Amit Shah: 260 मौतों के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन, शाह बोले- हालात सामान्य हो रहे हैं

Amit Shah: मणिपुर में जारी अस्थिरता और हिंसा के बीच राष्ट्रपति शासन को लेकर संसद में बड़ी कवायद हुई।;

Update:2025-04-04 08:59 IST

Amit Shah: मणिपुर में जारी अस्थिरता और हिंसा के बीच राष्ट्रपति शासन को लेकर संसद में बड़ी कवायद हुई। राज्यसभा ने शुक्रवार तड़के मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन की पुष्टि वाले सांविधिक संकल्प को ध्वनिमत से पारित कर दिया, जिससे अब इस पर संसद की दोनों सदनों की मुहर लग गई है। इस प्रस्ताव को पहले ही लोकसभा में पारित किया जा चुका था।

संकल्प पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल करना, प्रभावितों का पुनर्वास करना और हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि इस संवेदनशील मसले पर राजनीति से परहेज किया जाए। शाह ने बताया कि मणिपुर में पिछले चार महीनों से किसी की भी मौत नहीं हुई है, जो कि शांति बहाल करने की दिशा में सरकार के प्रयासों का परिणाम है।

शाह ने बताया कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला तब लिया गया, जब मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया और बहुमत के समर्थन का अभाव दिखा। राज्यपाल ने संविधान के तहत फैसला लेते हुए केंद्र को अनुशंसा भेजी, जिसे कैबिनेट ने स्वीकार कर राष्ट्रपति को भेजा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मणिपुर में हालात एक अदालती निर्णय के बाद बिगड़े, जिसमें एक जाति को आरक्षण देने की बात कही गई थी। इस फैसले के खिलाफ भड़की हिंसा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अगले ही दिन उस आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन तब तक तनाव भड़क चुका था।

वहीं, विपक्ष ने सरकार की मणिपुर नीति पर तीखा प्रहार किया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर मणिपुर के हालात को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक मणिपुर का दौरा नहीं किया, जो इस संकट के प्रति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। खरगे ने मणिपुर हिंसा की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए केंद्र सरकार से श्वेत पत्र जारी करने को कहा।

अमित शाह ने जवाब में कहा कि सरकार संवाद के रास्ते को अपनाने जा रही है और जल्द ही मणिपुर में दोनों समुदायों को एक साथ बैठाकर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मणिपुर के लोगों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। इस फैसले के साथ मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को संवैधानिक मंजूरी मिल चुकी है, और अब सबकी निगाहें वहां स्थायी समाधान और स्थिरता की ओर उठी हैं।

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