Newstrack Special: शादी के बाद वजन क्यों बढ़ता है? जानिए ‘Marriage Weight Gain’ का मनोविज्ञान

Marriage Weight Gain Psychology: शादी के बाद वजन बढ़ने की वजह सिर्फ ज्यादा खाना नहीं है। जानिए Marriage Weight Gain के पीछे खान-पान, जीवनशैली, नींद, तनाव, सामाजिक आदतों और मनोविज्ञान की भूमिका।

Update:2026-08-21 20:44 IST

Marriage Weight Gain Psychology in Hindi 

Marriage Weight Gain Psychology: शादी के बाद वजन बढ़ना आम बात है। लेकिन वजन बढ़े इसका कोई पक्का नियम भी नहीं है। लेकिन कई शोध बताते हैं कि शादी करने या किसी साथी के साथ रहने की शुरुआत के बाद औसतन शरीर के वजन और बीएमआई में कुछ बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसका कारण सिर्फ ज्यादा खाना नहीं है। इसके पीछे दिनचर्या में बदलाव, साथ बैठकर खाना, शारीरिक गतिविधि कम होना, नींद में बदलाव, सामाजिक मेल-जोल, गर्भावस्था, उम्र और एक दिलचस्प मनोवैज्ञानिक बदलाव भी हो सकता है। कुछ लोगों में शादी के बाद यह सोच बन सकती है कि अब जीवनसाथी मिल चुका है, इसलिए खुद को आकर्षक बनाए रखने की पहले जैसी चिंता या प्रेरणा कम हो गई है।

क्या शादी के बाद हार्मोन बदल जाते हैं?

शादी और वजन को लेकर लंबे समय तक किए गए अध्ययनों और कई शोधों की समीक्षा में पाया गया है कि शादी के बाद औसतन वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं, शादी टूटने के बाद कुछ लोगों में वजन कम होने की प्रवृत्ति भी देखी गई है। सबसे पहले एक गलत धारणा दूर कर लें। ऐसा कोई जैविक नियम नहीं है कि शादी होते ही शरीर के हार्मोन बदल जाते हैं और इंसान मोटा होने लगता है। शादी अपने आप मोटापा पैदा करने वाली कोई जैविक प्रक्रिया नहीं है।

असल में शादी जीवनशैली में बड़ा बदलाव लाती है। व्यक्ति अकेले रहने से एक साझा जीवन में आता है। खाने का समय बदल सकता है, सोने-जागने की आदत बदल सकती है, बाहर खाना बढ़ सकता है, सामाजिक कार्यक्रम ज्यादा हो सकते हैं और व्यायाम के लिए मिलने वाला समय कम हो सकता है। कई बार व्यक्ति अपने जीवनसाथी की खाने-पीने और रोजमर्रा की आदतें भी अपना लेता है। यानी शरीर शादी के प्रमाणपत्र पर प्रतिक्रिया नहीं करता। वह शादी के बाद बदलने वाली दिनचर्या और जीवनशैली पर प्रतिक्रिया करता है।

शादी का वजन पर असर

शादी के बाद वजन बढ़ना यानी ‘मैरिज वेट गेन’ फिर भी मात्र लोककथा नहीं है। 2024 में प्रकाशित 105 अध्ययनों की एक व्यवस्थित समीक्षा में 76 अध्ययनों ने विवाहित लोगों में अविवाहित लोगों की तुलना में मोटापे का जोखिम अधिक पाया। 24 अध्ययनों के लगभग 3.7 लाख लोगों वाले संयुक्त विश्लेषण में विवाहित लोगों में मोटापे की संभावना अधिक निकली। लेकिन यह परिणाम सावधानी से समझना चाहिए, क्योंकि विवाहित और अविवाहित समूहों की उम्र, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जीवनशैली और दूसरे कारक अलग हो सकते हैं। इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि विवाह अपने-आप मोटापा ‘करता’ है। अधिक उपयोगी शोध वह है जिसमें उन्हीं लोगों को शादी से पहले और बाद में देखा गया। ऐसी अनुवर्ती अध्ययनों की समीक्षा में सामान्य पैटर्न यह मिला कि विवाह या सहजीवन में प्रवेश के बाद वजन बढ़ने की प्रवृत्ति रहती है। 15 से 35 वर्ष के युवाओं पर केंद्रित एक व्यवस्थित समीक्षा में भी विवाह के बाद पुरुषों और महिलाओं दोनों में BMI की वृद्धि लगातार दिखाई दी, हालांकि खान-पान और व्यायाम में बदलाव के परिणाम सभी अध्ययनों में एक जैसे नहीं थे।

