हूबहू मिले 70% सवाल, परीक्षा से 1 घंटे पहले पेपर लीक! छत्तीसगढ़ में BSc कृषि का एग्जाम कैंसिल

Chhattisgarh BSc Paper Leak: छत्तीसगढ़ में BSc कृषि द्वितीय वर्ष की परीक्षा कथित पेपर लीक की शिकायत के बाद रद्द कर दी गई। जांच में वायरल प्रश्नपत्र के करीब 70 फीसदी सवाल असली पेपर से मिलते-जुलते मिले। सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में री-एग्जाम होगा।

Update:2026-08-21 10:03 IST

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Chhattisgarh BSc Paper Leak: छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय यानी आईजीकेवी (Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya) से संबद्ध महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष (BSc Agriculture Second Year) के एक विषय की परीक्षा कथित प्रश्नपत्र लीक (Question Paper Leak) की शिकायतों के बाद रद्द कर दी गई है। यह परीक्षा बृहस्पतिवार को होनी थी। अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने चार सदस्यीय समिति (Four-Member Committee) गठित की है।

आईजीकेवी से संबद्ध 33 महाविद्यालयों को बृहस्पतिवार को जारी किए गए परिपत्र (Circular) में बताया गया कि एईएनटी-221 (AENT-221) यानी कृषि कीट विज्ञान (Agricultural Entomology) के तहत ‘फसलों और संग्रहीत अनाज में कीट प्रबंधन-1 (रबी फसलें)’ विषय की परीक्षा बृहस्पतिवार को आयोजित होनी थी। इसे प्रशासनिक कारणों (Administrative Reasons) का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया।

सितंबर के पहले सप्ताह में होगा री-एग्जाम

विश्वविद्यालय की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि अब इस परीक्षा का दोबारा आयोजन सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में किया जाएगा। छात्रों को संशोधित परीक्षा कार्यक्रम (Revised Exam Schedule) की जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

इसके साथ ही छात्रों से कहा गया है कि वे अपने संबंधित महाविद्यालयों या डीन कार्यालय के संपर्क में रहें, ताकि दोबारा होने वाली परीक्षा की तारीख और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी उन्हें समय पर मिल सके।

एक घंटे पहले मिली पेपर लीक की शिकायत

आईजीकेवी के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी भाषा को बताया कि परीक्षा बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे शुरू होनी थी। इससे करीब एक घंटे पहले, सुबह लगभग 9 बजे डीन के कार्यालय को कथित प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत वाला एक ईमेल मिला।

अधिकारी के मुताबिक, ईमेल के साथ कोई प्रश्नपत्र संलग्न नहीं था। इसके बाद विद्यार्थियों के कुछ व्हॉट्सऐप समूहों (WhatsApp Groups) में एक प्रश्नपत्र प्रसारित होने लगा। इसके साथ दावा किया गया कि यही परीक्षा का लीक हुआ प्रश्नपत्र है।

70 प्रतिशत सवाल असली पेपर से मिले

शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से प्रसारित प्रश्नपत्र की जांच की गई। अधिकारी ने बताया कि व्हॉट्सऐप पर प्रसारित प्रश्नपत्र वास्तविक प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल नहीं खाता था। हालांकि, उसमें करीब 70 प्रतिशत प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र के सवालों से मिलते-जुलते पाए गए।

अधिकारी के अनुसार, इसी वजह से विश्वविद्यालय ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया। अब इस पूरे मामले की जांच चार सदस्यीय समिति करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कही सख्त कार्रवाई की बात

मामला सरकार के संज्ञान में भी पहुंच गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बृहस्पतिवार शाम संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार को मामले की जानकारी मिली है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर दी है और समिति का गठन किया है। मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब जांच समिति की रिपोर्ट पर नजर रहेगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि कथित प्रश्नपत्र के प्रसार के पीछे कौन जिम्मेदार है और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने की सलाह

विश्वविद्यालय ने छात्रों से कहा है कि वे परीक्षा से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें। साथ ही संशोधित परीक्षा कार्यक्रम (Revised Exam Schedule) की जानकारी के लिए अपने संबंधित महाविद्यालयों या डीन कार्यालय से संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। अब बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के एईएनटी-221 यानी कृषि कीट विज्ञान विषय की परीक्षा सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

कथित प्रश्नपत्र लीक की घटना को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) ने भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा (BJP) सरकार पर निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने बीएससी द्वितीय वर्ष के कीट विज्ञान के प्रश्नपत्र के परीक्षा से पहले लीक होने की कथित घटना को गंभीर और चिंताजनक बताया है।

वंदना राजपूत ने कहा कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का लीक होना केवल परीक्षा प्रणाली (Examination System) की विफलता नहीं है, बल्कि उन हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है, जो ऐसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।

कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

वंदना राजपूत ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच (High-Level Investigation) की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय के बाहर कैसे पहुंचा।

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी मांग की कि जांच में जो भी व्यक्ति, अधिकारी या एजेंसी दोषी पाई जाती है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और यह पता लगना जरूरी है कि कथित प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा।

फिलहाल विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द कर चार सदस्यीय समिति के जरिए जांच शुरू कर दी है। वहीं सरकार ने भी दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। परीक्षा अब सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी।

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