मरे हजारों सैनिक: शराब बन गई थी मौत, बड़ा भयानक था ये हास्यास्पद मंजर

युद्धों की वजह से हजारों-लाखों सैनिकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है, लेकिन आज से लगभग 231 साल पहले एक युद्ध बहुत ही हैरान कर देने वाली वजह से लड़ा गया था, जिसमें एक ही तरफ के लगभग 10 हजार के सैनिक मारे गए थे।

Published by Vidushi Mishra Published: April 30, 2020 | 5:21 pm
Modified: April 30, 2020 | 7:54 pm

मरे हजारों सैनिक: शराब बन गई थी मौत, बड़ा भयानक था ये हास्यास्पद मंजर

नई दिल्ली। इतिहास के पन्नों को देखें तो दुनिया में अभी जितने भी युद्ध हुए किसी न किसी वजह से ही लड़े गए हैं और हुए इन युद्धों की वजह से हजारों-लाखों सैनिकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ती है, लेकिन आज से लगभग 231 साल पहले एक युद्ध बहुत ही हैरान कर देने वाली वजह से लड़ा गया था, जिसमें एक ही तरफ के लगभग 10 हजार के सैनिक मारे गए थे। फिलहाल इसे युद्ध ना कहें तो ही अच्छा होगा, क्योंकि इसमें दूसरी तरफ से लड़ने वाली सेना तो इसमें थी ही नहीं। सिर्फ एक गलती के कारण एक ही तरफ के सैनिक आपस में भिड़ गए थे और एक दूसरे को ही जान के दुश्मन बन बैठे।

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‘बैटल ऑफ कैरनसीब्स’

इतिहास में हुए इस युद्ध को ‘बैटल ऑफ कैरनसीब्स’ के नाम से जाना जाता है। हालांकि लोग इसे दुनिया का सबसे हास्यास्पद युद्ध भी कहते हैं। ये बात सन् 1788 की है, जब करीब एक लाख ऑस्ट्रियाई सैनिक कैरनसीब्स शहर पर कब्जा करने के लिए निकले थे।

उस समय ऑस्ट्रिया और तुर्की के बीच युद्ध भी चल रहा था। 21 सितंबर की रात उन्होंने टिमिस नदी के पास पहुंचकर कैरनसीब्स को चारों तरफ से घेर लिया। उन्हें नदी के आसपास तुर्की सेना तो नहीं दिखी।

लेकिन फिर नदी के उस के दूसरी पार उन्हें रोमानी लोगों का एक शिविर जरूर दिखाई दिया। जब ऑस्ट्रियाई घुड़सवार वहां पहुंचे तो रोमानी लोगों ने उन्हें शराब पीने का न्यौता दिया।

थोड़ी सी शराब की मांग की

इसके बाद ऑस्ट्रियाई घुड़सवार थके हुए थे, इसलिए वो नदी किनारे रोमानी लोगों के साथ बैठकर शराब का मजा लेने लगे। इसी बीच कुछ ऑस्ट्रियाई पैदल सैनिक भी वहां पहुंच गए और घुड़सवारों को शराब पीता देखकर, उन्होंने भी थोड़ी सी शराब की मांग की, लेकिन घुड़सवारों ने उन्हें मना कर दिया। बस इसी पर सभी भड़क गए और घुड़सवारों से भिड़ गए। तभी अचानक किसी सैनिक ने गोली चला दी।

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इसी बीच अब गोली की आवाज सुनकर नदी के दूसरी तरफ जो सैनिक आराम कर रहे थे, उन्हें लगा कि तुर्कों ने आक्रमण कर दिया है। इसलिए वो उठे और तुर्क्स-तुर्क्स (तुर्की के सैनिक) चिल्ताते हुए बिना कुछ समझे नदी के उस पार गोलियां बरसाने लगे।

अपने ही सैनिकों को मारने लगे

तभी नदी के दूसरे पार वाले सैनिकों को भी ऐसा ही लगा कि तुर्कों ने हमला बोल दिया है, इसलिए वो भी अंधाधुंध गोलियां बरसाने लगे और अपने ही सैनिकों को मारने लगे।

ऑस्ट्रियाई सैनिकों का नेतृत्व कर रहे जर्मन अधिकारी ने सैनिकों को ऐसा करने से रोका और ‘हॉल्ट’ का आदेश दिया, लेकिन ऑस्ट्रियाई सैनिक इसका मतलब नहीं समझ पाए और उन्हें लगा कि सैनिकों के बीच कोई ‘अल्लाह-अल्लाह’ चिल्ला रहा है।

ऑस्ट्रियाई सैनिकों को अंधेरे में अपने सैनिक ही तुर्की के सैनिक लगने लगे और वो अपनी जान बचाने के लिए एक दूसरे को ही मारने लगे। फिर कहते हैं कि एक ऑस्ट्रियाई सैनिक ने तो अपने ही साथी सैनिकों पर तोपें चलवा दी थीं। तो ऐसे एक गलती से ऑस्ट्रियाई सैनिक आपस में ही भिड़ गए थे और हजारों की जान चली गई थी।

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