Bhagirath Choudhary Subsidy Row: जिस बोर्ड के उपाध्यक्ष, उसी से ले ली 99 लाख की सब्सिडी, मंत्री पर उठे सवाल

Bhagirath Choudhary Subsidy Row: केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी को उसी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना से 99 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली है, जिसके वे पदेन उपाध्यक्ष हैं। जानिए 1.99 करोड़ रुपये की परियोजना, मंजूरी प्रक्रिया और पूरे विवाद की कहानी।

Update:2026-06-27 13:44 IST

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Bhagirath Choudhary Subsidy Row: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare) में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी (Bhagirath Choudhary) को अपने ही मंत्रालय के अधीन संचालित योजना से करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने का मामला सामने आने के बाद सवाल खड़े हो गए हैं। मामला राजस्थान (Rajasthan) के दीदवाना-कुचामन (Didwana-Kuchaman) जिले के पीह (Peeh) गांव में स्थित उनके फार्म से जुड़ा है, जहां लगे एक साइनबोर्ड ने इस पूरे विवाद को चर्चा में ला दिया है।

साइनबोर्ड पर दर्ज है सब्सिडी का पूरा ब्योरा

रिपोर्ट्स के मुताबी, मध्य राजस्थान के एक बड़े फार्म परिसर में लगे सफेद साइनबोर्ड पर साफ लिखा गया है कि यह परियोजना राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board-NHB), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की सहायता से संचालित है।

साइनबोर्ड के मुताबिक लाभार्थी भागीरथ चौधरी हैं और परियोजना को 50 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में 99 लाख 60 हजार रुपये की सहायता दी गई है। हालांकि इस बोर्ड पर यह जानकारी नहीं दी गई है कि लाभार्थी स्वयं केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष (Ex-Officio Vice Chairman) भी हैं।


अपने ही मंत्रालय की योजना से मिली सब्सिडी

वही इसकी जांच में सामने आया है कि भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी एकीकृत बागवानी विकास मिशन (Mission for Integrated Development of Horticulture-MIDH) के तहत मिली है। यह योजना वर्ष 2014-15 में शुरू की गई थी और इसका संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा किया जाता है, जो कृषि मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।

इस योजना का उद्देश्य व्यावसायिक बागवानी (Commercial Horticulture) को बढ़ावा देना है। इसके तहत शिमला मिर्च (Capsicum), खीरा (Cucumber), टमाटर (Tomato) और गुलाब (Rose), एंथुरियम (Anthurium) तथा ऑर्किड (Orchid) समेत आठ प्रकार के फूलों की खेती के लिए परियोजना लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। यह सहायता प्रति परिवार एक करोड़ रुपये तक सीमित है।

भागीरथ चौधरी की परियोजना 16 हजार 592 वर्ग मीटर क्षेत्र में खीरे की खेती से जुड़ी है। इसे वर्ष 2025 में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा स्वीकृत 467 परियोजनाओं में शामिल किया गया था।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड में क्या है मंत्री की भूमिका?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड का संचालन निदेशक मंडल (Board of Directors) करता है। इसके पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं, जबकि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं।

बोर्ड की वेबसाइट पर पदेन उपाध्यक्ष के रूप में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री का उल्लेख है और उससे जुड़े ईमेल पते भी भागीरथ चौधरी से संबंधित बताए गए हैं।

बोर्ड में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research-ICAR) के महानिदेशक तथा बागवानी क्षेत्र के अन्य अधिकारी और प्रतिनिधि भी सदस्य होते हैं।

हालांकि कागजों पर परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में कृषि राज्य मंत्री की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं बताई गई है। अंतिम स्वीकृति राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की परियोजना अनुमोदन समिति (Project Approval Committee) द्वारा दी जाती है, जिसमें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते।

1.99 करोड़ की परियोजना, 1.49 करोड़ का बैंक लोन

पीह गांव स्थित परियोजना स्थल पर लगाए गए बोर्ड के अनुसार परियोजना की कुल लागत 1 करोड़ 99 लाख 20 हजार रुपये है। इसमें लाभार्थी का योगदान 49 लाख 80 हजार रुपये बताया गया है, जबकि 1 करोड़ 49 लाख 40 हजार रुपये का ऋण HDFC Bank से लिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार भागीरथ चौधरी ने 15 अप्रैल 2025 को इस परियोजना के लिए आवेदन किया था। आवेदन के महज 14 दिन बाद, 29 अप्रैल 2025 को परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई।

इसके बाद 11 मार्च 2026 को परियोजना को अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी गई और 30 मार्च 2026 को 99.03 लाख रुपये की पूंजी निवेश सब्सिडी (Capital Investment Subsidy) सीधे उनके एचडीएफसी बैंक के ऋण खाते में जमा कर दी गई। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड में 99 लाख 60 हजार रुपये और 99.03 लाख रुपये के बीच 57 हजार रुपये के अंतर का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला है।

मंत्री के पास कितनी कृषि भूमि?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भागीरथ चौधरी के पास पीह गांव में खाता संख्या 315 के तहत 9.7 हेक्टेयर कृषि भूमि और खाता संख्या 991 के अंतर्गत 1.1332 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। खसरा (Khasra) कृषि भूखंड की पहचान संख्या होती है, जबकि खाता (Khata) किसी व्यक्ति या परिवार के स्वामित्व वाली सभी भूमि का रिकॉर्ड माना जाता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को 31 मार्च 2025 तक दी गई उनकी अंतिम संपत्ति घोषणा के अनुसार उनकी कुल चल और अचल संपत्ति 4.41 करोड़ रुपये की बताई गई थी। इसमें पीह स्थित कृषि भूमि का उल्लेख तो है, लेकिन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की इस परियोजना का कोई विशेष जिक्र नहीं किया गया था। मंत्री कार्यालय के एक सहायक ने कहा है कि परियोजना से जुड़ी जानकारी सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी।


पहले भी किया था आवेदन

रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह पहली बार नहीं था जब भागीरथ चौधरी ने इस योजना के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। वर्ष 2018 में भी उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन हार्ड कॉपी समय पर जमा नहीं होने के कारण उसे खारिज कर दिया गया था।

इसी वर्ष उनके बेटे सुभाष चौधरी (Subhash Choudhary) ने भी मिश्रित सब्जी और खीरा परियोजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन परियोजना में उपयोग की गई संरचना योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं होने के कारण आवेदन अस्वीकार कर दिया गया था।

कैसे मिलती है यह सब्सिडी?

आपको बताते चलें कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए सबसे पहले एनएचबी पोर्टल (NHB Portal) पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद सैद्धांतिक स्वीकृति दी जाती है, फिर स्थल निरीक्षण होता है और सभी मानकों को पूरा करने पर अंतिम मंजूरी प्रदान की जाती है।

इस पूरे मामले ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह कहा गया है कि परियोजना स्वीकृति प्रक्रिया में कृषि राज्य मंत्री की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती, लेकिन जिस संस्था के पदेन उपाध्यक्ष स्वयं लाभार्थी हों, वहां सब्सिडी मिलने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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