UBT Delhi Meeting: 6 सांसद साफ या उद्धव का पलटवार? दिल्ली में इमरजेंसी मीटिंग में पहुंचे सिर्फ ये चेहरे, बढ़ा सस्पेंस
UBT Delhi Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में फिर भूचाल! शिंदे गुट के 'ऑपरेशन टाइगर' के दावे के बीच उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक। संजय राउत के कड़े तेवर और व्हिप के बीच जानें संसद में क्या चल रहा है पूरा इनसाइड गेम।
UBT Delhi Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर वैसा ही भूचाल आ गया है जिसने चार साल पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) ने आज अपने तमाम सांसदों की एक बेहद जरूरी आपातकालीन बैठक बुलाई है। सियासी गलियारों में यह खबर आग की तरह फैल चुकी है कि पार्टी के भीतर एक और बहुत बड़ी बगावत होने जा रही है।
बताया जा रहा है कि नाराज सांसदों का एक बड़ा धड़ा सूबे के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थामने के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है। यह इमरजेंसी मीटिंग ठीक उस खबर के बाद बुलाई गई है, जिसमें दावा किया गया था कि बागी गुट ने लोकसभा के कुल नौ सांसदों में से छह को अपने पाले में कर लिया है और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी इस सिलसिले में राब्ता कायम किया है। इस खबर ने मुंबई से लेकर दिल्ली तक खलबली मचा दी है।
संजय राउत का खुला चैलेंज
साल 2022 में जिस तरह एकनाथ शिंदे ने बगावत करके पूरी सरकार पलट दी थी, वैसी नौबत दोबारा न आए, इसके लिए उद्धव गुट ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने अपने सभी 9 सांसदों को हर हाल में दिल्ली पहुंचने का हुक्म सुनाया है और इसके लिए बाकायदा एक सख्त 'थ्री-लाइन व्हिप' भी जारी किया गया है। दूसरी तरफ, शिंदे गुट की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि उद्धव सेना के 6 सांसद टूट चुके हैं।
शिवसेना नेता चंद्रकांत रघुवंशी ने तो यहां तक कह दिया कि राज्य में 'ऑपरेशन टाइगर' का आगाज हो चुका है, जिसके तहत 6 माननीय सांसदों ने एकनाथ शिंदे की नीतियों पर अपना भरोसा जताया है। इस बीच, हमेशा की तरह आक्रामक अंदाज में रहने वाले संजय राउत ने संसद पहुंचते ही मीडिया के सामने बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो इस मुश्किल वक्त में हमारे साथ खड़े रहेंगे, वही सच्चे शिवसैनिक हैं और जो इस बैठक में नहीं आएंगे, उन्हें दुनिया बेईमान और गद्दार के नाम से जानेगी। राउत ने एक दिन पहले भी तंज कसते हुए कहा था कि वे 18 जून को सियासी थाली सजाकर बैठेंगे, जिसे नमक चखना हो वह आ जाए।
संसद भवन में सजी बैठक
पुरानी संसद भवन के भीतर इस समय बेहद तनावपूर्ण माहौल है, जहां उद्धव गुट के नेता बैठक के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, ताजा मिल रही खबरों के अनुसार, शुरुआती दौर में इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए सिर्फ कुछ चुनिंदा चेहरे ही पहुंचे हैं, जिनमें अनिल देसाई, अरविंद सावंत, राजा भाऊ वाजे और खुद संजय राउत शामिल हैं। आने वाले सभी सांसदों की बाकायदा उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक रजिस्टर भी तैयार किया गया है ताकि यह साफ हो सके कि कौन सा नेता किसके पाले में खड़ा है। संजय राउत ने विरोधियों को सीधे तौर पर ललकारते हुए कहा कि अगर किसी में दम है तो वह बालासाहेब ठाकरे के वफादार विधायकों और सांसदों को तोड़कर दिखाए। उन्होंने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि वे केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर दिखाकर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी इस सियासी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगी।
क्या बचेगा उद्धव का वजूद?
इस पूरे ड्रामे के बीच अरविंद सावंत और संजय राउत ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस बिनाह पर शिंदे की पार्टी खुद को असली शिवसेना कह रही है? असली शिवसेना आज भी ठाकरे परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है क्योंकि जहां ठाकरे रहेंगे, वहीं असली शिवसेना रहेगी। इसके साथ ही नदारद रहने वाले सांसदों को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि जो भी इस बैठक से दूरी बनाएगा, उसके खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरी कसरत इस बात का फैसला करेगी कि संसद के भीतर उद्धव ठाकरे का अपनी पार्टी पर नियंत्रण रहेगा या उन्हें एक और गहरे और दर्दनाक विभाजन का सामना करना पड़ेगा। उधर, सूत्रों का कहना है कि बागी सांसदों के दल ने दलबदल विरोधी कानून की मार से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत यानी छह का आंकड़ा पूरा करके लोकसभा अध्यक्ष से अनौपचारिक मुलाकात कर ली है। अब देखना यह है कि दिल्ली की निगरानी में तैयार हुआ यह 'ऑपरेशन टाइगर' कामयाब होता है या उद्धव अपनी सेना को बचाने में सफल रहते हैं।