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महिला ने जिस ऑफिस में 10 साल तक लगाया झाड़ू-पोछा, बनीं वहीं की अध्यक्ष

ए. आनंदवल्ली केरल (Kerala) कोल्लम जिले के पठानपुरम में ब्लॉक पंचायत के ऑफिस में पिछले 10 सालों से एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के तौर काम कर रही थीं। यहां उनका काम सफाई करना और बैठकों के दौरान चाय-पानी देना होता था, लेकिन अब वह इन बैठकों की अध्यक्षता करेंगी।

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AshikiBy Ashiki

Published on 1 Jan 2021 5:50 AM GMT

महिला ने जिस ऑफिस में 10 साल तक लगाया झाड़ू-पोछा, बनीं वहीं की अध्यक्ष
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महिला ने जिस ऑफिस में 10 साल तक लगाया झाड़ू-पोछा, बनीं वहीं की अध्यक्ष
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केरल: हर किसी ने ये कहावत सुनी होगी कि 'मेहनत का फल इंसान को एक दिन जरूर मिलता है'। केरल की एक महिला ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। केरल के कोल्लम जिले में रहने वाली 46 साल की ए. आनंदवल्ली (A Anandavalli) ब्लॉक पंचायत अध्यक्ष बनी हैं, जो इससे पहले इसी जगह पर झाड़ू-पोछा का काम किया करती थीं।

10 साल से लगा रही थीं झाड़ू-पोछा

ए. आनंदवल्ली केरल (Kerala) कोल्लम जिले के पठानपुरम में ब्लॉक पंचायत के ऑफिस में पिछले 10 सालों से एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के तौर काम कर रही थीं। यहां उनका काम सफाई करना और बैठकों के दौरान चाय-पानी देना होता था। अब वह इन बैठकों की अध्यक्षता करेंगी। ए. आनंदवल्ली ने बुधवार को उसी दफ्तर में बतौर ब्लॉक पंचायत अध्यक्ष पदभार संभाला।

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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के टिकट पर चुनी गईं

आपको बता दें कि ए. आनंदवल्ली हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPIM के टिकट पर चुनी गईं और बुधवार को ब्लॉक अध्यक्ष के पद पर आसीन हुई हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में आनंदवल्ली ने 654 मतों को अंतर से जीत मिली। उन्हें SC/ST महिला के लिए आरक्षित इस पद के लिए चुना गया है।

A Anandavalli Photo- Social Media

आंसुओं को नहीं रोक पाईं आनंदवल्ली

ये उपलब्धि मिलने के बाद आनंदवल्ली ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी पार्टी ही ऐसा कर सकती है। उन्होंने कहा- मैं वास्तव में इसकी ऋणी हूं। उन्होंने कहा कि जब वह ब्लॉक अध्यक्ष की सीट पर पहुंची तो अपने आंसुओं को नहीं रोक पा रही थीं।

सिर्फ 6 हजार रुपये मिलती थी सैलरी

दरअसल, आनंदवल्ली मार्क्सवादी समर्थक परिवार से हैं और उनके पति पेशे से चित्रकार व माकपा के सक्रिय कार्यकर्ता भी हैं। आनंदवल्ली ने साल 2011 में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के तौर पर पंचायत ऑफिस ज्वाइन किया था। उस दौरान उनका वेतन 2000 रुपये प्रति माह था। हालांकि अब उन्हें 6000 रुपये सैलरी मिल रही थी।

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