समंदर का 'अदृश्य काल' तैयार! रडार को चकमा देकर दुश्मनों को मिटा देगा 'महेंद्रगिरि'

भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा! मझगांव डॉक (MDL) ने प्रोजेक्ट-17A की चौथी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को नौसेना को सौंपा। ब्रह्मोस मिसाइल और आधुनिक रडार सिस्टम से लैस यह युद्धपोत रडार की नजरों से बचकर दुश्मनों का काल बनेगा।

By :  Shivam
Update:2026-04-30 21:24 IST

सरकारी शिपयार्ड Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) ने भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार चौथी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ सौंप दी है। यह युद्धपोत जल्द ही INS महेंद्रगिरि के रूप में नौसेना के बेड़े में शामिल होगा। डिलीवरी के दौरान MDL के CMD कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) और पूर्वी नौसेना कमान के चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक्निकल) रियर एडमिरल गौतम मरवाहा ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

यह प्रोजेक्ट-17A के तहत MDL में निर्मित अंतिम फ्रिगेट है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देता है। प्रोजेक्ट-17A को Project 17 Shivalik class का उन्नत संस्करण माना जाता है। इस योजना के तहत कुल 7 आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं, जिनका निर्माण MDL और Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) द्वारा किया जा रहा है।

महेंद्रगिरि एक अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसकी लंबाई करीब 149 मीटर और वजन लगभग 6600–6700 टन है। यह 28 नॉट्स से अधिक गति से चल सकती है और लंबी दूरी के अभियानों के लिए सक्षम है। इसमें लगभग 150–180 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं।

हथियारों की बात करें तो इसमें ब्रह्मोस मिसाइल जैसे सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 76 मिमी की नौसैनिक तोप और क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) लगाए गए हैं। इसके अलावा, इसमें एंटी-सबमरीन वारफेयर के लिए टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर, उन्नत सोनार सिस्टम और मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर संचालन की क्षमता भी मौजूद है।

इस युद्धपोत को स्टील्थ तकनीक से तैयार किया गया है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बच सकता है। इसमें इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS), एडवांस AESA रडार, आधुनिक सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर की क्षमताएं भी शामिल हैं।

महेंद्रगिरि भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का मजबूत उदाहरण है, जिसमें बड़ी संख्या में स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है। मॉड्यूलर निर्माण तकनीक के जरिए इसे कम समय और लागत में तैयार किया गया है।

इस फ्रिगेट के शामिल होने से नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने, एंटी-एयर, एंटी-शिप और एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता बढ़ाने, लंबी दूरी के मिशनों को अंजाम देने और नेटवर्क आधारित युद्ध में बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। आने वाले वर्षों में प्रोजेक्ट-17A के ये फ्रिगेट भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाएंगे।

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