बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले ने बढ़ाई ममता की मुश्किलें, हजारों नियुक्तियां रद्द होने के बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिश

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के 25,000 से ज्यादा शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति को रद्द करने के फैसले को लेकर प्रतिक्रिया दी है।;

Update:2025-04-04 11:26 IST

ममता बनर्जी

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुश्किलों में घिर गई हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 25,753 शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति को रद्द करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी और पार्टी की साख बचाने के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी मगर उन्हें वहां से भी झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं उनका तबादला किया जाता है मगर शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है और ममता बनर्जी पर हमले तेज हो गए हैं। इस्तीफा की तेज होती मांग के बीच ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुट गई है।

शिक्षक भर्ती घोटाले में फंसी टीएमसी की गर्दन

पश्चिम बंगाल में 2016 में 25,753 शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। ममता के राज में हुई इस भर्ती में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार और मनमानी की शिकायतें सामने आई थीं। कलकता हाईकोर्ट ने 2022 में इस मामले की सीबीआई से जांच कराने का निर्देश दिया था। इस जांच के दौरान ममता सरकार के मंत्रियों और कई अन्य नेताओं की गर्दन फंस गई थी और उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे।

इन नेताओं में ममता बनर्जी सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, पूर्व मंत्री परेश अधिकारी, पूर्व एसएससी अधिकारी शांतिप्रसाद सिन्हा और सुबीरेश भट्टाचार्य, पूर्व टीएमसी विधायक माणिक भट्टाचार्य समय टीएमसी के कई अन्य नेता भी शामिल थे। सीबीआई ने इनमें से कई नेताओं को गिरफ्तार किया था। मौजूदा समय में इनमें से कई को जमानत मिल चुकी है जबकि पार्थ चटर्जी अभी भी जमानत हासिल करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

विपक्ष हमलावर, ममता से मांगा इस्तीफा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी पार्टियां मैदान में उतर गई हैं। कांग्रेस और माकपा ने ममता पर हमले तेज कर दिए हैं जबकि भाजपा ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की है। नियुक्तियों के रद्द होने के बाद उन्हें अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य सरकार की उदासीनता के कारण उन लोगों की भी नौकरी चली गई जो योग्य थे और जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर नौकरी पाई थी। उन्होंने कहा कि वास्तविक उम्मीदवारों की सूची को अलग करने के लिए राज्य सरकार को एक साल का वक्त मिला था मगर सरकार ने कुछ भी नहीं किया।

डैमेज कंट्रोल में जुटीं ममता बनर्जी

विपक्षी दलों के तेज होते हमले के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुट गई हैं। उन्होंने अदालत के फैसले से नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों की 7 अप्रैल को बड़ी बैठक बुलाई है। ममता की ओर से उठाए गए इस कदम से साफ हो गया है कि वे नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों के प्रति अपनी सहानुभूति जताने की कोशिश में झूठी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर लगी हुई हैं कि टीएमसी नेताओं के भ्रष्टाचार के कारण ममता की सरकार डूब जाएगी या फिर पहले की तरह ममता डैमेज कंट्रोल में कामयाब होगी?

पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है और ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि ममता डैमेज कंट्रोल में कामयाब हो पाती हैं या नहीं। वैसे टीएमसी का कुछ नेताओं का भी मानना है कि इस प्रकरण का चुनाव पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

भ्रष्ट जजों का सिर्फ तबादला, शिक्षकों की नौकरी ले ली

इस बीच ममता बनर्जी ने फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिन जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं,उनका सिर्फ तबादला कर दिया जाता है। दूसरी ओर शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर किसी जज के घर से पैसे बरामद होते हैं तो उसका सिर्फ ट्रांसफर किया जाता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के इन शिक्षकों को क्यों बर्खास्त कर दिया गया?

भाजपा और माकपा पर साजिश का आरोप

ममता ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ फैसला देने वाले पूर्व के जज अब भाजपा के सांसद बन गए हैं। उन्होंने भाजपा और माकपा पर आरोप लगाया कि दोनों दलों ने मिलकर इस फैसले को प्रभावित करने के लिए साजिश रची थी। दोनों दल मिलकर पश्चिम बंगाल की शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने में जुटे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि मैं जजों का सम्मान करती हूं मगर मैं इस फैसले को स्वीकार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करेगी और चयन प्रक्रिया को दोहराया जाएगा। ममता ने यह भी कहा कि हजारों शिक्षकों की नौकरी जाने के कारण पश्चिम बंगाल के स्कूलों में संकट पैदा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हजारों शिक्षकों पर ही नहीं बल्कि उनके परिवारों पर भी बड़ा असर पड़ा है और वे गहरे संकट में फंस गए हैं।

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