Auraiya News: औरैया जिले में रेशम कृषकों को वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण, उत्पादन बढ़ाने पर जोर

Auraiya News: औरैया में रेशम कृषकों को वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और बेहतर रेशम उत्पादन के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई।

Update:2026-08-11 16:56 IST

Auraiya News(Photo-Social Media)

Auraiya News: औरैया जिले में मंगलवार को राजकीय रेशम फार्म अजलापुर में रेशम कृषकों के लिए जागरूकता एवं तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्रीय रेशम बोर्ड के ‘मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देकर रेशम उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), गोंडा के वैज्ञानिक-डी श्री छत्रपाल रहे। इस दौरान तकनीकी सहायक श्री फैयाज अहमद भट्ट, फार्म प्रभारी श्री प्रेम नारायण, मास्टर रीलर श्री दुर्गा दास सहित अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में करीब 55 रेशम कृषकों ने भाग लिया।

वैज्ञानिक श्री छत्रपाल ने किसानों को रेशमकीट पालन की वैज्ञानिक विधियों, शहतूत पौध उत्पादन, वैज्ञानिक वृक्षारोपण और शूट रियरिंग तकनीक की जानकारी दी। उन्होंने पालन गृह के विशुद्धीकरण, रेशमकीट रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही रेशम उत्पादन में अपनाई जा रही नवीनतम तकनीकों और नवाचारों से किसानों को अवगत कराया।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें किसानों ने रेशमकीटों में होने वाले रोगों और उनसे होने वाले नुकसान से जुड़ी समस्याएं वैज्ञानिकों के सामने रखीं। वैज्ञानिकों ने मौके पर ही रोगों की पहचान, रोकथाम और प्रबंधन के साथ स्वच्छ एवं वैज्ञानिक पालन पद्धतियों के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन दिया। कृषकों को शहतूत की वैज्ञानिक खेती के तरीके और खेत की मेड़ों सहित अन्य उपलब्ध स्थानों पर पौधरोपण की तकनीक भी समझाई गई। किसानों ने इन विधियों को अपनाने में रुचि दिखाई। इससे शहतूत की पत्तियों की उपलब्धता बढ़ने और रेशम उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है।

मास्टर रीलर श्री दुर्गा दास ने पोस्ट-कोकून गतिविधियों और रेशम धागाकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण कोकून का पर्याप्त उत्पादन होने पर उपलब्ध धागाकरण सुविधा का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर रेशम धागे का उत्पादन किया जा सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

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