Trump Reciprocal Tariff: ट्रंप के टैरिफ का जवाब तलाश रही सरकार, बनाया नया रणनीतिक प्लान

Trump Reciprocal Tariff: अमेरिका के नए आयात शुल्क आदेश के तहत अब सभी व्यापारिक साझेदारों से आयातित वस्तुओं पर 10% से 50% तक अतिरिक्त टैक्स लगेगा। यह 5 अप्रैल 2025 से लागू होगा, जबकि भारत पर विशेष रूप से 27% अतिरिक्त शुल्क 9 अप्रैल से प्रभावी होगा। यह फैसला भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।;

Update:2025-04-03 16:39 IST

US President Donald Trump (Photo: Social Media)

Trump Reciprocal Tariff:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ के जवाब में भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकार का कहना है कि वह इस निर्णय के प्रभावों की गहराई से समीक्षा कर रही है और इसके संभावित समाधान तलाश रही है।

अमेरिका के नए आयात शुल्क आदेश के तहत अब सभी व्यापारिक साझेदारों से आयातित वस्तुओं पर 10% से 50% तक अतिरिक्त टैक्स लगेगा। यह 5 अप्रैल 2025 से लागू होगा, जबकि भारत पर विशेष रूप से 27% अतिरिक्त शुल्क 9 अप्रैल से प्रभावी होगा। यह फैसला भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

सरकार अलर्ट मोड में

वाणिज्य मंत्रालय इस नए शुल्क के असर का गहन अध्ययन कर रहा है और भारतीय उद्योगपतियों और निर्यातकों से लगातार फीडबैक ले रहा है। सरकार इस स्थिति को "आर्थिक संकट में अवसर खोजने" के रूप में देख रही है और अमेरिकी व्यापार नीति में नए संभावित अवसरों का भी आकलन कर रही है।

क्या 'मिशन 500' खतरे में?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 फरवरी 2025 को ‘मिशन 500’ की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाना था। लेकिन नए आयात शुल्क के चलते व्यापार की गति धीमी पड़ सकती है और यह लक्ष्य मुश्किल हो सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या असर पड़ेगा?

वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौतों को लेकर चर्चा जारी है, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण, तकनीकी सहयोग और निवेश जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। भारत सरकार इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन के साथ संपर्क में है और उम्मीद है कि जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा।

भारतीय उद्योगों के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

27% अतिरिक्त शुल्क से भारत के टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर को बड़ा झटका लग सकता है। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर होगी और अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यात प्रभावित होगा।

क्या होगा भारत का अगला कदम?

भारत सरकार रणनीतिक वार्ताओं के जरिए इस टैरिफ का समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। सरकार नए बाजार तलाशने, व्यापारिक नीति में सुधार करने और अमेरिकी प्रशासन से बातचीत करने की रणनीति बना रही है, ताकि भारतीय उद्योगों को राहत दी जा सके।

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