बड़ी खबरः सिर्फ ध्वनियों से भाग जाएगा कोरोना का वायरस

दावे तो आयुर्वेदिक उपचार से कोरोना वायरस ठीक करने के हुए हैं लेकिन मान्यता किसी को नहीं मिली है। अब ये नए तरीके की वैकल्पिक पद्धति सामने आयी है। जिसमें ध्वनियों की तरंगों को आधार बनाकर  ईएफवी (इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन) मॉडल पेश किया गया है।

कोरोना वायरस का खौफ लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। पूरी दुनिया इसके इलाज को लेकर परेशान हैं। तमाम देशों के वैज्ञानिक रिसर्च में जुटे हैं, लेकिन अभी तक इस बीमारी का कोई कारगर इलाज सामने नहीं आया है। इसी उठापटक के बीच साउंड थेरेपिस्ट इक्वांक आनखा का ध्वनियों के जरिये कोरोना को मारने के दावे ने सबको हिला दिया है, एक हलचल मच गई है। आप भी जानेंगे तो चौंक जाएंगे।

दुनिया भर में कोरोना वायरस की बनावट और इसमें शामिल तत्वों को लेकर शोध जारी है। जिसमें टीबी के टीके से लेकर टीबी, एड्स, मलेरिया मरीजों को दी जाने वाली दवाओं पर शोध जारी है। कुछ लोगों ने इन सबसे के इस्तेमाल से कुछ लोगों को ठीक करने का दावा भी किया है लेकिन अभी तक किसी शोध को अंतिम रूप से मंजूरी नहीं मिली है।

दावे तो आयुर्वेदिक उपचार से कोरोना वायरस ठीक करने के हुए हैं लेकिन मान्यता किसी को नहीं मिली है। अब ये नए तरीके की वैकल्पिक पद्धति सामने आयी है। जिसमें ध्वनियों की तरंगों को आधार बनाकर  ईएफवी (इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन) मॉडल पेश किया गया है।

क्या है दावा

साउंड थेरेपिस्ट इक्वांक आनखा का दावा है कि कुछ दिनों तक 61 मिनट का समय खर्च करके कोई भी संक्रमित आदमी कोरोना वायरस से मुक्ति पा सकता है। सुनने में ये बात थोड़ा अटपटी लगती है कि बिना किसी दवा के, सिर्फ कुछ मिनट तक कुछ ध्वनियों की तरंगें सुनकर कोई कोरोना वायरस से मुक्ति पा लेगा। लेकिन दावा तो यही है।

क्या है थिरेपी का मॉडल

इक्वांक आनखा अपना मॉडल प्रसिद्ध वैज्ञानिक निकोला टेस्ला के सिद्धांत को आधार बनाकर बनाया है। टेस्ला ने कहा था कि यदि आप यूनिवर्स के रहस्य जानने हैं तो ऊर्जा, तरंग व आवृत्ति पर खुद को केंद्रित करें। इसी आधार पर इक्वांक का कहना है कि हर पदार्थ की अपनी आवृत्ति होती है, जिस पर उसकी तरंगें अनुनाद करती हैं।

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उन्होंने अपनी रिसर्च में कहा है कि कोरोना के जीनोम, पॉलिमर्स व प्रोटीन एक खास आवृत्ति पर अनुनाद करते हैं। मानव शरीर की भी अपनी आवृत्ति होती है व अनुनाद भी। उनकी इस रिसर्च का आधार यह है कि अभी तक जिन दवाओं पर रिसर्च हो रहा है वह सभी कोरोना की आवृत्ति पर ही आधारित हैं।

… वायरस मर जाएगा

इक्वांक के ईएफवी मॉडल का मानना है कि कोरोना के तीन मूल हिस्सों जीनोम (जैविक पदार्थ, पॉलिमर्स व प्रोटीन) के जोड़ को बाहर से प्रतिकूल आवृत्ति का कंपन देकर तोड़ा जा सकता है. यदि वायरस का जोड़ ही टूट जाएगा तो वायरस अपने आप निष्प्रभावी होकर मर जाएगा।

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इस थिरेपी में हर दिन महज 61 मिनट का समय संक्रमित मरीज का लगता है। मरीज के दिमाग में सात-सात मिनट तक हेडफोन के जरिये तरंगें भेजी जाती है. इस दौरान 20-20 मिनट का ब्रेक दिया जाता है। दावा यह भी है कि इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।