बंगाल स्ट्रॉन्ग रूम बवाल पर EC ने तोड़ी चुप्पी! ममता के दावों की उड़ाई धज्जियां, कहा- "सील हैं सारे स्ट्रॉन्ग रूम, वीडियो में दिख रहा काम..."

EC on Bengal EVM strong room row: पश्चिम बंगाल में स्ट्रॉन्ग रूम विवाद पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि सभी EVM स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सील और सुरक्षित हैं। वायरल वीडियो में EVM नहीं, बल्कि पोस्टल बैलेट से जुड़े कार्य की प्रक्रिया दिखाई दे रही है। TMC के आरोपों के बीच सियासी संग्राम तेज हो गया है।

Update:2026-04-30 22:39 IST

EC on Bengal EVM strong room row: पश्चिम बंगाल की तपती गर्मी के बीच सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंच गया है। 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद अब सबकी नजरें नतीजों पर टिकी थीं, लेकिन उससे पहले ही 'ईवीएम की सुरक्षा' को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक सनसनीखेज सीसीटीवी फुटेज जारी कर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर लोकतंत्र की हत्या का सीधा आरोप लगाया है। टीएमसी का दावा है कि स्ट्रॉन्ग रूम में उनकी गैर-मौजूदगी में मतपेटियों के साथ खेल किया जा रहा है। इस घटना ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है और नतीजों से पहले ही सड़कों पर संग्राम शुरू हो गया है।

सीसीटीवी वीडियो ने मचाई खलबली: टीएमसी का 'धांधली' का दावा

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो साझा करते हुए इसे 'दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से बीजेपी कार्यकर्ता उन मतपेटियों को खोल रहे हैं, जहां जनता का जनादेश कैद है। पार्टी ने तीखे लहजे में कहा कि बीजेपी ने वोटरों को डराने, नाम कटवाने और केंद्रीय बलों का खौफ दिखाने जैसे हर हथकंडे अपनाए, लेकिन जब वे इसमें नाकाम रहे तो अब ईवीएम के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। टीएमसी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि बंगाल कोई महाराष्ट्र या बिहार नहीं है, जहां वे चुपचाप लोकतंत्र की लूट देखेंगे।

नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर हाई वोल्टेज ड्रामा: धरने पर दिग्गज

ईवीएम में गड़बड़ी की खबर मिलते ही टीएमसी के कद्दावर नेता डॉ. शशि पांजा और कुणाल घोष कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। इसी स्टेडियम में ईवीएम का स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है। माहौल की गंभीरता को देखते हुए खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मौके पर पहुंचने का फैसला किया है। टीएमसी का कहना है कि वे दिल्ली के 'जमींदारों' और उनके 'कठपुतली' चुनाव आयोग को बंगाल का जनादेश चोरी नहीं करने देंगे। पार्टी ने साफ कर दिया है कि जब तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जाती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

चुनाव आयोग की सफाई: "सब कुछ नियम के मुताबिक है"

हंगामे को बढ़ता देख चुनाव आयोग ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है और एक विस्तृत बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो चल रहा है, उसका वास्तविकता से अलग संदर्भ है। आयोग के मुताबिक, खुदीराम अनुशीलन केंद्र के भीतर सभी 7 स्ट्रॉन्ग रूम उम्मीदवारों और चुनाव एजेंटों की मौजूदगी में पूरी तरह सील कर दिए गए थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि जिस गलियारे का वीडियो दिखाया जा रहा है, वहां पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) को अलग करने का काम चल रहा था, जिसके बारे में पहले ही सभी राजनीतिक दलों को ईमेल के जरिए सूचित कर दिया गया था।

एग्जिट पोल और तनाव के बीच बंगाल का भविष्य

चुनाव आयोग ने आगे बताया कि मुख्य स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित और बंद हैं और यह बात डॉ. शशि पांजा और कुणाल घोष को खुद मौके पर दिखाकर समझाई गई है। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद उन एग्जिट पोल्स के बाद शुरू हुआ है, जिनमें बीजेपी को बंगाल में बढ़त दिखाई गई थी। ममता बनर्जी ने इन एग्जिट पोल्स को पहले ही खारिज कर दिया था। फिलहाल, बंगाल में अविश्वास और आरोपों का दौर जारी है। एक तरफ टीएमसी अपनी जीत और ईवीएम की सुरक्षा को लेकर सड़कों पर है, तो दूसरी तरफ प्रशासन निष्पक्षता का दावा कर रहा है। अब 4 मई को जब असल नतीजे आएंगे, तभी पता चलेगा कि इस 'वॉर' का असली विजेता कौन है।

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