Karnataka CM Change: सिद्धारमैया को दिल्ली बुलावा, 30 मई को नए कर्नाटक CM की ताजपोशी के संकेत
Karnataka CM Change: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजे जाने और डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की अटकलों के बीच सियासी हलचल बढ़ गई है।
Karnataka CM Change: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व को लेकर चर्चा होती रही है। अब यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी बदलाव की पुष्टि नहीं की है।
कांग्रेस का ‘दिल्ली प्लान’ क्या है?
दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी सिद्धारमैया को राज्य की राजनीति से हटाकर केंद्र की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान उन्हें राज्यसभा भेजने पर विचार कर रहा है। इसके जरिए पार्टी एक तरफ सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका देना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ डीके शिवकुमार के लिए मुख्यमंत्री पद का रास्ता साफ करना चाहती है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और दूसरे बड़े नेताओं के साथ लंबी बैठकें हुईं। इसी के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें और तेज हो गईं।
क्या सिद्धारमैया तैयार हैं?
सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने करीबी नेताओं और समर्थकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि बदलाव बिना किसी बड़े विवाद के हो, लेकिन सिद्धारमैया का कर्नाटक की राजनीति में मजबूत प्रभाव है। ऐसे में उनके समर्थकों की नाराजगी भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच फिर एक अहम बैठक हो सकती है। उसी के बाद तस्वीर साफ होगी।
कांग्रेस ने क्या कहा?
इन सभी चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को अफवाह बताया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि दिल्ली में हुई बैठकों में मुख्यमंत्री बदलने पर कोई चर्चा नहीं हुई। उनके मुताबिक, बैठक का मुख्य मुद्दा राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों की रणनीति था।हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लगातार हो रही बैठकों और बढ़ती चर्चाओं के पीछे जरूर कोई बड़ा संकेत छिपा है।
डीके शिवकुमार क्यों हैं मजबूत दावेदार?
जब 2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक में जीत हासिल की थी, तभी से यह चर्चा थी कि मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच समझौता हुआ है। डीके शिवकुमार के समर्थक लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सहमति बनी थी। हालांकि कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की। शिवकुमार को कांग्रेस का मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है। राज्य में पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही थी। यही वजह है कि उनके समर्थक लगातार उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करते रहे हैं।
भाजपा ने साधा निशाना
इस पूरे विवाद पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा का कहना है कि कर्नाटक सरकार विकास और प्रशासन पर ध्यान देने के बजाय अंदरूनी लड़ाई में उलझी हुई है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस की राजनीति पूरी तरह दिल्ली के निर्देशों पर चल रही है और राज्य सरकार में स्थिरता की कमी दिखाई दे रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कर्नाटक की राजनीति पूरी तरह सिद्धारमैया के अगले कदम पर टिकी हुई है। अगर वे राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन अगर सिद्धारमैया ने पद छोड़ने से इनकार किया, तो कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक मुश्किल खड़ी हो सकती है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।