तमिलनाडु पहुंचे पीएम मोदी, नए पंबन रेल ब्रिज का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामेश्वरम को जोड़ने वाले नए पंबन रेल ब्रिज का उद्घाटन किया है। इस ब्रिज के माध्यम से तमिलनाडु के मंडपम रेलवे स्टेशन को रामेश्वरम रेलवे स्टेशन से जोड़ा गया है, जो देश का पहला वर्टिकल सस्पेंशन ब्रिज है। इसके बाद, पीएम मोदी रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे।;

Update:2025-04-06 08:18 IST

PM Modi to inaugurate new Pamban Bridge (Photo: Social Media)

रामनवमी के खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को एक बड़ी सौगात दी है। पीएम मोदी ने आज तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित पंबन में बने देश के पहले वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक तकनीक से लैस ब्रिज समुद्र के ऊपर उठने की क्षमता रखता है। यह ब्रिज सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का भी प्रतीक बन चुका है।


तमिलनाडु में मंडपम रेलवे स्टेशन को रामेश्वरम रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए देश के पहले वर्टिकल सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले रामेश्वरम के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे। इसके बाद, वे रामेश्वरम में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की नींव रखेंगे और उन्हें देश को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर, वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

वहीं, पीएम मोदी ने श्रीलंका से लौटते वक्त रामसेतु दर्शन का वीडियो शेयर करते हुये लिखा, श्रीलंका से लौटते समय मुझे राम सेतु के दर्शन करने का सौभाग्य मिला और, एक दिव्य संयोग की बात है कि यह उसी समय हुआ जब अयोध्या में सूर्य तिलक हो रहा था,दोनों के दर्शन करके धन्य हो गया,प्रभु श्री राम हम सभी को जोड़ने वाली शक्ति हैं,उनकी कृपा हम सभी पर सदैव बनी रहे।

पंबन ब्रिज तकनीक का बेहतर उदाहरण- पीएम मोदी

आज रामनवमी पर पर रामेश्वरम में पंबन ब्रिज का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित किया। अपने सम्बोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज रामवनमी है। प्रभु श्री राम की प्रेरणा ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। अयोध्या का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज सूर्य की किरणों ने रामलला का भव्य तिलक किया। तमिलनाडु के साहित्य में भी भगवान् राम के बारे में बात की कही गई है।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि आज 8300 करोड़ के प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया गया। यह भारत रत्न डॉ कलाम की धरती है। उन्होंने आगे कहा कि यहां जो पंबन ब्रिज है, वह तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है। 21वीं सदी में इंजीनियरिंग का यह बेहतरीन उदाहरण है। पंबन ब्रिज यात्रा को सुगम बनाएगा।

पंबन ब्रिज: इंजीनियरिंग का अद्वितीय उदाहरण

पंबन ब्रिज का नया रूप भारत के इंजीनियरिंग कौशल का शानदार उदाहरण है। यह पुल 2.08 किलोमीटर लंबा है और इसकी लागत ₹700 करोड़ से अधिक है। रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला यह पुल भारतीय इंजीनियरिंग की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है और यह दक्षिण भारत के विकास को गति देगा।

111 साल बाद नया रूप

पंबन ब्रिज का निर्माण पहली बार 1914 में हुआ था और यह देश का पहला समुद्र पर बना रेल पुल था। अब, 111 साल बाद इसे नए कलेवर में तैयार किया गया है। यह पुल ना केवल कनेक्टिविटी बढ़ाता है, बल्कि एक नए युग की ओर अग्रसर करता है।

बड़े जहाजों के लिए आसान मार्ग, निर्बाध ट्रेन संचालन

नया पंबन ब्रिज भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी-ब्रिज है, जो जहाजों को नीचे से गुजरने की सुविधा देता है। इसमें 99 स्पैन और एक वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जो 17 मीटर तक ऊपर उठता है। इस पुल की खासियत यह है कि अब बड़े जहाज भी आसानी से गुजर सकते हैं और ट्रेन संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। पंबन ब्रिज बनाने की योजना एक शताब्दी पहले ब्रिटिश सरकार द्वारा तैयार की गई थी। इसका उद्देश्य था धनुषकोडी (भारत) और थलाईमन्नार (श्रीलंका) के बीच समुद्री मार्ग को सुगम बनाना, ताकि जहाज़ इसके नीचे से गुजर सकें। इसके लिए एक सस्पेंशन ब्रिज बनाने की मंज़ूरी दी गई और 1911 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ।

दो साल में ब्रिज तैयार हो गया, और 24 फ़रवरी 1914 को चेन्नई एग्मोर से धनुषकोडी तक पहली ट्रेन चलाई गई। इससे यात्रियों को एक ही टिकट पर चेन्नई से होते हुए कोलंबो तक यात्रा करने की सुविधा मिली। यह ब्रिज अमेरिका की शेर्ज़र रोलिंग लिफ्ट ब्रिज कंपनी द्वारा डिज़ाइन किया गया था और इसका निर्माण इंग्लैंड की एक कंपनी ने किया था। इसे "शेर्ज़र ब्रिज" इसलिए नामित किया गया क्योंकि इसके डिज़ाइन और तकनीक में स्पेनिश इंजीनियर शेर्ज़र का महत्वपूर्ण योगदान था।

तेज रफ्तार के लिए तैयार

पंबन ब्रिज पर अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटा रखी गई है, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से फिलहाल इसकी गति को 80 किमी प्रति घंटा तय किया गया है। यह पुल अगले 100 वर्षों तक ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षित रहेगा।

कनेक्टिविटी और श्रद्धा का प्रतीक

प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह पुल केवल एक संरचना नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में कनेक्टिविटी और श्रद्धा दोनों का सम्मान है। रामेश्वरम, जो चारधामों में से एक है, अब आधुनिकता से मजबूती से जुड़ चुका है। यह पुल भारत के 2047 तक विकसित भारत बनने के सपनों की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। नया पंबन रेल पुल भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है और इसकी विशेष कोटिंग इसे समुद्री वातावरण से होने वाले जंग से बचाती है, जिससे इसकी उम्र लंबी होती है।

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