खा जाएगा कोरोना को: ऐसे मरेगा वायरस, बच सकती हैं लाखों की जान

कोरोना वायरस से चीन भले ही उभर चुका हो, लेकिन बाकी दुनिया में अभी इसकी वैक्सीन बनाना बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। बता दें कि चीन में इस संक्रमण के 81000 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं, जबकि 3300 लोगों की इससे मौत हो चुकी है।

नई दिल्ली : कोरोना वायरस से चीन भले ही उभर चुका हो, लेकिन बाकी दुनिया में अभी इसकी वैक्सीन बनाना बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। बता दें कि चीन में इस संक्रमण के 81000 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं, जबकि 3300 लोगों की इससे मौत हो चुकी है। लेकिन अब चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने वायरस को शरीर में ही नष्ट करने का नया तरीका खोज निकाला है।

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जीं हां चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक ट्वीट कर जानकारी दी है कि चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए नया हथियार बना लिया है। ऐसे में चीन का दावा है उन्होंने एक ऐसा नैनोमटीरियल बना लिया है जो शरीर में प्रवेश करके कोरोना वायरस को सोख लेता और और उसके बाद उसे 96.5 से 99.9% सफलता के साथ निष्क्रिय करने में सक्षम है।

कई वैज्ञानिकों के अनुसार, ये न तो कोई वैक्सीन है और न ही इसे दवा कहा जा सकता है, ये एक बायोवेपन जैसा है जिसे कोरोना वायरस से लड़ने के लिए विकसित किया गया है।

आखिर क्या है ये नैनोमटीरियल बायोवेपन

बायोवेपन नैनोमटीरियल कई तरह की मैन्यूफैक्चरिंग प्रोसेस में इस्तेमाल किए जाते हैं। ये हेल्थकेयर के अलावा पेंट्स, फिल्टर्स, इन्सुलेशन और लुब्रिकेंट पैदा करने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते रहे हैं।

स्वास्थ्य सुरक्षा की बात करें तो इन्हें नैनोजाइम्स भी कहते हैं और ये शरीर में पाए जाने वाले एन्जाइम्स की तरह ही काम करते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, नैनोमटीरियल के बारे में अभी दुनिया ज्यादा नहीं जानती है लेकिन इन्हें कुछ विशेष किस्म के कामों के लिए तैयार किया जा सकता है, ये शरीर में आसानी से प्रवेश करते हैं क्योंकि ये बहुत ही छोटे होते हैं।

बता दें कि एनआईएच के अनुसार, नैनोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दवाएं बनाने में भी किया जाता है। ये शरीर में बीमारी फैला रहीं विशेष कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं, जैसें की कैंसर की कोशिकाओं को ले सकते हैं। ये न सिर्फ तेजी से इलाज करने में सक्षम हैं बल्कि बाकी थेरेपी के मुकाबले काफी सेफ माने जाते हैं।

लेकिन अभी इनके उपयोग को लेकर वैज्ञानिकों में मतभेद हैं। ये तो माना जाता हैं कि इनसे इलाज करना और थेरेपी के मुकाबले काफी सक्षम है लेकिन कई सारे ऐसे तत्व हैं जैसे सिल्वर, इन्हें अगर नैनोमटीरियल में बदल कर शरीर में प्रवेश कराया जाए तो शरीर में काफी नुकसान हो सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल भी तक उपयोग में नहीं लाया जा सका है।