TMC Revolt: TMC में बागियों की झड़ी, पूर्व मंत्री मानस भुइंया ने भी दीदी को दिया झटका, छोड़ी पार्टी

TMC Manas Bhunia Resigns: पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी का संकट गहरा गया है। पूर्व मंत्री और 7 बार के विधायक मानस भुइंया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

Update:2026-06-14 12:57 IST

TMC Manas Bhunia Resigns: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार मुसीबतों से घिरीं ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और सात बार के विधायक रह चुके मानस भुइंया ने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। भुइंया ने अपना त्यागपत्र सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजा है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वे जिन राजनैतिक आदर्शों और नीतियों को देखकर इस दल में आए थे, टीएमसी अब उन सिद्धांतों को पूरी तरह भूल चुकी है। हालांकि, अन्य बागियों के विपरीत उन्होंने ममता या अभिषेक बनर्जी पर कोई सीधा व्यक्तिगत हमला नहीं किया।

पुरानी पार्टी में वापसी के कयास तेज

इस्तीफा देने के तुरंत बाद मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए मानस भुइंया ने अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे भले ही टीएमसी छोड़ रहे हैं, लेकिन राजनीति को अलविदा नहीं कह रहे हैं। वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहेंगे। हालांकि, उन्होंने अपने भविष्य की रणनीति का खुलासा नहीं किया, जिससे बंगाल के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिदनापुर के यह कद्दावर नेता या तो अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में घर वापसी कर सकते हैं या फिर राज्य में तेजी से मजबूत हो रहे विरोधी खेमे का दामन थाम सकते हैं।

सबांग सीट से मिली शिकस्त और दशकों का राजनैतिक सफर

अविभाजित मिदनापुर जिले की राजनीति में मानस भुइंया का नाम बेहद सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने दशकों तक सबांग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वहां के सबसे असरदार चेहरे बने रहे। कांग्रेस में एक लंबा वक्त गुजारने के दौरान वे प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके थे। साल 2016 में वे ममता बनर्जी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर टीएमसी में शामिल हुए थे। उनके आने से उस पूरे इलाके में तृणमूल कांग्रेस को एक नई मजबूती मिली थी और बाद में ममता ने उन्हें अपनी कैबिनेट में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। हालांकि, इस बार के चुनाव में उन्हें सबांग सीट से हार का मुंह देखना पड़ा।

बिखर रहा है ममता का कुनबा

मानस भुइंया का यह इस्तीफा ऐसे नाजुक मोड़ पर आया है जब टीएमसी अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है। संसद से लेकर सड़क तक ममता बनर्जी की पकड़ ढीली होती जा रही है। लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसद पहले ही बगावत का झंडा बुलंद कर चुके हैं और ममता के पाले में सिर्फ आठ सांसद बचे हैं। इसके अलावा चार राज्यसभा सदस्य भी इस्तीफा दे चुके हैं। दूसरी तरफ, विधानसभा के भीतर भी बगावत की आग भड़क चुकी है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने खुलेआम एलान कर दिया है कि वे ममता दीदी का सम्मान करते हैं, लेकिन पार्टी में अभिषेक बनर्जी की मनमानी के लिए कोई जगह नहीं है। ऋतब्रत के साथ करीब 60 विधायकों का समर्थन है, जो ममता को राजनैतिक रूप से बिल्कुल अलग-थलग करने में जुटे हैं।

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