भोजन में भी छिपा है राज

शादी के बाद वजन बढ़ने का बसे सरल कारण देखें तो पाएंगे कि दो लोगों का भोजन एक हो जाता है। अकेला व्यक्ति कई बार रात का खाना हल्का कर सकता है, किसी दिन केवल फल या साधारण भोजन खाकर सो सकता है या भोजन छोड़ सकता है। शादी के बाद खाना एक सामाजिक क्रिया बन जाता है - ‘साथ खाना है।’ नियमित नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन, सप्ताहांत में बाहर खाना, रिश्तेदारों के यहाँ दावत, मिठाई, त्योहार और घर में अधिक पकवान -इन सबके कारण कुल कैलोरी धीरे-धीरे बढ़ सकती है।

यह फर्क रोज केवल 100–200 अतिरिक्त कैलोरी का भी हो तो महीनों और वर्षों में वजन पर असर डाल सकता है। व्यक्ति को लगता भी नहीं कि उसने ‘बहुत खाना’ शुरू किया है। भोजन थोड़ा अधिक हुआ, लेकिन लगातार हुआ।

शंघाई के 342 नवविवाहित जोड़ों पर किए एक अध्ययन में विवाह-परिवर्तन के दौरान औसत वजन वृद्धि लगभग 1.9 किलो दर्ज की गई। पुरुषों में लगभग 2.2 किलो और महिलाओं में लगभग 1.6 किलो। विशेष रूप से चीनी, फैट और मसालों से भरपूर भोजन-पद्धति पुरुषों में ज्यादा वजन वृद्धि से जुड़ी थी। यह एक आबादी का अध्ययन था, इसलिए इसे हर देश या हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता।लेकिन यह बताता है कि भोजन की संरचना वास्तविक भूमिका निभाती है।

पति-पत्नी की आदतों का असर

एक ज्यादा दिलचस्प हिस्सा है कि पति-पत्नी एक-दूसरे की आदतों को ‘संक्रमित’ कर सकते हैं। अगर एक साथी रोज शाम टहलता है तो दूसरा भी साथ निकल सकता है। यदि एक रोज रात में मिठाई खाता है तो दूसरा भी शुरू कर सकता है। यदि एक व्यक्ति वीकेंड में घर बैठकर फिल्म देखने और स्नैक्स खाने का शौकीन है, तो धीरे-धीरे दूसरे की दिनचर्या भी वैसी हो सकती है।इस प्रक्रिया को सामाजिक या व्यवहारिक समरूपता समझ सकते हैं। विवाह के बाद केवल घर साझा नहीं होता।,भोजन, नींद, समय, मनोरंजन और गतिविधि का वातावरण भी साझा होने लगता है। एक अध्ययन में पति-पत्नी के BMI और दो वर्षों में उनके BMI परिवर्तन आपस में जुड़े पाए गए। शोधकर्ताओं ने इसका कुछ हिस्सा साझा वातावरण - विशेषकर भोजन के अवसर और व्यायाम व्यवहार - से समझाया। यहीं से ‘मैरिज वेट गेन’सका मनोविज्ञान शुरू होता है।

क्या ‘आकर्षक दिखने’ की प्रेरणा सचमुच कम हो जाती है?

