इस राज्य के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं, केंद्र सरकार से मांगी मदद

कोरोना की वजह से देश भर में लॉकडाउन लागू है। लॉकडाउन की मार आम आदमी से लेकर सरकार तक पर पड़ी है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि सरकारों के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं है।

Published by Aditya Mishra Published: May 31, 2020 | 3:23 pm
Modified: May 31, 2020 | 3:33 pm

नई दिल्ली: कोरोना की वजह से देश भर में लॉकडाउन लागू है। लॉकडाउन की मार आम आदमी से लेकर सरकार तक पर पड़ी है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि सरकारों के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं है।

ताजा मामला दिल्ली का है। केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से 5000 करोड़ रुपये की सहायता तत्काल देने की मांग की है, ताकि कर्मचारियों को समय से तनख्वाह दी जा सके।

दिल्ली के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक अपने कर्मचारियों को केवल वेतन देने और ऑफिस के खर्च वहन करने के लिए 3500 करोड़ रुपये हर महीने आवश्यकता पड़ती है।

 

 

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लॉकडाउन से रेवेन्यू पर पड़ा खासा असर

उन्होंने कहा कि दिल्ली के रेवेन्यू पर काफी असर पड़ा है। पिछले दो महीने में 500-500 करोड़ रुपये जीएसटी से आए हैं। अन्य स्रोतों से हुई आमदनी को भी जोड़ दें, तो कुल 1735 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हुआ है।

मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार को लेटर लिखकर यह सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे दिल्ली सरकार अपने डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को वेतन दे सके।

सिसोदिया ने कहा कि कहीं से भी रेवेन्यू आ नहीं रहा और केंद्र ने आपदा राहत कोष से जो पैकेज राज्यों को दिया, उसमें से भी दिल्ली सरकार को कुछ नहीं मिला।

उन्होंने ये भी कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण दिल्ली सरकार का टैक्स कलेक्शन करीब 85 फीसदी नीचे चल रहा है। ऐसे में हमारे सामने कर्मचारियों को वेतन देने का संकट पैदा हो गया है।

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