आगरा से अवध तक फैला नकली दवाओं का अरबों का साम्राज्य: नामचीन ब्रांड्स के सिरप और एंटीबायोटिक की खुलेआम नकल
Fake Medicines: उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। FSDA और STF की कार्रवाई में 10 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध व नकली दवाएं जब्त हुईं।
Fake Medicine
UP Fake Medicines: उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं का काला कारोबार बेहद संगठित रूप ले चुका है, जिसकी जड़ें पश्चिमी यूपी से लेकर अवध और पूर्वांचल तक फैली हुई हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि नामचीन फार्मास्युटिकल कंपनियों की हूबहू पैकिंग में एंटीबायोटिक, लाइफ-सेविंग इंजेक्शन और सिरप खुले बाजार में धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की नकली व संदिग्ध दवाएं जब्त की हैं।
जांच में सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क की सप्लाई चेन का मुख्य केंद्र पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश हैं। वहां अवैध फैक्ट्रियों में नकली दवाएं तैयार कराई जाती हैं और फिर देश के सबसे बड़े दवा बाजार-उत्तर प्रदेश में खपा दी जाती हैं। अवध क्षेत्र के लखनऊ, गोंडा, रायबरेली और बाराबंकी से लेकर पूर्वांचल के वाराणसी और पश्चिमी यूपी के मेरठ, गाजियाबाद तथा सहारनपुर तक इस सिंडिकेट का जाल फैला हुआ है। कई मामलों में दवाओं पर गलत स्पेलिंग और फार्मा कंपनियों द्वारा की गई शिकायतों के बाद छापेमारी कर इस गोरखधंधे को पकड़ा गया।
ब्रांडेड कंपनियों की आड़ में जानलेवा खेल
एफएसडीए और एसटीएफ द्वारा हाल ही में पकड़ी गई खेप में डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, एल्केम, इंटास, एल्डर और मैक्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांड्स शामिल हैं। इनमें ऑगमेंटिन, अल्कासोल, डेक्सोरेंज, जोरिल-एम, टेल्मा, पेंटॉप, क्लेवैक्टम-625 और रेजो-डी जैसी रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की हूबहू नकल तैयार कर बेची जा रही थी।
हाल ही में उत्तराखंड में पकड़ी गई एक अवैध फैक्ट्री से भारी मात्रा में दवा बनाने वाली मशीनें, रैपर और 2 करोड़ रुपये से अधिक का नकली माल बरामद किया गया। वहीं, सबसे बड़ा रैकेट आगरा में पकड़ा गया, जहां अकेले 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाओं का जखीरा सीज किया गया।
विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि यह जालसाजी सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। गंभीर संक्रमण या बीमारियों में जब मरीज नकली दवाएं खाते हैं, तो उनका कोई चिकित्सीय असर नहीं होता, जिससे स्थिति बिगड़ने से कई बार मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है। एफएसडीए अधिकारियों के अनुसार, पूरे सिंडिकेट के वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क को खंगाला जा रहा है और संलिप्त मेडिकल स्टोर संचालकों व थोक डीलरों के लाइसेंस रद्द कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।