यह विचार सुनने में मजाक जैसा लगता है कि “शादी हो गई, अब किसे प्रभावित करना है?” लेकिन मनोविज्ञान में इस पर वास्तव में शोध हुआ है। इसे कभी-कभी मीटिंग मार्केटिंग मॉडल कहा जाता है। इसके अनुसार जब व्यक्ति अविवाहित होता है तो संभावित साथी के सामने स्वयं को आकर्षक प्रस्तुत करने की प्रेरणा अधिक हो सकती है। कपड़े, शरीर, फिटनेस, वजन और रूप-रंग पर ध्यान उस सामाजिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा हो सकता है। स्थिर संबंध मिलने के बाद कुछ लोगों में यह दबाव कम हो सकता है।

इस विचार की एक दिलचस्प जाँच 169 नवविवाहित जोड़ों पर चार वर्षों तक की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो पति-पत्नी अपने विवाह से अधिक संतुष्ट थे, उनमें समय के साथ वजन बढ़ने की प्रवृत्ति अधिक थी। इसके विपरीत, जिनमें वैवाहिक असंतोष और तलाक की संभावना के संकेत अधिक थे, उनमें वजन बढ़ना कम था। शोधकर्ताओं ने इसे इस संभावना के समर्थन में देखा कि स्थिर और संतोषजनक संबंध में संभावित नए साथी को आकर्षित करने की प्रेरणा कम हो सकती है।

लेकिन इसे ‘खुश शादी मोटा करती है’ नहीं कहना चाहिए। यह समूह-स्तर का संबंध था और इसमें अनेक दूसरे कारक भी हो सकते हैं। फिर भी यह प्रमाण देता है कि शरीर का वजन केवल भूख का मामला नहीं। सामाजिक प्रेरणा भी उसे प्रभावित कर सकती है। और यह प्रभाव पुरुष या महिला तक सीमित नहीं है। विवाह-परिवर्तन और वजन पर हुई व्यवस्थित समीक्षा में कुल मिलाकर पुरुषों और महिलाओं दोनों में वजन बढ़ने का पैटर्न मिला।

शादी से पहले वजन घटाने का दबाव और शादी के बाद ‘रिबाउंड’

यह खासकर विवाह समारोह से जुड़ा दिलचस्प मनोवैज्ञानिक प्रभाव है। शादी से पहले कई लोग तेजी से वजन घटाने की कोशिश करते हैं। फोटो अच्छे आएँ, कपड़े फिट हों, शादी के दिन सबसे अच्छा दिखें। खासकर महिलाओं पर यह सामाजिक दबाव ज्यादा हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में 343 होने वाली दुल्हनों पर किए अध्ययन में लगभग आधी महिलाओं ने शादी से पहले वजन घटाने की इच्छा बताई। औसतन शादी से ठीक पहले उनका वजन बहुत नहीं बदला, लेकिन शादी के छह महीने बाद लगभग दो किलो वजन बढ़ा। जिन महिलाओं को दूसरे लोगों ने शादी से पहले वजन कम करने के लिए कहा था, उनमें बाद की वजन वृद्धि अधिक थी।

यह एक प्रकार का व्यवहारिक रिबाउंड हो सकता है। महीनों तक व्यक्ति कह रहा था कि “शादी तक मिठाई नहीं, शादी तक जिम नहीं छोड़ना, शादी तक डाइट।” शादी हो गई तो लक्ष्य समाप्त। नियंत्रण ढीला पड़ा और सामान्य अथवा अधिक भोजन लौट आया। यही प्रभाव सिर्फ विवाह में नहीं होता। लोग छुट्टी, प्रतियोगिता या फोटोशूट के लिए वजन घटाते हैं और लक्ष्य पूरा होने के बाद पुरानी आदतों पर लौट जाते हैं। स्थायी व्यवहार परिवर्तन न हो तो शरीर फिर पुराने रास्ते पर आ सकता है।

घर बसने के बाद शारीरिक गतिविधि क्यों कम हो सकती है?

अविवाहित जीवन में किसी व्यक्ति का सामाजिक जीवन बाहर केंद्रित हो सकता है। दोस्तों से मिलना, घूमना, खेलना, जिम जाना। विवाह के बाद घर स्वयं मनोरंजन का केंद्र बन सकता है। शाम को पति-पत्नी साथ खाना खाते हैं, टीवी या ओटीटी देखते हैं और सप्ताहांत घर में बिताते हैं। यह अपने-आप अस्वस्थ नहीं है। समस्या केवल यह है कि बैठने का समय बढ़ सकता है और अनजाने में दैनिक गतिविधि कम हो सकती है।युवा वयस्कों पर व्यवस्थित समीक्षा में विवाह या साथ रहने की शुरुआत के बाद शारीरिक गतिविधि में कमी के प्रमाण कुछ अध्ययनों में मिले। विशेष रूप से महिलाओं में कई अध्ययनों ने कमी दर्ज की। हालांकि सभी अध्ययनों में परिणाम समान नहीं थे। इसलिए इसे सार्वभौमिक नियम नहीं माना जा सकतायहाँ केवल जिम की बात नहीं है। कुल ऊर्जा खर्च में रोजमर्रा की छोटी गतिविधियाँ भी आती हैं। पैदल चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, खरीदारी करना, कार्यालय में घूमना, घर के काम। जीवन का ढाँचा बदलने पर ये गतिविधियाँ भी बदल सकती हैं।

