भारत-चीन टेंशन: इसलिए चीनी सैनिकों की हालत हुई खराब, स्ट्रेचर पर जा रहे अस्पताल

अक्टूबर के बीच में झील की सतह पर पूरी तरह से जम जाती है। बताया जा रहा है कि लद्दाख के देपसांग और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री तक जा चुका है और अभी और कम होने की आशंका है।

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चीनी सैनिकों की हालत हुई खराब (फोटो: सोशल मीडिया)

लखनऊ: लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर है। भारत के खिलाफ चीन लगातार साजिश कर रहा है। चीनी सैनिक भारतीय सीमा में लगातार घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सैनिक उन्हें खदेड़ दे रहे हैं। अब चीन की हालत खराब होने लगी है।

दरअसल अब यह आशंका जताई जा रही है कि सर्दी आते ही इतनी ऊंचाई पर दिक्कत होने लगी है। अब इसके सबूत भी सामने आ चुके हैं। अब चीन अपने सैनिकों को ऊंचाई वाले पोस्ट्स से स्ट्रेचर पर अस्पताल पहुंचा रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। सबसे बड़ी बात है कि अभी तो सर्दियां शुरू भी नहीं हुई हैं और हालात और कठिन होने वाले हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फिंगर 4 पर तापमान माइनस 4 डिग्री तक जा सकता है। अक्टूबर के बीच में झील की सतह पर पूरी तरह से जम जाती है। बताया जा रहा है कि लद्दाख के देपसांग और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री तक जा चुका है और अभी और कम होने की आशंका है।

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बताया गया है कि चीनी कॉम्बैट स्वास्थ्यकर्मी ऊंचाई की जगहों से PLA के सैनिकों को ले जा रहे हैं। उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर जाया जा रहा है। इनकी जगह पर दूसरे सैनिकों की तैनाती हो रही है। हवा और बर्फ के कारण उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब सर्दी बढ़ने के साथ हालात और ज्यादा कठिन हो जाएंगे।

अस्पतालों की संख्या बढ़ा रहा चीन

मिलिट्री सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि चीनी सैनिकों को फिंगर 4 एरिया से फील्ड अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। इसके कारण चीन अस्पतालों को बढ़ा दिया है। भारत और चीन दोनों के सैनिक मौसम पर नजर रख रहे हैं।

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गौरतलब है कि भारती सेना के पास पैंगॉन्ग सो से भी ऊंचे इलाकों में सैन्य ऑपरेशन करने की प्रैक्टिस है। भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे जंगी मैदान पर सियाचिन ग्लेशियर पर भी तैनात है। भारत ने भी इन हालात को देखते हुए मेडिकल की पूरी तैयारी पूरी की है।

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भारत के पास अनुभव

एक्सपर्ट्स का कहना है ऊंचाई पर बैठी सेना के पास बचाव का अधिक मौका होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दुश्मन पर सामने से हमला करना तो घातक होता ही है, इतनी ऊंचाई पर चढ़ना भी मुश्किल काम है, क्योंकि सांस लेने में परेशानी होती है और सामान भारी होता है।

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