Sonbhadra News: रेणुका नदी खनन घोटाला? 32 हजार के बजाय 56 हजार घनमीटर बालू निकाले जाने का दावा

Sonbhadra News: सोनभद्र की रेणुका नदी में बालू खनन पर बड़ा सवाल, तय मात्रा से अधिक खनन और परमिट जारी होने की प्रक्रिया पर जांच की मांग।

Update:2026-06-08 11:01 IST

Sonbhadra Sand Mining Scam

Sonbhadra News: अस्तित्व के संकट से जूझ रही रेणुका नदी में बालू खनन को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने खनन विभाग की कार्यप्रणाली, पर्यावरणीय निगरानी और परमिट जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि जिस खेवंधा बालू खनन पट्टे पर संचालित कंपनी ने स्वयं वैज्ञानिक पुनःपूर्ति अध्ययन (रिप्लेनिशमेंट स्टडी) के आधार पर मात्र 32,886 घनमीटर बालू उपलब्ध होने की जानकारी देते हुए उतनी ही मात्रा में खनन अनुमति मांगी थी, उसी साइट से बाद में 56 हजार घनमीटर से अधिक खनन किए जाने और 64 हजार घनमीटर तक के परमिट जारी होने के तथ्य सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि कंपनी की रिपोर्ट में अधिकांश क्षेत्र जलमग्न होने और केवल 1.218 हेक्टेयर क्षेत्र को ही खनन योग्य बताया गया था।


कंपनी ने खुद माना था मौके पर है बालू की सीमित उपलब्धता

कंपनी द्वारा जिलाधिकारी तथा खान अधिकारी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि मानसून पूर्व 2025 और मानसून पश्चात 2025 में QCI-NABET मान्यता प्राप्त एजेंसी एवं ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से रेप्लेनिशमेंट स्टडी कराई गई। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार 6 हेक्टेयर पट्टा क्षेत्र में से प्री-मानसून अवधि में केवल 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र ही खनन योग्य था। वहीं पोस्ट-मानसून रिपोर्ट में स्थिति और सीमित हो गई तथा केवल 1.218 हेक्टेयर क्षेत्रफल ही सूखी नदी तलहटी (Dry River Bed) के रूप में उपलब्ध पाया गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि अधिकांश क्षेत्र जलमग्न है और सतत रेत खनन दिशानिर्देश-2016 (SSMG-2016) तथा Enforcement & Monitoring Guidelines for Sand Mining-2020 के अनुसार जलमग्न क्षेत्र में खनन नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कंपनी ने स्वयं स्वीकार किया था कि खनन योग्य क्षेत्र में कुल 32,886 घनमीटर बालू उपलब्ध है और उसी मात्रा पर खनन अनुमति प्रदान की जानी चाहिए।


जब कंपनी ने खुद कहा था कि मौके पर कम है बालू तो फिर 56 हजार घनमीटर खनन कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कंपनी ने स्वयं उपलब्ध खनिज मात्रा 32,886 घनमीटर बताई थी तो नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच लगभग 56,000 घनमीटर बालू का खनन कैसे हो गया? यदि उपलब्धता संबंधी रिपोर्ट सही थी तो खनन स्वीकृत मात्रा से कहीं अधिक हो गया। और यदि खनन का आंकड़ा सही है तो फिर कंपनी द्वारा प्रस्तुत स्टडी रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

मौके पर उपलब्ध बालू से दोगुनी परमिट जारी होने पर भी खड़े हो रहे हैं सवाल

खनन क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मई 2026 तक लगभग 64,000 घनमीटर बालू के लिए रॉयल्टी जमा कराकर परमिट भी जारी कर दिए गए। यह मात्रा उस उपलब्धता से लगभग दोगुनी है जिसे स्वयं पट्टाधारक ने अपने आवेदन में स्वीकार किया था।


किया जा रहा दावा - 90 हजार घनमीटर की पर्यावरण स्वीकृति बनी ढाल?

मामले में आरोप है कि पूरे खेल को 90,000 घनमीटर वार्षिक पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance) की आड़ में अंजाम दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण स्वीकृति किसी पट्टे की अधिकतम सीमा निर्धारित करती है, लेकिन प्रत्येक वर्ष वास्तविक खनन की अनुमति उस समय उपलब्ध खनिज भंडार, पुनःपूर्ति अध्ययन रिपोर्ट और स्थल की भौतिक स्थिति के आधार पर तय की जाती है। यदि किसी वर्ष मानसून के बाद साइट पर मात्र 32,886 घनमीटर खनन योग्य बालू उपलब्ध पाई गई थी, तो उससे कहीं अधिक मात्रा के परमिट जारी किए जाने का आधार क्या था, यह जांच का विषय बन गया है।

तो रेणुका नदी के जलमग्न क्षेत्र से उठाई गई बालू

खेवंधा खनन पट्टा पहले से ही विवादों में रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगते रहे हैं कि खनन के दौरान नदी की प्राकृतिक धारा को प्रभावित किया गया तथा कई स्थानों पर नदी के प्रवाह क्षेत्र में मशीनों के उपयोग और धारा परिवर्तन जैसी गतिविधियां हुईं। स्वयं कंपनी ने जो प्रार्थना पत्र डीएम और ज्येष्ठ खान अधिकारी को दिया है उसमें यह कहा है कि साइट का अधिकांश हिस्सा जलमग्न है। अगर मौके पर उपलब्ध बताई गई बालू से ज्यादा परमिट जारी किया जा रहा है तथा बालू का खनन भी हो रहा है तो यह माना जा सकता है कि मौके पर बालू का खनन जलमग्न क्षेत्र से किया जा रहा है।

नियम क्या कहते हैं?

सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश-2016 (SSMG-2016) और Enforcement & Monitoring Guidelines for Sand Mining-2020 के अनुसार-

खनन केवल सूखी नदी तलहटी (Dry River Bed) में किया जा सकता है।

प्रत्येक वर्ष प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून रेप्लेनिशमेंट स्टडी आवश्यक है।

खनन योग्य मात्रा का निर्धारण उपलब्ध खनिज भंडार के आधार पर किया जाता है।

ड्रोन सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर ही वास्तविक खनन योजना तय की जानी चाहिए। नदी की प्राकृतिक धारा और पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।

खान विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठाए जा रहे हैं सवाल

मामले में सबसे गंभीर सवाल खान विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे हैं। यदि उपलब्ध खनन योग्य मात्रा 32,886 घनमीटर थी तो 56 हजार घनमीटर खनन और 64 हजार घनमीटर तक परमिट जारी होने की स्थिति कैसे बनी? क्या विभाग ने पुनःपूर्ति अध्ययन रिपोर्ट का परीक्षण किया था? यदि किया था तो रिपोर्ट से अधिक मात्रा के परमिट किस आधार पर जारी हुए? यदि नहीं किया तो निगरानी तंत्र की जवाबदेही तय होगी।

मिली शिकायत तो जांच कर की जाएगी कार्रवाई: खान अधिकारी

ज्येष्ठ खान अधिकारी कमल कश्यप ने फोन पर हुई वार्ता में बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है । हालांकि उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि अगर लगाए जा रहे आरोप सही हैं तो गलत हुआ है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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