Sonbhadra News: अनदेखी से बिजली कर्मियों में बढ़ा असंतोष, प्रबंधन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
Sonbhadra News: प्रबंधन की अनदेखी से सोनभद्र के बिजली कर्मचारियों में भारी असंतोष। कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी, बिजली आपूर्ति पर संकट!
Sonbhadra News(Photo-Social Media)
Sonbhadra News: प्रदेश के बिजली कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और पूर्व में हुए समझौतों के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने गहरी नाराजगी जताई है। समिति का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हुए लिखित समझौतों का आज तक पूर्ण पालन नहीं किया गया, जिससे पूरे प्रदेश के बिजली कर्मियों में असंतोष का माहौल है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सोमवार को कहा कि आंदोलन के दौरान और उसके बाद कर्मचारियों के खिलाफ की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां अब तक वापस नहीं ली गई हैं। इससे कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। समिति ने इसे पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
समिति के अनुसार, बिजली कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और संघर्ष समिति के बीच एक महत्वपूर्ण लिखित समझौता हुआ था। यह समझौता मुख्यमंत्री के तत्कालीन मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संपन्न हुआ था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इसके जरिए वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन अधिकांश बिंदुओं पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।
संघर्ष समिति का कहना है कि समझौते के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी के कारण कर्मचारियों को मार्च 2023 में सांकेतिक आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों का आरोप है कि समस्याओं के समाधान की जगह आंदोलन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न प्रकार की कार्रवाई की गई, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया। समिति ने याद दिलाया कि 19 मार्च 2023 को एक बार फिर ऊर्जा मंत्री के साथ समझौता हुआ था। उस समय ऊर्जा मंत्री ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण दर्ज कराई गई एफआईआर समाप्त की जाएं, सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं और सेवा से हटाए गए संविदा कर्मचारियों को पुनः बहाल किया जाए। संघर्ष समिति का आरोप है कि इन निर्देशों का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
पदाधिकारियों ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 को हुए समझौतों के अधिकांश बिंदु आज भी अधूरे हैं। इससे प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों में निराशा गहराती जा रही है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो औद्योगिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
हालांकि संघर्ष समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश के बिजली कर्मी मुख्यमंत्री के नेतृत्व और निर्देशों पर पूरा विश्वास रखते हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में तमाम कठिनाइयों और असंतोष के बावजूद कर्मचारी प्रदेश की जनता को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित तथा उसके बाद की गई सभी कार्रवाईयों को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही दोनों समझौतों के सभी बिंदुओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
संघर्ष समिति का कहना है कि किसी भी संस्थान में स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की नींव आपसी विश्वास और समझौतों के सम्मान पर टिकी होती है। यदि कर्मचारियों की जायज समस्याओं का समाधान समय पर किया जाए तो इससे न केवल कार्य वातावरण बेहतर होगा बल्कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था भी और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बन सकेगी।