क्या ‘कम तनाव’ भी वजन बढ़ा सकता है?

कुछ लोगों में विवाह के बाद भावनात्मक सुरक्षा बढ़ती है। नियमित जीवन, साथी का समर्थन और अकेलेपन में कमी अच्छे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं। लेकिन इसका अप्रत्यक्ष परिणाम यह भी हो सकता है कि भोजन अधिक सामाजिक और आराम से जुड़ा हो जाए।उदाहरण के लिए रात में साथ बैठकर मिठाई खाना अब केवल भूख नहीं, निकटता की रस्म हो सकती है।

‘चलो चाय के साथ कुछ खाते हैं’

यह भोजन कैलोरी से ज्यादा सामाजिक अर्थ रखता है। दोनों के बीच प्यार और साथ का अनुभव भोजन से जुड़ सकता है। धीरे-धीरे “‘साथ का समय’ और ‘खाने का समय’ एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। इसे सीखने की भाषा में कहें तो भोजन सामाजिक पुरस्कार बन जाता है। दिमाग केवल स्वाद से पुरस्कार नहीं प्राप्त करता; वह बातचीत, आराम, अपनापन और स्वाद को एक ही अनुभव में जोड़ सकता है। इसलिए बार-बार खाने की इच्छा केवल पेट की भूख नहीं होती।

शादी तनाव भी बढ़ा सकती है - तब क्या?

ये भी सच है कि शादी हमेशा तनाव घटाती नहीं। आर्थिक जिम्मेदारियाँ, रिश्तों का तनाव, परिवार, नौकरी, घर और बच्चों की जिम्मेदारी बढ़ सकती है।तनाव का वजन पर प्रभाव व्यक्ति-व्यक्ति अलग होता है। कुछ लोगों की भूख घट जाती है; कुछ लोगों में भावनात्मक भोजन बढ़ जाता है। तनावग्रस्त व्यक्ति मीठा, फैटयुक्त या अत्यधिक स्वादिष्ट भोजन ज्यादा तलाश सकता है।लंबे तनाव में नींद भी प्रभावित हो सकती है और खराब नींद स्वयं भूख, भोजन चयन और ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए किसी व्यक्ति में शादी के बाद वजन बढ़ने का कारण “खुशी” नहीं बल्कि बढ़ा हुआ जीवन-तनाव भी हो सकता है। यही कारण है कि मैरिज वेट गेन का एक ही मनोवैज्ञानिक मॉडल नहीं है।

पति-पत्नी की प्लेट का आकार भी मायने रख सकता है

यह खास तौर पर पुरुष और महिला के बीच ऊर्जा जरूरत के अंतर में दिलचस्प है। औसतन बड़े शरीर वाला व्यक्ति ज्यादा कैलोरी चाहता है। यदि पति और पत्नी समान भोजन, समान व्यंजन और लगभग समान हिस्से खाने लगें तो छोटे शरीर वाले साथी के लिए वह मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है।दूसरी दिशा भी संभव है। यदि एक साथी बहुत कम खाता है तो दूसरा भी उसकी भोजन शैली अपनाकर वजन घटा सकता है। यानी विवाह में केवल भोजन साझा करना नहीं होता बल्कि ‘portion norm’ अर्थात “एक सामान्य प्लेट कितनी होती है”, भी साझा हो सकता है। कुछ महीनों बाद व्यक्ति यह भूल सकता है कि विवाह से पहले उसकी अपनी सामान्य मात्रा क्या थी।

क्या पुरुष शादी के बाद ज्यादा मोटे होते हैं?

