Sabse Bada Dhokhebaj: चार्ल्स पोंजी एक ऐतिहासिक वित्तीय धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड

Charles Ponzi Historical Fraud Story: चार्ल्स पोंजी, एक ऐसा कुख्यात ठग, जिसे आज भी उसके द्वारा की गई धोखाधड़ी के लिए जाना जाता है। चार्ल्स को ही पोंजी स्कीम का जनक माना जाता है।;

Written By :  Akshita Pidiha
Update:2025-04-03 11:01 IST

Sabse Bada Dhokhebaj (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Financial Fraud Charles Ponzi: चार्ल्स पोंजी (Charles Ponzi) को इतिहास के सबसे कुख्यात वित्तीय ठगों में से एक माना जाता है। उन्होंने 20वीं शताब्दी की शुरुआत में अमेरिका में ‘पोंजी स्कीम’ नामक धोखाधड़ी योजना शुरू की, जिसने हजारों निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया। पोंजी स्कीम (Ponzi Scheme) आज भी वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। इस लेख में चार्ल्स पोंजी के जीवन, उनके घोटाले, गिरफ्तारी और उनकी विरासत का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।

पोंजी स्कीम (Ponzi Scheme) का नाम उस व्यक्ति के नाम पर पड़ा जिसने इसे पहली बार अंजाम दिया था— चार्ल्स पोंजी (Charles Ponzi)। मार्च 1882 में इटली में जन्मे चार्ल्स पोंजी को इस स्कैम का जनक माना जाता है। आधुनिक दौर में 'स्टार्टअप' शब्द लोकप्रिय हुआ है, लेकिन पोंजी स्कीम भी एक तरह से ठगी का स्टार्टअप ही था। यह इतना सफल रहा कि आज भी ठग इसे अलग-अलग तरीकों से अपनाते हैं।

चार्ल्स पोंजी की अमेरिका यात्रा (Charles Ponzi's Visit To America)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

1903 में चार्ल्स पोंजी इटली से अमेरिका गया। लेकिन जल्द ही उसने अपने पैसे जुए और पार्टी में गंवा दिए। वह तेज दिमाग का था, इसलिए उसने अंग्रेजी सीख ली और कई नौकरियां कीं। हालांकि, चोरी और फ्रॉड के कारण उसे हर जगह से निकाल दिया गया। 1907 में वह कनाडा चला गया, जहां उसे Banco Zarossi नामक बैंक में नौकरी मिली। चूंकि वह अंग्रेजी, इटैलियन और फ्रेंच जानता था, इसलिए उसे यह नौकरी आसानी से मिल गई।

पोंजी स्कीम का आइडिया

Banco Zarossi अपने निवेशकों को 6% ब्याज देता था, जबकि अन्य बैंकों में ब्याज दर 2-3% ही थी। यह अतिरिक्त ब्याज नया निवेश लेकर पुराने निवेशकों को चुकाने से दिया जाता था। चार्ल्स ने इस मॉडल को देखा और उसे भी ऐसा ही स्कैम करने का विचार आया। जल्द ही बैंक की पोल खुल गई और मालिक लुइस ज़ारोसी (Louis Zarossi) लोगों का पैसा लेकर मैक्सिको भाग गया। चार्ल्स ने कई बार फ्रॉड करने की कोशिश की। लेकिन उसे बार-बार जेल जाना पड़ा।

चार्ल्स पोंजी का प्रारंभिक जीवन (Charles Ponzi Wikipedia In Hindi)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

चार्ल्स पोंजी का जन्म 3 मार्च, 1882 को इटली के लुगो शहर में हुआ था। उनका पूरा नाम कार्लो पोंजी (Carlo Ponzi) था। उनका परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं था। लेकिन उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने के लिए इटली के रोम विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।

हालांकि, उनका पढ़ाई में मन नहीं लगा और वे जीवन में जल्द ही अमीर बनने का सपना देखने लगे। 1903 में, मात्र 21 वर्ष की उम्र में, पोंजी बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका चले आए।

अमेरिका में संघर्ष और अवसरों की तलाश

अमेरिका आने के बाद, पोंजी को जल्द ही एहसास हुआ कि अमीर बनना आसान नहीं है। उनके पास पैसे नहीं थे और उन्हें छोटे-मोटे काम करने पड़े। उन्होंने वेटर, बैंक क्लर्क और अन्य छोटे काम किए, लेकिन कोई स्थायी सफलता नहीं मिली।

