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अमेरिका का बड़ा एलान: चीन के खिलाफ खुलकर देगा साथ, कर रहा ये बड़ी तैयारी

अमेरिका ने लद्दाख की गलवान घाटी में भारत का खुलकर समर्थन करने का एलान करते हुए कहा कि अमेरिका की रणनीति गलवान घाटी में भारत का समर्थन करने के साथ ही सभी मोर्चों पर चीन को पीछे धकेलने की है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 1 Sep 2020 3:59 PM GMT

अमेरिका का बड़ा एलान: चीन के खिलाफ खुलकर देगा साथ, कर रहा ये बड़ी तैयारी
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पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन और भारत के बीच सैन्य विवाद चरम पर पहुंच चुका है और चीन अपनी साजिशों और हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव बढ़ने के साथ अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा हो गया है। अमेरिका ने लद्दाख की गलवान घाटी में भारत का खुलकर समर्थन करने का एलान करते हुए कहा कि अमेरिका की रणनीति गलवान घाटी में भारत का समर्थन करने के साथ ही सभी मोर्चों पर चीन को पीछे धकेलने की है। यह घोषणा अमेरिका के उप विदेश मंत्री स्टीफन बिगन ने की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चीन पर लगाम कसने के लिए अमेरिका भारत को शामिल करते हुए नाटो जैसा एक गठबंधन बनाना चाहता है।

साजिशों से बाज नहीं आ रहा चीन

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन और भारत के बीच सैन्य विवाद चरम पर पहुंच चुका है और चीन अपनी साजिशों और हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने 29-30 अगस्त की रात में भी पैंगोंग झील इलाके में कब्जे की कोशिश की थी मगर भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए चीन की साजिश को नाकाम कर दिया।

अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने एक सम्मेलन में कहा कि चीन प्रौद्योगिकी की चोरी और अन्य देशों की जमीन और समुद्री इलाकों पर कब्जा करने की साजिश कर रहा है। अमेरिका ने चीन की साजिश को भांप लिया और इसी कारण सभी मोर्चों पर चीन को पीछे धकेलने की कोशिश की जा रही है।

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अमेरिका ने खारिज किए चीन के दावे

बिगन ने कहा कि संप्रभु इलाकों पर चीन के दावे की बेमानी मांगों को नहीं माना जा सकता। यह मामला चाहे भारत-चीन सीमा पर भारत की गलवान घाटी का हो या फिर दक्षिण प्रशांत सागर का। यही कारण है कि हम चीनी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए भारत के साथ खड़े हैं।

आर्थिक मोर्चे पर मुंहतोड़ जवाब

उन्होंने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर भी ट्रंप प्रशासन चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की कोशिश में जुटा हुआ है। चीन के खिलाफ कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं और हम आगे भी उसकी साजिशों पर पूरी नजर रखेंगे।

NATO नाटो (फोटो: सोशल मीडिया)

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी अर्थव्यवस्था के अनुचित और दमनकारी तौर-तरीकों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। अमेरिका-चीन के आर्थिक संबंधों में संतुलन लाने के लिए और भी कदम उठाए जाएंगे। चीन ने अब तक मिले विशेषाधिकार को भुनाते हुए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाई है।

नाटो जैसा संगठन बनाने पर काम

उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन को घेरने की कोशिश में जुटा हुआ है और इसके लिए वह इंडो पैसिफिक रीजन के अपने साथियों भारत, जापान और आस्ट्रेलिया को साथ लाना चाहता है। चीन पर लगाम कसने के लिए अमेरिका नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) जैसा एक गठबंधन बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

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उन्होंने कहा कि इस बाबत चारों देशों की बैठक जल्द ही दिल्ली में होने की उम्मीद है। बिगन ने कहा कि हमारा लक्ष्य इन चारों देशों के साथ दूसरे देशों को मिलाकर चीन की चुनौतियों का जवाब देना है।

चीन उठा रहा फायदा

भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा के साथ ऑनलाइन चर्चा में बिगन ने कहा कि इंडो पैसिफिक रीजन में एक मजबूत स्ट्रक्चर की कमी महसूस की जा रही है। यहां पर नाटो या यूरोपीय यूनियन जैसा कोई मजबूत संगठन न होने से चीन उसका फायदा उठा रहा है। उन्होंने कहा कि गठन के समय नाटो भी उतना मजबूत नहीं था और कई देशों ने तटस्थ रहने की राह चुनी थी मगर समय के साथ यह संगठन काफी मजबूत हो गया।

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तिब्बत में चीन की दमनकारी नीतियां

बिगन ने चीन की तिब्बत नीति पर भी उसे घेरा। उन्होंने कहा कि चीन तिब्बत में दमनकारी नीतियां अपना रहा है और उसकी सांस्कृतिक पहचान मिटाने की साजिश में जुटा हुआ है। इसके साथ ही वह चीन में रहने वाले उइगर मुसलमानों की आस्था और ऐतिहासिक परंपरा पर भी चोट कर रहा है।

उसने ब्रिटेन के‌ साथ हांगकांग के हस्तांतरण को लेकर किए गए समझौते को भी तोड़ा है। वह हांगकांग का नियंत्रण सीधे अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है और यही कारण है कि अमेरिका ने चीन के इन कदमों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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