Auraiya: औरैया में ‘मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0’ के तहत किसानों को वैज्ञानिक रेशम उत्पादन का प्रशिक्षण

Auraiya News: औरैया के अजीतमल में ‘मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0’ के तहत करीब 50 रेशम किसानों को वैज्ञानिक रेशम उत्पादन की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

Update:2026-08-12 18:39 IST

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Auraiya News: औरैया में केंद्रीय रेशम बोर्ड के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0’ के तहत बुधवार को राजकीय रेशम फार्म, अजीतमल में तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अजीतमल और आसपास के गांवों से करीब 50 रेशम कृषकों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से रेशम उत्पादन करने की तकनीकों की जानकारी देते हुए व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया।

कार्यक्रम में जनता पीजी कॉलेज, बकेवर के मृदा एवं भूमि संरक्षण विभागाध्यक्ष डॉ. बीके राजपूत मुख्य अतिथि रहे। पादप रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। औरैया के सहायक निदेशक रेशम योगेंद्र सिंह ने भी किसानों को रेशम उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।कार्यक्रम का संयोजन केंद्रीय रेशम बोर्ड, गोंडा के क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक-डी छत्रपाल ने किया। उन्होंने किसानों को रेशम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया। केंद्रीय रेशम बोर्ड के तकनीकी सहायक फैयाज अहमद भट ने प्रशिक्षण में सहयोग किया।

प्रशिक्षण के दौरान रेशमकीट पालन गृहों और उपकरणों के वैज्ञानिक शुद्धीकरण एवं कीटाणुशोधन, शहतूत की वैज्ञानिक खेती, पौधरोपण, फसल के रख-रखाव और प्रबंधन के साथ शूट रियरिंग तकनीक का प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर स्वस्थ रेशमकीट तैयार किए जा सकते हैं और गुणवत्तापूर्ण कोया उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।अधिकारियों ने कहा कि रेशम उत्पादन किसानों के लिए कृषि के साथ एक महत्वपूर्ण सहायक गतिविधि और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम है। वैज्ञानिक तरीके अपनाने से कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत भी आयोजन किया गया, जिसमें किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस मौके पर राजकीय रेशम फार्म अजीतमल के प्रभारी राघवेंद्र सिंह, राजकीय रेशम फार्म अजलपुरा के प्रभारी प्रेम नारायण, मास्टर रीलर दुर्गा दास समेत विभागीय कर्मचारी और केंद्रीय रेशम बोर्ड के कार्मिक मौजूद रहे। किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्नत तकनीकों को अपनाने से रेशम उत्पादन और कृषि आय में वृद्धि की उम्मीद है।

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