Jharkhand RS की दूसरी सीट पर फंसा असली पेंच, कांग्रेस की क्यों थमी सांसे? समझिए मतों का पूरा गणित
Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव में आज वोटिंग। JMM के वैद्यनाथ राम की जीत तय, लेकिन दूसरी सीट पर कांग्रेस के प्रणव झा और बीजेपी समर्थित परिमल नथवानी के बीच कांटे की टक्कर। जानिए क्या है सीटों का जादुई गणित।
Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए आज होने जा रहे मतदान ने राज्य के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। कागज पर देखने पर सत्ताधारी महागठबंधन का पलड़ा दोनों सीटों पर बेहद भारी नजर आता है, लेकिन भीतरघात यानी क्रॉस वोटिंग का डर इस पूरी बाजी को किसी भी वक्त पलट सकता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार वैद्यनाथ राम की जीत में कोई रोड़ा नहीं दिख रहा है, असली पेंच दूसरी सीट को लेकर फंसा हुआ है। इस दूसरी सीट पर कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं, लेकिन कांग्रेस के पास अपने सिर्फ सोलह विधायक हैं। उन्हें दिल्ली पहुंचने के लिए अपनी सहयोगी पार्टियों के भरोसे की सख्त जरूरत है। अगर सहयोगियों के कदम डगमगाए, तो कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है।
मतों का गणित
झारखंड विधानसभा के मौजूदा समीकरणों के हिसाब से एक उम्मीदवार को सीधे जीत दर्ज करने के लिए कम से कम अट्ठाइस वोटों की आवश्यकता है। सत्ता की कमान संभाल रही झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास कुल चौंतीस विधायक हैं। अपनी पहली सीट सुरक्षित करने के बाद झामुमो के पास छह अतिरिक्त वोट बच जाते हैं। अगर ये छह माननीय पूरी वफादारी के साथ कांग्रेस प्रत्याशी के पाले में जाते हैं, और साथ ही राजद और वामपंथी दलों का पूरा साथ मिलता है, तो प्रणव झा की नैया पार हो जाएगी। लेकिन अगर इन छह विधायकों में से किसी ने भी अपना मन बदला, तो नतीजा चौंकाने वाला आ सकता है।
क्या पाला बदलेंगे RJD के माननीय?
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए ने परिमल नथवानी को मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। एनडीए के पास अपने चौबीस विधायक मौजूद हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें जीत के लिए केवल चार और वोटों का जुगाड़ करना है। गलियारों में यह अफवाह जोरों पर है कि राष्ट्रीय जनता दल के चार विधायक पाला बदलकर एनडीए के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। अगर राजद के इन चारों विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी, तो भाजपा समर्थित उम्मीदवार की जीत पक्की हो जाएगी और सत्तापक्ष को मुंह की खानी पड़ेगी।
क्या एनडीए के भीतर भी लग सकती है सेंध?
सेंधमारी का यह खतरा सिर्फ सत्ताधारी गठबंधन पर ही नहीं मंडरा रहा है, बल्कि एनडीए के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं होने की खबरें हैं। विपक्ष के चौबीस विधायकों में से इक्कीस भाजपा के हैं, जबकि बाकी तीन अन्य सहयोगी दलों के पास हैं। यदि इन विधायकों में से कुछ ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर महागठबंधन के उम्मीदवारों को वोट दे दिया, तो सरकार आसानी से दोनों सीटें अपनी झोली में डाल लेगी।
मुख्यमंत्री आवास पर एकजुटता का प्रदर्शन
इस बीच, किसी भी तरह की टूट से बचने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के घर पर लगातार बैठकों का दौर चला। मंत्रियों और बड़े नेताओं ने साफ किया कि उनके सभी छप्पन विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और किसी भी होटल में विधायकों को बंद करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि विधानसभा अध्यक्ष भी एक विधायक के तौर पर गठबंधन के हक में अपना कीमती वोट डालेंगे।