World News : टिक-टॉक से छाया कनाडा का सरदार

World News : टिक-टॉक से छाया कनाडा का सरदार

टोरंटो। कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो की फिर सत्ता में वापसी हुई है। त्रूदो की लिबरल पार्टी के लिए यह आसान बिल्कुल नहीं रहा। पार्टी ने सबसे आम चुनाव में ज्यादा सीटें (338 में से 156) तो जीती हैं मगर बहुमत गंवा दिया है। उन्हें कम से कम एक विपक्षी दल को साथ लेना होगा और उनका साथ देने को आगे आए हैं सरदार जगमीत सिंह। उनकी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी ने 24 सीटें जीती हैं। जगमीत सिंह किसी बड़ी कनाडाई पार्टी के पहले सिख नेता हैं।

टिक-टॉक से छाए
जगमीत सिंह ने कनाडा के युवाओं के बीच टिक-टॉक से पहचान बनाई। उन्होंने 15 वीडियो जारी किए थे जिनमें से दो वायरल हो गए। दिलचस्प बात है कि जगमीत ने चुनाव से जुड़े सिर्फ तीन आयोजन किए, वह भी सिर्फ वैंकूवर के इलाकों में। उनके मुकाबले त्रूदो और कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार एंड्रयू शीर लगातार रैलियां करते रहे।

यह भी पढ़ें :  5,000 की मौत! ये क्या हो गया मासूमों को, दहल गया पूरा देश

कनाडा में जन्मे हैं जगमीत
जगमीत के पेरेंट्स पंजाब से कनाडा आ कर बस गये थे। कनाडा में ओंटेरियो के स्कारबोरो में 2 जनवरी, 1979 को जगमीत का जन्म हुआ था। जगमीत सिंह ने बायोलॉजी से बीएससी किया है। यॉर्क यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करते समय उन्होंने बढ़ी हुई ट्यूशन फीस के खिलाफ मोर्चा खोला। 2006 में उन्होंने बार काउंसिल की सदस्यता हासिल की। वह शरणार्थियों और अप्रवासी नागरिकों के पक्ष में आवाज उठाते रहे है। राजनीति में आने से पहले वह ग्रेटर टोरंटो में वकील के तौर पर काम करते थे। वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के खिलाफ उन्होंने कनाडा में आवाज उठाई थी। वर्ष 2013 में वह बरनाला के अपने पैतृक गांव ठीकरीवाला आना चाहते थे लेकिन यूपीए सरकार ने उन्हें वीजा नहीं दिया था। उन्होंने कहा था – ‘मैं 1984 के दंगा पीडि़तों को इंसाफ दिलाने की बात करता हूं इसलिए भारत सरकार मुझसे खफा रहती है। 1984 का दंगा दो समुदायों के बीच का दंगा नहीं था बल्कि राज्य प्रायोजित जनसंहार था।

राजनीतिक सफर
जगमीत सिंह का राजनीतिक करिअर 2011 से शुरू हुआ। 2015 में उन्हें ऑन्टैरियो न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का उपनेता चुना गया। 2017 में उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए चुनाव लड़ा और वह चार कैंडिडेट्स के बीच 53.8 फीसदी वोट पाकर एकतरफा जीते। वह साल 2013 में सांसद बने थे। अपने पद से इस्तीफा देकर वह मई, 2017 में एनडीपी के अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे थे। उन्होंने इस मुकाबले में सांसद चार्ली एंगस, निकी एश्टन और गाई कैरन को हराया।

यह भी पढ़ें : World News : दुनिया भर में बढ़ रही एडल्ट डायपर की मांग

कनाडा में सिख
कनाडा की जनसंख्या में सिखों की हिस्सेदारी लगभग 1.4 प्रतिशत है। देश के रक्षा मंत्री भी इसी समुदाय से आते हैं। 1897 में महारानी विक्टोरिया ने ब्रिटिश भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी को डायमंड जुबली सेलिब्रेशन में शामिल होने के लिए लंदन आमंत्रित किया था। घुड़सवार सैनिकों का एक दल जब ब्रिटिश कोलंबिया जा रहा था तब इन सैनिकों में से एक थे रिसालदार मेजर केसर सिंह। रिसालदार कनाडा में शिफ्ट होने वाले पहले सिख थे। उनके साथ कुछ और सैनिकों ने कनाडा में रहने का फैसला किया था। इन्होंने ब्रिटिश कोलंबिया को अपना घर बनाया। बाकी सैनिकों ने भारत लौटने के बाद बताया कि ब्रिटिश सरकार उन्हें बसाना चाहती है। भारत से सिखों के कनाडा जाने का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ था। कुछ ही सालों में ५ हजार लोग भारत से ब्रिटिश कोलंबिया पहुंच गए, जिनमें 90 फीसदी सिख थे। अब सिखों का कनाडा में बसना इतना आसान नहीं रहा है क्योंकि गोरों को इनका आना पसंद नहीं है।