सुल्तान ने बदला शरियत कानून, गे-सेक्स और एडल्टरी पर बनाये नियम

ब्रूनेई में इसी साल अप्रैल में गे सेक्स और शादी से बाहर फिजिकल रिलेशन रखने वालों के लिए मौत की सजा के प्रावधान का ऐलान किया गया था।

नई दिल्ली: दक्षिण पूर्वी एशियाई देश ब्रूनेई में अब समलैंगिक संबधों (गे सेक्स) और व्याभिचार (एडल्टरी) पर मौत की सजा नहीं मिलेगी। इस मामले में दोषी पाए जाने पर पत्थर बरसाकर जान लिए जाने का प्रावधान था, लेकिन ब्रूनेई के सुल्तान हसनल बोल्कियाह ने अपने ही एक आदेश को पलट दिया।

सरकार ने शरियत कानून में जरूरी बदलाव कर ये फैसला लिया कि अब गे-सेक्स और एडल्टरी पर सजा-ए-मौत नहीं दी जाएगी।

ब्रूनेई में इसी साल अप्रैल में गे-सेक्स और शादी से बाहर शारीरिक संबंध बनाने वालों के लिए मौत की सजा के प्रावधान का ऐलान किया गया था। गे-सेक्स के अपराध में किसी को सजा तभी दी जाती थी, जब वो खुद कबूल कर लेता या उसे ऐसा करते हुए कम के कम चार गवाहों ने देखा होता। इसकी दुनिया भर में आलोचना हुई थी।

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वहीं, पुराने कानून में अलग-अलग अपराधों के लिए भी कड़ी सज़ा का प्रावधान था, जैसे चोरी के लिए हाथ काटना। लेकिन नए कानून में इस पर थोड़ी बहुत रियायत दी गई है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित इस छोटे से देश की दो तिहाई से ज्यादा आबादी मुस्लिम है। 1984 तक ब्रुनेई ब्रिटिश शासन के अधीन था। सुल्तान हसनल बोलकिया 50 साल तक शासन करने के बाद भी ब्रुनेई में लोकप्रिय हैं। उनकी सत्ता की गोल्डन जुबली के जश्न में 60 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए।

1967 में हसनल ने गद्दी संभाली थी, तब वे 21 साल के थे। वे शाही परिवार के 29वें वारिस हैं। 4 लाख की आबादी वाले ब्रुनेई में सुल्तान का परिवार 600 साल से राज कर रहा है।