तबाही का तूफान: सेना पर आई आफत से कई जवान शहीद, अभी भी नहीं टला खतरा

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से बर्फबारी की वजह से कई लोगों ने जान जा चुकी हैं। वहीं 3 दिसंबर को भी उत्तरी कश्मीर में हिमस्खलन में सेना के चार जवान शहीद हो गए थे। बांदीपोरा जिले में भी सोमवार को हिमस्खलन के कारण कुछ मकानों को नुकसान हुआ था।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा और गंदरबाल जिले में आए बर्फीले तूफान से सेना के कई जवान शहीद हो गए। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बर्फीले तूफान की चपेट में एक सैन्य चौकी आ गई। इस हादसे में अब तक कुल 8 लोगों की मौत हो चुकी है।

अब तक जा चुकी बहुतों की जान

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से बर्फबारी की वजह से कई लोगों ने जान जा चुकी हैं। वहीं 3 दिसंबर को भी उत्तरी कश्मीर में हिमस्खलन में सेना के चार जवान शहीद हो गए थे। बांदीपोरा जिले में भी सोमवार को हिमस्खलन के कारण कुछ मकानों को नुकसान हुआ था। ऐवलॉन्च की घटना में फंसे 5 लोगों को सेना और प्रशासन की टीमों ने रेस्क्यू किया था।

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हालांकि अभी भी 2 सेना के जवानों के फंसे होने की आशंका है। यह बर्फीला तूफान माछिल और गांदरबल के आसपास देखने को आया, इसमें सेना के 5 जवानों की अब तक मौत हो चुकी है दो जगह आए इस बर्फीले तूफान से सेना के कई जवान चपेट में आ गए। लापता 2 जवानों को खोजने के लिए टीम लगाई गई है बर्फीले तूफान से 4 लोगों को बचा लिया गया है मौके पर सेना के अधिकारी भी जायजा लेने पहुंच सकते हैं।

जारी की गई हिमस्‍खलन की चेतावनी

बता दें कि हाल ही में श्रीनगर- जम्‍मू हाइवे, मुगल रोड, श्रीनगर- लेह हाइवे और बार्डर पर अन्‍य गांवों को जोड़ने वाली सड़कें स्‍नोफॉल के चलते बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा बंदीपोरा, बरामूला, अनंतनाग, कुलगाम, बडगाम, कुपवाड़ा, गांदरबल, लेह और कारगिल के लिए हिमस्‍खलन की चेतावनी भी जारी की गई है।

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इसके अलावा 434 किलोमीटर श्रीनगर-लेह हाइवे को भी स्‍नोफॉल के बाद से बंद कर दिया गया है। वहीं बंदीपोरा- गुरेज, तंगधार-कुपवाड़ा, माछिल-कुपवाड़ा और केरन को भी भारी बर्फबारी के चलते बंद कर दिया गया है। यहां दिन का तापमान भी घटता जा रहा है। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस, काजीगुंड में 5.8 रिकॉर्ड किया गया। वहीं पहलगाम में यह 5.3, कुपवाड़ा में 4.5, गुलमर्ग में 2.6, लेह में 3.9 और कारगिल में यह आंकड़ा माइनस में 1.5 पर पहुंच गया। बता दें कि इससे पहले भी यहां बर्फ से दबकर सेना के कई जवानों की मौत हो चुकी है।