Seed Cycling Benefits: सीड साइकिलिंग से हार्मोनल समस्या का इलाज? SGPGI विशेषज्ञ ने बताया सच, बरतें ये सावधानी
Seed Cycling Benefits: सीड साइकिलिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है, लेकिन क्या इससे हार्मोनल समस्याएं ठीक होती हैं? SGPGI की आहार विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी त्रिपाठी ने बीजों के फायदे, मात्रा और सावधानियां बताईं।
Seed Cycling Benefits (Image Credit-Social Media)
लखनऊ: महिलाओं में मासिक धर्म (पीरियड्स) की नियमितता और हार्मोनल संतुलन के लिए सूरजमुखी, अलसी, कद्दू और तिल जैसे बीजों (सीड्स) के सेवन का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि बीज संतुलित पोषण का हिस्सा तो हो सकते हैं, लेकिन वे किसी चिकित्सीय इलाज का विकल्प कतई नहीं हैं।
डॉ. शिल्पी त्रिपाठी के अनुसार, आजकल महिलाओं में मासिक चक्र के अलग-अलग चरणों के अनुसार बीज खाने (सीड साइकिलिंग) का ट्रेंड काफी लोकप्रिय हो रहा है। बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। इसके बावजूद, केवल बीजों के सेवन से मासिक धर्म की गंभीर समस्याओं या हार्मोनल असंतुलन के ठीक होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं।
संतुलित थाली पर दें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि बीजों को हार्मोन ठीक करने वाली दवा मानने के बजाय अपनी रोजाना की डाइट का एक छोटा हिस्सा मानना चाहिए। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए केवल बीज पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपनी थाली में साबुत अनाज, दालें, दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, हेल्दी फैट्स और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करना जरूरी है।
बीज सेवन की सही मात्रा और चक्र
डॉ. शिल्पी के मुताबिक, एक स्वस्थ महिला के लिए बीजों का सेवन सीमित मात्रा में ही सुरक्षित है:
दैनिक मात्रा: प्रतिदिन 5 से 10 ग्राम बीज पर्याप्त हैं, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाकर अधिकतम 15 से 20 ग्राम किया जा सकता है।
पारंपरिक सेवन चक्र: मासिक धर्म के पहले दिन से 14वें दिन तक अलसी (Flax seeds) और कद्दू के बीज (Pumpkin seeds), जबकि 15वें दिन से 28वें दिन तक तिल (Sesame seeds) और सूरजमुखी के बीज (Sunflower seeds) का सेवन करने का चलन है।
अत्यधिक या गलत सेवन से नुकसान का खतरा
बीजों को बिना सोचे-समझे, अत्यधिक मात्रा में या गलत तरीके से खाने पर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं:
- पेट में गैस बनना, पेट फूलना (ब्लोटिंग), भारीपन और पेट में ऐंठन।
- पाचन तंत्र बिगड़ने से कब्ज या दस्त की समस्या।
- कुछ विशेष बीजों से एलर्जिक रिएक्शन।
- अत्यधिक कैलोरी होने के कारण अनियंत्रित वजन बढ़ना।
डॉ. शिल्पी त्रिपाठी ने सलाह दी है कि मासिक धर्म से जुड़ी अनियमितताएं कई जटिल शारीरिक व हार्मोनल कारकों पर निर्भर करती हैं। इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे या डाइट ट्रेंड को अपनाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ या आहार विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।