इसके बाद वे कनाडा चले गए, जहाँ उन्होंने एक बैंक में नौकरी की। लेकिन जल्द ही वे बैंक धोखाधड़ी में लिप्त पाए गए और जेल भेज दिए गए। जेल से छूटने के बाद, वे फिर अमेरिका लौट आए और जल्दी अमीर बनने के नए तरीके खोजने लगे।

पोंजी स्कीम की शुरुआत

चार्ल्स पोंजी ने 1919 में एक नई योजना बनाई, जिससे वे जल्द ही करोड़ों डॉलर कमा सके। उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तरदाता कूपन’ ( International Reply Coupons - IRCs) का इस्तेमाल करके निवेशकों को भारी लाभ का वादा किया।

योजना का मूल विचार

उनका विचार था कि वे अमेरिका और यूरोप के बीच मुद्रा विनिमय दरों में अंतर का फायदा उठाकर पैसा कमा सकते हैं। उस समय, अंतरराष्ट्रीय उत्तरदाता कूपन (IRCs) का उपयोग डाक शुल्क चुकाने के लिए किया जाता था।

पोंजी ने निवेशकों से कहा कि अगर वे अपने पैसे उनके पास निवेश करें, तो वे इन कूपनों को सस्ते में खरीदकर महंगे में बेच देंगे और 45 दिनों में 50% का लाभ देंगे।

धोखाधड़ी कैसे काम करती थी

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

वास्तव में, चार्ल्स पोंजी ने कभी भी आईआरसी का व्यापार नहीं किया। उन्होंने पुराने निवेशकों को नए निवेशकों के पैसे से भुगतान किया। इस प्रकार की योजना को आज पिरामिड स्कीम (Pyramid Scheme) या पोंजी स्कीम (Ponzi Scheme) कहा जाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

बड़ा रिटर्न देने का वादा – उन्होंने 45 दिनों में 50% और 90 दिनों में 100% का रिटर्न देने का वादा किया।

नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान – कोई असली व्यापार नहीं था, केवल पैसे का पुनर्वितरण हो रहा था।

अखबारों में प्रचार – जब कुछ शुरुआती निवेशकों को पैसे मिले, तो उन्होंने इस योजना की सिफारिश की और अधिक लोग इसमें शामिल हो गए।

पोंजी स्कीम का विस्तार- चार्ल्स की स्कीम तेजी से लोकप्रिय हुई और महज 6 महीनों में उसने 2.5 मिलियन डॉलर जमा कर लिए। इंग्लैंड और न्यू जर्सी में भी उसने शाखाएं खोल दीं। लेकिन वास्तव में वह आईआरसी व्यापार में निवेश नहीं कर रहा था, बल्कि नए निवेशकों से मिले पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान कर रहा था।

स्कैम का खुलासा- इस दौरान कई लोगों को शक हुआ। लेकिन चार्ल्स की शक्ति और प्रभाव के कारण वे चुप रहे। पुलिस और सरकारी अधिकारियों में से भी कई ने उसमें पैसा लगाया था। हालांकि, जांच के दौरान पता चला कि बाजार में 160 मिलियन आईआरसी होने चाहिए थे। लेकिन वास्तव में केवल 27,000 आईआरसी ही मौजूद थे। अमेरिकी पोस्टल सर्विस से भी पुष्टि हुई कि आईआरसी की कोई बड़ी खरीदारी नहीं हुई थी। इसके बाद निवेशकों ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू कर दिया।

अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव

चार्ल्स का पैसा विभिन्न बैंकों में जमा था। लेकिन निवेशकों द्वारा पैसे निकालने की मांग करने से बैंकों पर भारी दबाव पड़ा और कई बैंक दिवालिया हो गए। जब चार्ल्स की संपत्तियों को बेचकर पैसे वापस किए गए, तब भी निवेशकों को केवल 30% धन ही वापस मिल सका। इस स्कैम के कारण चार्ल्स पोंजी का नाम अमर हो गया और उसके नाम पर ऐसी सभी ठगी योजनाओं को 'पोंजी स्कीम' कहा जाने लगा।

पोंजी स्कीम की सफलता और चरमोत्कर्ष

1920 तक, चार्ल्स पोंजी की योजना बहुत लोकप्रिय हो गई थी। हजारों लोग इसमें निवेश कर रहे थे। उनके पास इतना पैसा आ गया कि वे 1920 में एक लक्जरी घर खरीदने में सफल रहे।

आंकड़े: पोंजी ने केवल छह महीने में 1.5 करोड़ डॉलर (आज के हिसाब से 220 मिलियन डॉलर से अधिक) इकट्ठा कर लिए। 40,000 से अधिक लोगों ने इस योजना में निवेश किया। उनका बैंक अकाउंट करोड़ों डॉलर से भर चुका था।