इसका साफ सार्वभौमिक उत्तर नहीं है। कुछ देशों और अध्ययनों में विवाह और मोटापे का संबंध पुरुषों में अधिक मजबूत दिखाई देता है; अन्य में महिलाओं में या दोनों में। 2024 की बड़ी समीक्षा में पुरुषों और महिलाओं के परिणाम पूरी तरह एक जैसे नहीं थे। पुरुषों पर अलग परिणाम देने वाले 20 अध्ययनों में आधे ने विवाहित पुरुषों में स्पष्ट रूप से अधिक मोटापे का जोखिम पाया, आधे में महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला। महिलाओं में भी अध्ययन अलग-अलग परिणाम देते रहे। इसलिए ‘पुरुष ‘ शादी के बाद निश्चित रूप से मोटे होते हैं और महिलाएँ नहीं, जैसी लोकधारणा वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं है।

महिलाओं के मामले में गर्भावस्था को अलग रखना जरूरी है

शादी के बाद वजन बढ़ने की चर्चा में अक्सर महिलाओं का प्रसवोत्तर वजन भी उसी श्रेणी में जोड़ दिया जाता है। लेकिन यह अलग जैविक प्रक्रिया है। गर्भावस्था में वजन बढ़ना आवश्यक है। बच्चे, प्लेसेंटा, रक्त मात्रा, तरल और शरीर में वसा भंडारण इन सबका योगदान होता है। कुछ महिलाओं में प्रसव के बाद गर्भावस्था से बढ़ा हुआ कुछ वजन लंबे समय तक रह सकता है। यदि विवाह के बाद कुछ वर्षों में बच्चा हुआ हो तो महिला की वजन वृद्धि को केवल ‘शादी के बाद आराम करने लगी’ कहना वैज्ञानिक रूप से भी गलत और सामाजिक रूप से भी अनुचित होगा।

इसी तरह उम्र भी महत्वपूर्ण है। बहुत-से लोग 20 या 30 की उम्र में शादी करते हैं, और उसी जीवनकाल में काम, बैठने का समय, भोजन और गतिविधि बदल रहे होते हैं। जो वजन वृद्धि ‘शादी के कारण’ दिखाई देती है, उसका कुछ हिस्सा सामान्य आयु और जीवन-चरण से भी संबंधित हो सकता है।

क्या सेक्स की वजह से वजन बढ़ता है?

यह सिर्फ एक मिथक है। यौन संबंध स्वयं वजन बढ़ाने वाला जैविक कारण नहीं है। सामान्य यौन गतिविधि में कुछ ऊर्जा खर्च होती है, हालांकि इतनी नहीं कि उसे मुख्य व्यायाम माना जाए। शादी के बाद हार्मोन ‘मोटा करने लगते हैं’ या नियमित सेक्स से महिलाओं का शरीर अपने-आप मोटा हो जाता है, इसके लिए वैज्ञानिक आधार नहीं है। यदि वजन बदल रहा है तो कारण आम तौर पर कुल ऊर्जा संतुलन, जीवनशैली, गर्भावस्था, नींद, दवाएँ, स्वास्थ्य स्थितियाँ या दूसरी जीवन परिस्थितियाँ होंगी।

क्या ‘प्यार का वजन’ सचमुच कोई चीज होती है?

ये कोई वैज्ञानिक नाम नहीं है लेकिन ये अवधारणा रोचक है। दो लोग जब लंबे समय तक साथ रहते हैं तो उनका भोजन और गतिविधि एक-दूसरे के करीब आने लग सकती है। जन्मदिन, वर्षगाँठ, बाहर खाना, छुट्टियाँ, देर रात स्नैक्स और साझा खाना रिश्ते की रस्में बन सकती हैं।इस अर्थ में वजन बढ़ना कभी-कभी दंपति की जीवनशैली के एक-दूसरे के समान होने का बाईप्रोडक्ट हो सकता है। इसका अच्छा पहलू भी है। यदि दोनों साथ व्यायाम शुरू करें, स्वस्थ खाना पकाएँ और पैदल चलें तो यही सामाजिक प्रभाव वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। पति-पत्नी एक-दूसरे का स्वास्थ्य बिगाड़ ही नहीं सकते। एक-दूसरे के सबसे प्रभावी स्वास्थ्य-सहयोगी भी बन सकते हैं।

क्या शादी के बाद थोड़ी वजन वृद्धि चिंता की बात है?

