सोशल एक्टिविटीज अवार्ड पाए इस शख्स पर रोए हजारो, वजह हैरान करने वाली
जोखन चचा के नाम से मुल्क भर में मशहूर इस शख्स का नाम है सिब्ते हसन। रविवार को इस शख्स ने शहर के अमहट स्थित अपने निवास पर जिंदगी की आख़री सांस ली और सोमवार को हज़ारों की संख्या में लोग जब इनके जनाजे में शामिल हुए तो बहुतेरी आंखों से आंसू निकल पड़े। सोमवार शाम इन्हें सुपुर्द खाक किया गया। ;
सुल्तानपुर : जोखन चचा के नाम से मुल्क भर में मशहूर इस शख्स का नाम है सिब्ते हसन। रविवार को इस शख्स ने शहर के अमहट स्थित अपने निवास पर जिंदगी की आख़री सांस ली और सोमवार को हज़ारों की संख्या में लोग जब इनके जनाजे में शामिल हुए तो बहुतेरी आंखों से आंसू निकल पड़े। सोमवार शाम इन्हें सुपुर्द खाक किया गया।
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जी हां, 65 साल के जोखन चचा यूपी क्या अपने नेक कामो के चलते हिंदुस्तान भर में पहचान रखते थे। आप को जानकार हैरत होगी की मोहर्रम के महीनों में मजलिसों में लाखों खर्च करने वाला ये शख्स इसके अलावा साल भर में मजलिस और महफिल का कार्यक्रम आयोजित कर लाखों खर्च करता था। कद्दावर उलेमा, मौलाना के साथ नामचीन शायरों के लिए उनका दरवाजा कार्यक्रम के अलावा आम दिनों में भी खुला रहता था। सबसे अहम बात ये के पैग़म्बर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन के जन्मदिन पर उनके द्वारा महफिल का बड़ा कार्याक्रम, मोहर्रम के बाद मुख़्तार नामे का कार्यक्रम और पैग़म्बर मोहम्मद की बेटी हज़रत फात्मा की शहादत के मौके पर कई रोज तक मजलिसों का आयोजन इनके द्वारा कराया जाता था। अब तक कई प्रोग्रामों में इनके द्वारा सैकड़ों लोगों को इराक में हज़रत इमाम हुसैन के रौज़े की जेयारत के लिए लोगों को भेजा गया। यही वजह थी कि आज जब उनका जनाजा घर से उठा और कब्रिस्तान पहुंचा तो वहां तिल रखने की जगह नहीं थी। यूपी के फैजाबाद और जौनपुर के अलावा कर्नाटक में उन्हें फखरे कौम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
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इस मौके पर शिया उलेमा मौलाना मोहम्मद असकरी खान से जब बात की गई तो उन्होंने कहा के जोखन चचा की मौत से कौम और इलाके का बड़ा नुकसान हुआ है। वो कौम के लिए बड़ा काम करते थे जिनकी कमी को दूर कर पाना सम्भव नहीं है।