Bharat Tiwari Encounter: कौन हैं भोजपुर एसपी राज? भरत तिवारी एनकाउंटर ने बढ़ाईं मुश्किलें
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद जिले के पुलिस अधीक्षक राज लगातार सुर्खियों में हैं।
Bharat Tiwari Encounter
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद जिले के पुलिस अधीक्षक राज लगातार सुर्खियों में हैं। इस मामले ने न केवल राजनीतिक माहौल को गर्म किया है, बल्कि पुलिस कार्रवाई पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। पुलिस प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।
कौन हैं भोजपुर के एसपी राज?
राज भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 2019 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं। इंजीनियरिंग (B.E.) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना पूरा किया। अपनी मेहनत और प्रशासनिक क्षमता के दम पर उन्होंने पुलिस सेवा में अलग पहचान बनाई। भोजपुर की जिम्मेदारी संभालने से पहले वह बक्सर के डुमरांव और मोतिहारी सदर में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। 12 सितंबर 2024 को उन्हें भोजपुर जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया था। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई अपराध नियंत्रण अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, लेकिन भरत तिवारी एनकाउंटर मामला उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद?
भरत तिवारी का एनकाउंटर 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुआ था। पुलिस का दावा है कि भरत ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। वहीं, घटना के बाद सामने आए कुछ वीडियो और परिजनों के आरोपों ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया। परिवार का कहना है कि भरत आत्मसमर्पण की स्थिति में था और उसकी हत्या की गई। इसी आधार पर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।
एसपी पर लगे गंभीर आरोप
भरत तिवारी के भाई और मां ने आरोप लगाया है कि भोजपुर एसपी राज देर रात उनके घर पहुंचे और मीडिया से दूरी बनाने तथा मामले को आगे न बढ़ाने का दबाव बनाया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने विरोध जारी रखा तो दूसरे बेटे के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाएगा। इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। हालांकि पुलिस प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि एसपी केवल पीड़ित परिवार से मुलाकात करने और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाने गए थे। पुलिस ने धमकी देने के आरोपों को पूरी तरह असत्य, तथ्यहीन और भ्रामक बताया है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए बड़ी परीक्षा बन चुका है। जांच रिपोर्ट आने तक इस मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं और पूरे प्रदेश की नजर अब न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है।