Siddharthnagar News: सिद्धार्थनगर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुरु गोरक्षनाथ ज्ञान स्थली विद्यालय का किया उद्घाटन
Siddharthnagar News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "दुनिया के अंदर करुणा और मैत्री का संदेश देने वाली पावन धरा राजकुमार सिद्धार्थ जिनके नाम पर ही सिद्धार्थनगर जनपद पड़ा है।;
सिद्धार्थनगर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुरु गोरक्षनाथ ज्ञान स्थली विद्यालय का किया उद्घाटन (Photo- Social Media)
Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि "भारत की इस पावन धरा को मैं कोटि कोटि नमन कर हूं।" उन्होंने कहा कि "दुनिया के अंदर करुणा और मैत्री का संदेश देने वाली पावन धरा राजकुमार सिद्धार्थ जिनके नाम पर ही सिद्धार्थनगर जनपद पड़ा है। इस पावन धरा को मैं कोटि कोटि नमन करते हुए आप सबका हृदय से विनंदन करता हूं।" बहनों और भाइयों भारत की परम्परा ने सदैव से ज्ञान की आराधना की है। इसीलिए भारतीय मनीषा ने इस बात विश्वास किया। यानी ज्ञान के चारों और खिला छोड़ो जहां से भी जान की धारा आप तक पहुंच सकती है उसका स्वागत होना चाहिए। क्योंकि जीवन में हमारे लिए प्रगति के अनेक मार्ग प्रशस्त कर सकता है।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'आज हम भारत भारी में आकर के ज्ञान स्थली में आने का अवसर प्राप्त हुआ है। उस समय जब हम लोग 2008 में यहां आए थे, तब चुनौतियां ढेर सारी थी। असुरक्षा का वातारण था। न बेटी सुरक्षित थी। तत्कालीन सरकार के एजेंडे में शिक्षा कही भी नहीं आती थी। और बार बार हमारे पूर्वज इसको मानते रहे की शिक्षा के लिए जितना किया जाए कम है। हम कह रहे है शिक्षा पर किया जाने वाला निवेश कहीं व्यर्थ नहीं जा सकता। वो सदैव आपके जीवन कुछ अच्छा करके दिखाएगा।
दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है भारत
पिछले दस वर्ष ने अपने बदलते हुए भारत को देखा है। एक नया भारत का दर्शन हो रहा है। कभी भारत के सामने पहचान का संकट था। आज नया भारत है। एक भरता श्रेष्ठ भरता है। ये भारत दुनिया का पिछलग्गू नहीं बल्कि दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। आने वाले समय में मात्र दो वर्ष में भारत दुनिया का तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा इसमें कोई शक नहीं है। आज पीएम के नेतृत्व में जीवन के हर एक छेत्र ने व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है।
याद करिए राज कुमार सिद्धार्थ का बचपन इसी सिद्धार्थनगर और लुंबनी में व्यतीत हुआ था यही वो छेत्र है। ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध कहलाए। याद करना जब गोरखपुर में पहला 1952 पहला सरस्वती मंदिर प्रारंभ हुआ था उस समय सिर्फ पांच छात्र थे। आज लाखों छात्र छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं।