BIMSTEC सम्मेलन में हिस्सा लेने PM Modi जायेंगे बैंकॉक, भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को मिलेगी मजबूती

पिछली बार यह सम्मेलन 30 मार्च 2022 को कोलंबो में हुआ था। इस बार का थीम "समृद्ध, लचीला और खुला BIMSTEC" रखा गया है, जिससे साफ है कि इस बार क्षेत्रीय एकता और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर फोकस रहेगा।;

Update:2025-04-02 16:19 IST

PM Modi (Photo: Social Media)

बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) का छठा शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल को बैंकॉक में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन से पहले 2 अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी, जबकि 3 अप्रैल को विदेश मंत्रियों की मुलाकात तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 अप्रैल को इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बैंकॉक रवाना होंगे।

तीन साल बाद हो रहा BIMSTEC समिट

पिछली बार यह सम्मेलन 30 मार्च 2022 को कोलंबो में हुआ था। इस बार का थीम "समृद्ध, लचीला और खुला BIMSTEC" रखा गया है, जिससे साफ है कि इस बार क्षेत्रीय एकता और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर फोकस रहेगा।

BIMSTEC सात सदस्य देशों— बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड—के बीच सुरक्षा, व्यापार और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है। इस समिट में 6वें BIMSTEC घोषणापत्र को अपनाया जाएगा, जो भविष्य के रोडमैप को तय करेगा।इसके अलावा, सभी सदस्य देश 'समुद्री परिवहन सहयोग समझौते' पर भी हस्ताक्षर करेंगे, जिससे बंगाल की खाड़ी में व्यापार और आवाजाही को और बढ़ावा मिलेगा।

BIMSTEC क्यों है खास?

इस संगठन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देश शामिल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जब आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, तब BIMSTEC की भूमिका और भी अहम हो जाती है। यह संगठन कृषि, कनेक्टिविटी, पर्यावरण, विज्ञान-तकनीक, व्यापार, निवेश और आपदा प्रबंधन जैसे अहम मुद्दों पर काम कर रहा है।

BIMSTEC का असली लीडर कौन?

BIMSTEC में भारत सबसे मजबूत और प्रभावशाली देश है। भारत इस संगठन के बजट में 32% योगदान देता है और नोएडा में BIMSTEC मौसम विज्ञान केंद्र तथा बेंगलुरु में BIMSTEC ऊर्जा केंद्र की मेजबानी करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। 2016 में गोवा में BIMSTEC रिट्रीट की मेजबानी करने से लेकर 2022 में $1 मिलियन के अनुदान की घोषणा तक, भारत लगातार इस संगठन में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

चीन के विस्तारवाद को रोकने की रणनीति

भारत ने BIMSTEC पर अपना फोकस बढ़ा दिया है और SAARC (सार्क) को लगभग भुला दिया है। कारण स्पष्ट है—SAARC में पाकिस्तान की मौजूदगी के कारण वहां कोई ठोस नतीजे नहीं निकलते थे। 2016 के उरी हमले के बाद से SAARC की कोई बड़ी बैठक नहीं हुई है।

दूसरी तरफ, चीन बंगाल की खाड़ी के देशों में अपनी जड़ें गहरी करने में लगा हुआ है। ऐसे में भारत BIMSTEC को मजबूत करके क्षेत्र में अपनी स्थिति और प्रभाव को और मजबूत करना चाहता है। यदि भारत इस संगठन में प्रभावी नेतृत्व करता है, तो यह सदस्य देशों को चीन से दूर रखने में मदद करेगा।

भारत की भूमिका और संभावनाएं

BIMSTEC में भारत सबसे बड़ी आर्थिक और राजनीतिक शक्ति है। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत इस संगठन का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता रखता है। अगर भारत इन देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर लेता है, तो ये देश चीन से पहले भारत के हितों को प्राथमिकता देंगे और बीजिंग के किसी भी रणनीतिक प्रोजेक्ट को समर्थन देने से पहले दो बार सोचेंगे।

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