Waqf Bill: अब संरक्षित स्मारकों पर नहीं होगा वक्फ का कोई दावा, डीएम को बोर्ड के फैसलों की समीक्षा का अधिकार
Waqf Bill: बिल में किए गए बदलाव के मुताबिक अब संरक्षित स्मारकों पर वक्फ बोर्ड का कोई दावा नहीं रह जाएगा।;
Waqf Bill: लोकसभा की मंजूरी के बाद वक्फ संशोधन बिल आज राज्यसभा में भी पारित हो जाने की उम्मीद है। लोकसभा में इस बिल को पारित कराने में मोदी सरकार को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई और 288 सदस्यों ने बिल के समर्थन में मतदान किया। बुधवार की देर रात बिल के विपक्ष में 232 वोट पड़े। अब राज्यसभा में इस बिल के पारित होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
लोकसभा में इस बिल को लेकर बुधवार को करीब 12 घंटे तक जोरदार बहस हुई। इस बिल को लोकसभा में पेश किए जाने से एक रात पहले इसमें तीन बड़े बदलाव किए गए हैं जिनका आने वाले दिनों में बड़ा असर देखने को मिलेगा। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंगलवार की रात को ही इन बदलावों को बिल में शामिल किया गया है और फिर बुधवार की सुबह बिल की कॉपी संसद सदस्यों को दी गई थी। बिल में किए गए बदलाव के मुताबिक अब संरक्षित स्मारकों पर वक्फ बोर्ड का कोई दावा नहीं रह जाएगा। इसके साथ ही डीएम को वक्फ बोर्ड के फैसलों की समीक्षा करने का अधिकार भी दिया गया है।
संरक्षित स्मारकों पर अब वक्फ बोर्ड नहीं कर सकेगा दावा
देश की कई संरक्षित स्मारकों पर वक्फ बोर्ड की ओर से दावा किया जाता रहा है। इन स्मारकों में दिल्ली का कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, सफदरजंग का मकबरा और दिल्ली का पुराना किला जैसी महत्वपूर्ण इमारतें भी हैं। वक्फ संशोधन बिल में किए गए अहम बदलाव के अनुसार अब संरक्षित स्मारकों को वक्फ की संपत्ति नहीं माना जाएगा। अभी तक जिन संरक्षित स्मारकों को वक्फ संपत्ति का दर्जा प्राप्त था, अब वह भी खत्म हो जाएगा।
आने वाले दिनों में किसी भी भी संरक्षित स्मारक को वक्फ में शामिल नहीं किया जा सकेगा। विधेयक के क्लॉज 4 में बदलाव करके यह बड़ा कदम उठाया गया है। देश में करीब 200 ऐसे स्मारक हैं जो राज्य सरकार की एजेंसियों या एएसआई की ओर से संरक्षित हैं मगर उन्हें वक्फ की संपत्ति माना गया है। इस विधेयक के लागू होने के बाद यह दर्जा समाप्त हो जाएगा। इस बिल के जरिए सभी संरक्षित स्मारक सरकार के अधीन आ जाएंगे।
डीएम को मिला फैसलों की समीक्षा का अधिकार
लोकसभा में बुधवार को बहस के दौरान विभिन्न जिलों में डीएम को वक्फ के फिसलों की समीक्षा का अधिकार दिए जाने के मुद्दे पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई थी। विपक्षी सांसदों की ओर से यह मुद्दा उठाए जाने के बाद संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर जवाब भी दिया था। उनका कहना था कि देश के विभिन्न जिलों में डीएम की अनदेखी नहीं की जा सकती और हमें डीएम पर भरोसा करना ही होगा।
वक्फ संशोधन विधेयक के जरिए वक्फ बोर्ड के फैसलों की सरकारी स्तर पर स्क्रूटनी की जाएगी। वक्फ बोर्ड के फैसलों की समीक्षा का अधिकार डीएम को दिया गया है। अब वक्फ बोर्ड की ओर से परित किसी भी प्रस्ताव के लिए 45 दिन की लिमिट होगी। इसका मतलब है कि वक्फ बोर्ड के फैसले को जस का तस लागू नहीं किया जा सकेगा। 45 दिन की अवधि के दौरान डीएम की ओर से वक्फ बोर्ड के फैसलों की समीक्षा की जाएगी।
आदिवासी क्षेत्र की जमीन पर कोई दावेदारी नहीं
मोदी सरकार की ओर से आदिवासियों के हितों की सुरक्षा का दावा पहले से ही किया जाता रहा है। वक्फ संशोधन बिल में एक बड़ा प्रावधान यह किया गया है कि अब आदिवासी इलाके की जमीन को वक्फ संपत्ति नहीं घोषित किया जा सकेगा। संविधान की पांचवी और छठी अनुसूची के मुताबिक जिस भूमि को आदिवासी क्षेत्र घोषित किया गया है,वहां वक्फ बोर्ड की ओर से जमीन की कोई दावेदारी नहीं की जा सकेगी। सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए यह कदम उठाया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान इस महत्वपूर्ण बिंदु को रेखांकित किया था। उनका कहना था कि हम आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए कृत संकल्प हैं और इसीलिए यह कदम उठाया गया है।