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कोरोना वायरस की नई किस्म से सावधान, है बहुत खतरनाक

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस पर काबू पाया जा सकता है। संगठन के स्वास्थ्य आपात काल प्रमुख माइक रायन ने जिनेवा में कहा कि स्थिति काबू से बाहर नहीं है

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NewstrackBy Newstrack

Published on 22 Dec 2020 8:23 AM GMT

कोरोना वायरस की नई किस्म से सावधान, है बहुत खतरनाक
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भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार पहले से धीमी हो गई है। पिछले 24 घंटे में 19,079 नए केस सामने आए हैं। कोरोना के कुल मामले बढ़कर 1 करोड़ तीन लाख हो गए हैं।
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नई दिल्ली: ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका और इटली में कोरोना वायरस की नई किस्म का पता चलने के बाद दुनिया भर में दहशत पैदा हो गयी है। ब्रिटेन की सरकार ने इस वायरस को बेकाबू घोषित कर दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस की नई किस्म में कम से कम 17 महत्वपूर्ण बदलाव हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘स्पाइक प्रोटीन’ में आया है। ये वो प्रोटीन होता है जिसका इस्तेमाल वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में घुसने के लिए करता है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वायरस की ये नई किस्म पहले वाली किस्म के मुकाबले 70 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक है। कोरोना का पहले वाला स्ट्रेन 50 फीसदी संक्रामक है। सर्दियों के मौसम में बहुत सतर्क रहने की जरूरत है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा बेकाबू नहीं है नई किस्म

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस पर काबू पाया जा सकता है। संगठन के स्वास्थ्य आपात काल प्रमुख माइक रायन ने जिनेवा में कहा कि स्थिति काबू से बाहर नहीं है लेकिन इसे अपने पर छोड़ा भी नहीं जा सकता है। उन्होंने सभी देशों को उन सभी कदमों को उठाने को कहा जिनकी सफलता साबित हो चुकी है। संगठन के अनुसार, नए स्ट्रेन से जिन्हें संक्रमण हो जाता है वो औसतन 1.5 और लोगों को संक्रमित करते हैं जबकि ब्रिटेन में पहले से मौजूद स्ट्रेनों की रिप्रोडक्शन दर 1.1 है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य कोविड-19 वैज्ञानिक मारिया वान करखोव ने का कहना है कि अभी तक इस बात का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि नए स्ट्रेन से और ज्यादा गंभीर या और ज्यादा घातक बीमारियां होती हैं।

क्या होगा वैक्सीन का

लोगों के मन में आशंकाएं हैं कि कहीं नए स्ट्रेन के खिलाफ कोरोना की वैक्सीन बेअसर न साबित हो जाए। लेकिन वायरसविज्ञानियों के बीच इस बात पर लगभग सहमति भी है कि इस के आगे मौजूदा वैक्सीनें बेअसर नहीं होंगी। फाइजर के साथ मिल कर वैक्सीन बनाने वाली जर्मनी की कंपनी बायोएनटेक के प्रमुख उगुर साहीन ने कहा है कि उनकी वैक्सीन की वायरस की 20 अलग अलग किस्मों के खिलाफ जांच हुई है और उन जांचों में सफल इम्यून प्रतिक्रिया देखी गई है जिसने वायरस को निष्क्रिय कर दिया।

साहीन ने यह भी बताया कि नया स्ट्रेन एक और मजबूत म्युटेशन का नतीजा है और अगले दो हफ्तों तक वैक्सीन की इसके खिलाफ भी जांच की जाएगी। अमूमन वैक्सीनें शरीर के इम्यून सिस्टम को वायरस के कई पहलुओं से लड़ने के लिए तैयार करती हैं। ऐसे में अगर वायरस के कुछ हिस्सों में म्युटेशन भी हो जाती है तो भी संभव है कि वैक्सीन उसका मुकाबला कर लेगी। लेकिन अगर वायरस पूरी तरह से म्यूटेट हो गया तो संभव है कि वैक्सीन उसके आगे बेअसर हो जाए।

corona corona (PC: social media)

बहुत सतर्क रहने की जरूरत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वायरस का नया स्ट्रेन अपने जीनोम में 17 तरह के बदलाव दिखा रहा है और ये एक व्यापक बदलाव है। अभी नया स्ट्रेन ब्रिटेन से बाहर नहीं पाया गया है लेकिन इसका फैलाव होगा ही। भारत में भी ये स्ट्रेन जरूर आयेगा है। बहुत मुमकिन है कि नया स्ट्रेन भारत में आ भी चुका हो।

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दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि इंग्लैंड में कोरोना वायरस में म्यूटेशन के बाद जो नया वैरिएंट पाया गया वह अभी देश में नहीं है, लेकिन वह देश में आ सकता है। इसलिए पहले की तुलना में अधिक सर्तक रहने और सख्ती से कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करना होगा। सतर्कता में लापरवाही से नए स्ट्रेन का संक्रमण यहां भी फैल सकता है। यदि नया स्ट्रेन यहां आता है तो मामले अचानक बढ़ सकते हैं। इसलिए लोगों को मास्क लगाने, दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का पालन सख्ती से करना होगा। जब तक टीका नहीं आ जाता तब तक कोई विकल्प नहीं है।

खुद को और दूसरों को बचाएँ

कोरोना से बचाव के लिए सामाजिक दूरी रखना जरूरी है। कम से कम दो गज यानी 6 फुट की दूरी बनाए रखें।

हाथों को बार-बार धोना और सफाई का पूरा ध्यान रखना जरूरी है।

चेहरे और आंखों को छूना नहीं है।

छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंकें। उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंकें।

अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएं जिसके लिए पौष्टिक आहार व योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

रिपोर्ट- नीलमणि लाल

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