घोटाले का पर्दाफाश

हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञ और अखबारों को शक होने लगा कि इतनी जल्दी इतना मुनाफा कैसे हो सकता है? बोस्टन पोस्ट नामक अखबार ने पोंजी स्कीम की गहराई से जांच शुरू की।

IRCs के कारोबार की सच्चाई उजागर हुई – पोंजी के पास असली आईआरसी कूपन बहुत ही कम थे, जबकि उन्होंने निवेशकों से लाखों डॉलर इकट्ठा कर लिए थे।

बैंक में असंतुलन पाया गया – जब उनकी संपत्ति और निवेश की तुलना की गई, तो स्पष्ट हुआ कि वे केवल नए निवेशकों के पैसे से पुरानों को भुगतान कर रहे थे।

न्याय विभाग की जांच – सरकारी एजेंसियों ने उनकी योजना की जांच शुरू कर दी, जिससे पता चला कि यह पूरी तरह से एक धोखाधड़ी थी।

गिरफ्तारी और सजा

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

1920 में, चार्ल्स पोंजी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर धोखाधड़ी के कई आरोप लगाए गए। 1921 में उन्हें पांच साल की सजा सुनाई गई। लेकिन तीन साल बाद ही रिहा कर दिया गया।

रिहाई के बाद, उन्होंने फिर से कुछ वित्तीय योजनाएँ बनाईं। लेकिन वे सफल नहीं रहीं। 1925 में, उन्हें एक और धोखाधड़ी मामले में फिर से गिरफ्तार किया गया और सात साल की सजा हुई।

चार्ल्स पोंजी का अंतिम जीवन

सजा पूरी करने के बाद, उन्हें अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया और वे इटली लौट गए। इटली में भी वे एक सामान्य जीवन नहीं जी सके और बाद में ब्राजील चले गए।

उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा और अंततः 18 जनवरी 1949 को ब्राजील में गरीबी और गुमनामी में उनकी मृत्यु हो गई।

पोंजी स्कीम की विरासत

आज भी, चार्ल्स पोंजी की वित्तीय धोखाधड़ी दुनिया भर में एक चेतावनी के रूप में देखी जाती है। उनकी योजना को ‘पोंजी स्कीम’ कहा जाता है, और यह वित्तीय घोटालों का एक प्रमुख उदाहरण बन चुका है।

आधुनिक पोंजी स्कीम के उदाहरण:

बर्नी मैडॉफ (Bernie Madoff) स्कीम – यह इतिहास की सबसे बड़ी पोंजी स्कीम थी, जिसमें निवेशकों के 65 अरब डॉलर डूब गए।

भारतीय चिट फंड घोटाले – कई चिट फंड योजनाएँ भी पोंजी स्कीम का एक रूप होती हैं।

इंटरनेशनल रिप्लाई कूपन (आईआरसी) का खेल

चार्ल्स को इंटरनेशनल ट्रेड मैगजीन के जरिए स्पेन की एक कंपनी का पत्र मिला जिसमें इंटरनेशनल रिप्लाई कूपन (आईआरसी) का जिक्र था। उस समय पत्राचार के लिए आईआरसी का उपयोग किया जाता था। इटली में इसकी कीमत कम थी और अमेरिका में अधिक, जिससे चार्ल्स को इसमें व्यापार का अवसर दिखा। उसने सोचा कि इटली से आईआरसी खरीदकर अमेरिका में बेचकर भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।

फर्जी बिजनेस मॉडल की शुरुआत

इस व्यापार को शुरू करने के लिए चार्ल्स को पूंजी चाहिए थी। बैंकों ने उसे कर्ज देने से इनकार कर दिया, इसलिए उसने निवेशकों से पैसा जुटाने का विचार किया। उसने 45 दिनों में 50% और 90 दिनों में 100% रिटर्न देने का वादा किया। इस उद्देश्य से उसने सिक्योरिटीज एक्सचेंज कंपनी नामक कंपनी स्थापित की।

चार्ल्स पोंजी एक धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड थे, जिन्होंने हजारों लोगों को अपनी चतुर योजना से ठग लिया। उनकी पोंजी स्कीम ने दुनिया को यह सिखाया कि अगर कोई योजना बहुत जल्दी और बहुत अधिक लाभ देने का वादा करती है, तो वह अक्सर धोखाधड़ी होती है।

उनकी कहानी वित्तीय दुनिया में एक महत्वपूर्ण सबक है और आज भी निवेशकों को इससे सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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