केरल में नतीजों से पहले कांग्रेस में 'सिरफुटौवल'! CM पद के लिए आपस में भिड़े दिग्गज, पोस्टर वॉर ने बढ़ाई पार्टी की फजीहत

Kerala Congress CM race 2026: केरल में नतीजों से पहले कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान मच गया है। वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के समर्थकों के बीच पोस्टर वॉर छिड़ गई है, जिससे UDF की बढ़त के बीच पार्टी की फजीहत बढ़ गई है।

Update:2026-04-30 20:28 IST

Kerala Congress CM race 2026: केरल की राजनीति में इस वक्त एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ और अभी ईवीएम के बक्से खुले भी नहीं हैं, कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सिरफुटौवल शुरू हो गई है। एग्जिट पोल के आंकड़ों ने जैसे ही यूडीएफ (UDF) यानी कांग्रेस गठबंधन को बढ़त दिखाई, पार्टी के भीतर उत्साह के बजाय गुटबाजी का उबाल देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, तीन दिग्गज नेताओं के समर्थक अपने-अपने 'भावी मुख्यमंत्री' के लिए पोस्टर और वीडियो वॉर छेड़ चुके हैं। यह होड़ इस कदर बढ़ गई है कि पार्टी दफ्तरों के बाहर एक-दूसरे के खिलाफ अपमानजनक पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिसने आलाकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

एग्जिट पोल की आहट और तीन दावेदारों की बिसात

केरल में वर्तमान में वामपंथी गठबंधन (LDF) की सरकार है, लेकिन एग्जिट पोल्स का अनुमान है कि इस बार सत्ता परिवर्तन हो सकता है और बागडोर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के हाथों में आ सकती है। इसी संभावना ने कांग्रेस के तीन बड़े चेहरों—वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला—के बीच एक मूक युद्ध शुरू कर दिया है। हर नेता के पीछे समर्थकों की एक फौज है जो यह साबित करने में जुटी है कि उनका नेता ही केरल के लिए सबसे उपयुक्त मुख्यमंत्री होगा।

वीडी सतीशन: पसंदीदा चेहरा बनाम कम अनुभव

मुख्यमंत्री पद की इस रेस में पहला और सबसे चर्चित नाम वीडी सतीशन का है। वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के नेता सतीशन को एग्जिट पोल में जनता का सबसे पसंदीदा चेहरा बताया गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से वामपंथियों ने उन पर व्यक्तिगत हमले किए, उसने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नजर में उनकी छवि एक योद्धा की बना दी है। उनके समर्थकों ने तो सोशल मीडिया पर राज्य सरकार की 'गाड़ी नंबर 1' की फोटो के साथ "लोडिंग" लिखकर तहलका मचा दिया है। हालांकि, सतीशन की राह में रोड़ा यह है कि उन्होंने कभी मंत्री पद नहीं संभाला है और वे पार्टी के पुराने दिग्गजों के बीच थोड़े 'जूनियर' माने जाते हैं।

केसी वेणुगोपाल: संगठन की ताकत और हाईकमान का भरोसा

दूसरे बड़े दावेदार केसी वेणुगोपाल हैं, जो कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव हैं। वेणुगोपाल को दिल्ली दरबार का सबसे करीबी माना जाता है। उनके समर्थकों का दावा है कि इस बार टिकट बंटवारे से लेकर बागियों को मनाने तक, वेणुगोपाल ने ही पर्दे के पीछे से मुख्य भूमिका निभाई है। चूंकि इस बार सबसे ज्यादा उम्मीदवार उनकी पसंद के जीते हैं, इसलिए विधायकों के समर्थन के मामले में उनका पलड़ा भारी हो सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी अपने सबसे भरोसेमंद संगठन सारथी को दिल्ली से हटाकर तिरुवनंतपुरम भेजने को तैयार होंगे?

रमेश चेन्निथला: अनुभव का भंडार और संबंधों की गहराई

तीसरे दावेदार रमेश चेन्निथला हैं, जो केरल की राजनीति के सबसे अनुभवी खिलाड़ी माने जाते हैं। चेन्निथला के पास प्रशासनिक अनुभव भी है और गठबंधन के सहयोगियों के साथ उनके रिश्ते भी काफी मजबूत हैं। उनके समर्थकों ने एआई (AI) तकनीक का सहारा लेकर उनके जीवन और राजनीतिक सफर के शानदार वीडियो वायरल किए हैं। चेन्निथला का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि मुस्लिम लीग (IUML) जैसे अहम सहयोगी दलों और विभिन्न धार्मिक संगठनों के बीच उनकी स्वीकार्यता बाकी नेताओं से कहीं अधिक है।

पोस्टर वॉर ने बढ़ाई पार्टी की फजीहत

दावेदारी की यह जंग उस वक्त शर्मनाक हो गई जब एर्नाकुलम में कांग्रेस के जिला दफ्तर (DCC) के बाहर वीडी सतीशन के खिलाफ पोस्टर चस्पा कर दिए गए। इन पोस्टरों में सतीशन को नसीहत दी गई कि वे "मुख्यमंत्री पद का सपना देखना बंद करें" और अपनी "पीआर ब्रांडिंग" रोक दें। इस घटना ने कांग्रेस के भीतर की दरार को सार्वजनिक कर दिया है। वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन को मोर्चा संभालना पड़ा और उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल और हाईकमान ही करेगा। उन्होंने पोस्टर लगाने वालों को 'नकली कार्यकर्ता' करार दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर चल रही बहस को रोकना अब पार्टी के बस से बाहर होता दिख रहा है।

सहयोगी दल और विपक्षी खेमे की नजरें

केरल में सत्ता की चाबी अक्सर 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) के पास होती है। अगर कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बनी, तो लीग की भूमिका निर्णायक होगी। दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ माकपा (CPIM) जो पहले कांग्रेस की इस कलह का मजाक उड़ा रही थी, अब एग्जिट पोल के नतीजों को देखकर सतर्क हो गई है। अगर 4 मई को नतीजे एग्जिट पोल के पक्ष में रहे, तो कांग्रेस के लिए यह जीत एक नए संकट की शुरुआत हो सकती है। जानकारों का मानना है कि केरल की यह गुटबाजी कर्नाटक के सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार वाले विवाद से भी कहीं ज्यादा जटिल और गहरी साबित हो सकती है।

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