीर हालत होने की वजह से छह में से पांच बच्चियां मर गईं। इन बच्चियों को राहत और ईदी राहत संस्था की मदद से दफनाया गया। प्रोफेसर सैफुल्लाह कहते हैं कि बच्चियों को इस तरह लावारिस और बेबस तरीके से छोड़ना दुखद और निंदनीय है और इसके पीछे समाज में पनपने वाली सोच जिम्मेदार है। प्रोफेसर का कहना है कि हमारे समाज में लड़कों के मुकाबले लड़कियों को बोझ समझा जाता है।

pakistani girl-3

ये भी देखें: Arnab Goswami के सपोर्ट में Yogi Adityanath, बोले- ‘Emergency जैसे हालात’

उनका मरना स्वाभाविक है

शेख जायद चिल्ड्रन अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर अब्दुल्लाह असर चांडियो का कहना है कि बच्चियों को अस्पताल में सिर्फ लावारिस ही नहीं छोड़ा जाता बल्कि माता-पिता इस बात से अच्छी तरह से अवगत हैं कि अगर उन्हें अस्पताल से ले जाया गया, तो उनका मरना स्वाभाविक है।

दो देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें

Newstrack

Newstrack

Next Story