हर वजन वृद्धि बीमारी नहीं है। व्यक्ति के शरीर का प्राकृतिक वजन जीवन के अलग चरणों में कुछ बदल सकता है। मुख्य सवाल है कि क्या वजन लगातार बढ़ रहा है? कमर का घेरा बढ़ रहा है? ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर या लिपिड प्रभावित हो रहे हैं? शारीरिक क्षमता कम हो रही है? केवल विवाह से पहले की तस्वीर से तुलना करके हर दो किलो वृद्धि को ‘समस्या’ कहना सही नहीं। और खासकर यदि कोई व्यक्ति शादी से ठीक पहले कठोर डाइट कर रहा था तो बाद का थोड़ा वजन बढ़ना वास्तव में उसके सामान्य स्थिर वजन पर लौटना भी हो सकता है।

शादी के बाद वजन बढ़ने से बचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

इसमें “डाइटिंग” से ज्यादा महत्वपूर्ण है दंपति की साझा दिनचर्या डिजाइन करना। यदि दोनों की आदत हो कि रात के भोजन के बाद 20–30 मिनट टहलेंगे, सप्ताह में कुछ दिन व्यायाम करेंगे, बाहर खाना विशेष अवसर रहेगा, भोजन परोसते समय अपनी-अपनी जरूरत के अनुसार मात्रा लेंगे और हर साथ बैठने को खाने से नहीं जोड़ेंगे, तो विवाह स्वयं स्वास्थ्य के पक्ष में काम कर सकता है। एक और महत्वपूर्ण बात है कि एक साथी दूसरे का ‘फूड पुलिस’ न बने। ‘तुम मोटे हो रहे हो’, ‘यह मत खाओ’ जैसे लगातार ताने शरीर की छवि और संबंध दोनों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। बेहतर है व्यवहार सामूहिक हो - ‘हम दोनों शाम को चलें’, ‘घर में फल रखें’, ‘वीकेंड का एक बाहर वाला खाना तय करें।’

यानी शादी के बाद वजन नियंत्रण की सबसे उपयोगी इकाई कई बार व्यक्ति नहीं, दंपति होता है। पूरे प्रश्न का उत्तर यह है कि ‘ मैरिज वेट गेन’ केवल अधिक खाना खाने की कहानी नहीं है। विवाह व्यक्ति का सामाजिक वातावरण बदल देता है और सामाजिक वातावरण शरीर के व्यवहार को बदल सकता है। साथ खाना बढ़ता है, हिस्से बदलते हैं, गतिविधि बदल सकती है, शरीर को आकर्षक बनाए रखने की प्रेरणा कुछ लोगों में ढीली पड़ सकती है, शादी से पहले की डाइट का रिबाउंड हो सकता है, तनाव या आराम खाने से जुड़ सकता है और पति-पत्नी धीरे-धीरे एक-दूसरे की आदतें अपना सकते हैं। यही कारण है कि शोध में विवाह को औसतन वजन वृद्धि से जुड़ा पाया गया है।

लेकिन इसे इस सूत्र में बदलना गलत होगा कि ‘शादी का मतलब मोटापा।’ बहुत-से लोग शादी के बाद वजन नहीं बढ़ाते, कुछ वजन घटाते हैं और कुछ पहले से ज्यादा स्वस्थ हो जाते हैं। विवाह केवल एक जीवन-परिवर्तन है; शरीर पर उसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि उस नए जीवन में भोजन, गतिविधि, नींद, तनाव और एक-दूसरे की आदतें किस दिशा में जाती हैं। और शायद ‘मैरिज वेट गेन’ के मनोविज्ञान को सबसे सरल वाक्य में ऐसे समझा जा सकता है कि शादी के बाद हमारा शरीर नहीं जानता कि हमारी शादी हुई है; लेकिन हमारी दिनचर्या, पुरस्कार, सामाजिक दबाव और आदतें जानती हैं। शरीर उन्हीं बदली हुई आदतों का हिसाब वजन में दिखा सकता है।

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