जानिए क्यों 10 की जगह अब 11 अंकों के होंगे मोबाइल नंबर?

टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) देश में मोबाइल नंबरिंग स्कीम बदलने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें एक और फैसला मोबाइल नंबर में डिजिट्स बढ़ाने को से जुड़ा हो सकता है।

Update: 2023-05-29 14:49 GMT

नई दिल्ली: टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) देश में मोबाइल नंबरिंग स्कीम बदलने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें एक और फैसला मोबाइल नंबर में डिजिट्स बढ़ाने को से जुड़ा हो सकता है और इस तरह मोबाइल नंबर 10 की जगह 11 डिजिट्स के कर दिए जाएंगे।

इसके पीछे एक बड़ी वजह टेलिकॉम कनेक्शंस की तेजी से बढ़ रही डिमांड को भी माना जा रहा है। इस बारे में आपको ये बातें पता होनी चाहिए। दरअसल ट्राई ऐसे कई ऑप्शन पर काम करना चाहती है जिसमें से एक मोबाइल नंबरिंग सिस्टम को बदलना भी शामिल है।

मौजूदा 9, 8 और 7 से शुरू होने वाले मोबाइल नंबर्स के साथ करीब 210 करोड़ नए टेलिकॉम कनेक्शन दिए जा सकते हैं। साल 2050 तक देश में मौजूदा नंबर्स के अलावा करीब 260 करोड़ नए नंबरों की जरूरत पड़ने वाली है।

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पहले भी दो बार बदला जा चुका नंबरिंग सिस्टम

बता दें कि सरकार मशीनों के बीच पारस्परिक इंटरनेट संपर्क/ इंटरनेट आफ दी थिंग्स के लिए 13 अंकों वाली नंबर श्रृंखला पहले ही शुरू कर चुकी है। इससे पहले भारत ने अपने नंबरिंग सिस्टम को दो बार बदला है, जो कि 1993 और 2003 में हुआ था। उस समय 2003 में नंबरिंग प्लान से 75 करोड़ नए फोन कनेक्शंस क्रिएट किए गए थे।

इसमें से 45 करोड़ सेल्युलर और 30 करोड़ बेसिक या लैंडलाइन फोन नंबर शामिल थे। ट्राई का मानना है कि मोबाइल कनेक्शंस की बढ़ती संख्या की वजह से 10 डिजिट वाले मोबाइल नंबरों की मौजूदा व्यवस्था को बदलने का वक्त आ गया है।

सिर्फ मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड लाइन नंबर भी 10 डिजिट नंबरिंग में बदले जा सकते हैं। इसके अलावा अगर डेटा ओनली मोबाइल नंबर्स (डोंगल कनेक्शन) को अपडेट कर 10 से 13 डिजिट बनाया जाता है तो, 3, 5 और 6 नंबर सीरीज़ से शुरू करने में मदद मिलेगी।

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2050 तक टेलीकॉम कनेक्शन की जरूरतें होंगी पूरी

ट्राई की मानें तो देश में टेलीकॉम कनेक्शन को लेकर लोगों की जरूरतों को पूरा करने में 2050 तक का समय लगेगा। साथ ही 260 करोड़ अंकों की भी जरूरत होगी।

इस वजह से ट्राई फोन के अंकों की संख्या में बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं, फिलहाल देश के पास नौ, सात और आठ नंबर से शुरू होने वाले 10 अंकों के मोबाइल नंबर्स की क्षमता 210 करोड़ कनेक्शन्स की हैं। इसके अलावा ट्राई ने इस मुद्दे पर लोगों से उनकी राय भी मांगी है।

डोंगल कनेक्शन में भी बदलाव संभव

बता दें कि ट्राई ने 1993 और 2003 में मोबाइल नंबर्स का विश्लेषण किया था। ट्राई के अनुसार, कनेक्शन की मांग में आई तेजी से नंबरिंग रिसोर्सेज को खतरा हो सकता है।

इस कारण ट्राई मोबाइल नंबर के डिजिट्स को बढ़ाना चाहता है। इतना ही नहीं ट्राई लैंडलाइन नंबर्स की संख्या को 10 डिजिट में बदल सकता है। सूत्रों की मानें तो डोंगल के कनेक्शन के नंबर्स को भी 13 डिजिट्स में बदल दिया जाएगा।

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