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सावधान! फैलता जा रहा है भारत में डिमेंशिया का जाल

भारत में साठ वर्ष से ऊपर के करीब चालीस लाख लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2035 तक ये आंकड़ा दोगुना हो जाएगा। भारत समेत दुनिया भर में पुरुषों के मुकाबले औरतों में ये बीमारी ज्यादा पाई जाती है।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 30 Jan 2021 8:04 AM GMT

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नील मणि लाल

लखनऊ। डिमेंशिया बढ़ती उम्र से जुड़ा हुआ रोग है लेकिन इसके लक्षणों को बुढ़ापे का असर मान लेना ही एक ऐसी गलतफहमी है जो रोगी के जीवन को धीरे-धीरे निगलती जाती है। भारत में साठ वर्ष से ऊपर के करीब चालीस लाख लोग डिमेंशिया से जूझ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2035 तक ये आंकड़ा दोगुना हो जाएगा। भारत समेत दुनिया भर में पुरुषों के मुकाबले औरतों में ये बीमारी ज्यादा पाई जाती है।

डिमेंशिया अचानक पैदा होने वाली बीमारी नहीं

डिमेंशिया अचानक पैदा होने वाली बीमारी नहीं है। ये एक धीमी प्रक्रिया है और वृद्धावस्था में लक्षण दिखने की वजह से इसे उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया मान लिया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति आम भारतीय परिवार का नजरिया भी इसके बढ़ते जाल की वजह बन रहा है।

Dementia in india-4

क्या है ये बीमारी

न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, डिमेंशिया किसी एक बीमारी का नाम नहीं है बल्कि ये कई बीमारियों या कई लक्षणों के समूह को दिया गया एक नाम है।अल्जाइमर इस तरह की सबसे प्रमुख बीमारी है जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। डिमेंशिया के लक्षणों का मूल संबंध याददाश्त, रोजमर्रा के सामान्य काम करने की क्षमता, भाषा-ज्ञान, सोचना-समझना, हिसाब-किताब और सामान्य बर्ताव से है।

आम-तौर पर डिमेंशिया को सिर्फ याददाश्त से जोड़ कर देखा जाता है लेकिन ये इस बीमारी का सिर्फ एक स्वरूप है। रोजमर्रा की जिंदगी में जो चीजें हमें बहुत सामान्य लगती हैं वो सब अगर किसी को डिमेंशिया हो तो वो ये बेहद छोटा लगने वाले काम नहीं कर सकेगा।

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बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता खतरा

डिमेंशिया का खतरा बढ़ती उम्र के साथ ही बढ़ता है। युवावस्था में तनाव और दबाव में बातें भूल जाते हैं तो ये आम बात हो सकती है लेकिन साठ बरस के पार अगर किसी व्यक्ति में, रोज के काम-काज या रास्ता भूलने, रुचियों और लोगों से मिलने-जुलने के सामान्य व्यवहारों में बदलाव दिखने लगे तो उसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।

डिमेंशिया को एक डीजेनेरेटिव यानी लगातार बिगड़ने वाली बीमारी कहा जाता है जिसको रोक सकने वाले इलाज मौजूद नहीं हैं। वैसे, डिमेंशिया जैसे लक्षण किसी और वजह से भी हो सकते हैं, जैसे किसी दवाई का बुरा प्रभाव या फिर शरीर में किसी विटामिन की कमी। या फिर कोई अन्य बीमारी।

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दो तरह का डिमेंशिया

वैस्क्युलर डिमेंशिया की वजह ब्रेन सेल में रक्त संचार में आई रुकावटों से नुकसान होता है। ये भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों में बड़ा कारण है क्योंकि ब्लड प्रेशर को प्रभावित करने वाली दूसरी बीमारियां यहां काफी सामान्य हो गई हैं।

मिक्सड डिमेंशिया में ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट से हुए नुकसान के साथ ही दिमाग में प्रोटीन का जमाव होता है जो दिमाग की प्रक्रियाओं में गड़बड़ी पैदा करता है। इसका गहरा संबंध बीमारी से पहले के जीवन से जुड़ा हुआ है। यानी लोग अपने जीवन में कितना स्वस्थ और सक्रिय हैं व दिमाग को चुस्त रखने के लिए कुछ करते हैं या नहीं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि स्वस्थ मस्तिष्क के लिये मोटापा, पूरी नींद ना लेना और दिमाग को आराम देने की जरूरत, इन सबकी भी बेहद अहम भूमिका है। रेगुलर कसरत और दिमागी शांति बेहद जरूरी है।

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