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गायब हुआ NRC का डाटा: मचा घमासान, गृह मंत्रालय पर लगा बड़ा आरोप

असम विधानसभा में नेता विपक्ष देबाब्रता साकिया ने रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर इस मामले को देखने की अपील की है।उन्होंने लिखा है कि यह एक रहस्य है कि अचानक ऑनलाइन डेटा कैसे गायब हो गया।

SK Gautam

SK GautamBy SK Gautam

Published on 12 Feb 2020 9:55 AM GMT

गायब हुआ NRC का डाटा: मचा घमासान, गृह मंत्रालय पर लगा बड़ा आरोप
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नई दिल्ली: इसको कहते हैं सरकारी लापरवाही जिसमें असम में एनआरसी का अगस्त में प्रकाशित किया गया फाइनल डेटा नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) की वेबसाइट से ही गायब हो गया है। बता दें कि यह डेटा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रकाशित किया गया था। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि डेटा सुरक्षित है और कुछ तकनीकी खामियों की वजह से क्लाउड से गायब हुआ है।

कांग्रेस ने लगाए गृहमंत्रालय पर गंभीर आरोप

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर गृहमंत्रालय को घेरते हुए कहा कि खामी तकनीक में नहीं बल्कि भाजपा की विचारधारा और दिमागी सोच में है। अब समय आ गया है कि भाजपा सरकार देश को और विशेषतः असम की जनता को स्पष्ट करे कि यह 'संयोग' था या उनका कोई 'प्रयोग'।

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आईटी कंपनी विप्रो का कॉन्ट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया गया

साथ ही मंत्रालय ने कहा कि समस्या का 'जल्द ही हल निकाल लिया जाएगा।' वहीं, एनआरसी अधिकारियों का कहना है कि डेटा इसलिए वेबसाइट से गायब हो गया क्योंकि आईटी कंपनी विप्रो का कॉन्ट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया गया। असम में विपक्षी पार्टी ने इसे 'बदनियत कार्य' करार दिया है। एनआरसी से जुड़े शीर्ष अधिकारियों को पता चला है कि डेटा इसलिए गायब हो गया, क्योंकि क्लाउड सर्वर सब्सक्रिप्शन खत्म हो गया था और पूर्व एनआरसी कॉर्डिनेटर प्रतीक हजेला के पिछले अक्टूबर में ट्रांसफर के बाद इसे रिन्यू नहीं करवाया गया था।

31 अगस्त, 2019 को अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद NRC में भारतीय नागरिकों के शामिल होने और बाहर होने वाले का पूरा विवरण इसकी आधिकारिक वेबसाइट ' www.nrcassam.nic.in ' पर अपलोड किया गया था।डेटा ऐसे समय 'गायब' हुआ है, जब असम में अंतिम एनआरसी सूची को अभी तक भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है.

मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करेगी असम सरकार, सर्वे की योजना

असम में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए लाई गई इस लिस्ट से 19 लाख लोग बाहर हैं, जिन्हें अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।केंद्र सरकार ने कहा था कि जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं है, उन्हें उनके पास मौजूद आखिरी कानूनी विकल्प के इस्तेमाल तक विदेशी घोषित नहीं किया जाएगा।

असम विधानसभा में नेता विपक्ष देबाब्रता साकिया ने रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर इस मामले को देखने की अपील की है।उन्होंने लिखा है कि यह एक रहस्य है कि अचानक ऑनलाइन डेटा कैसे गायब हो गया। खासकर तब, जब अपील प्रक्रिया एनआरसी प्राधिकरण द्वारा अपनाई गई धीमी गति के रवैये के कारण शुरू नहीं हो सकी है। 'पत्र में कांग्रेस नेता ने लिखा है, इसलिए, यह संदेह करने की पर्याप्त गुंजाइश है कि ऑनलाइन डेटा का गायब होना बदनियत कार्य है।

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3.11 करोड़ लोगों के साथ रजिस्टर से बाहर 19.06 लाख लोगों की जानकारी थी शामिल

दरअसल, असम के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर से जुड़ी नागरिकों का सभी विवरण आधिकारिक वेबसाइट से गायब हो गया। अक्‍टूबर में रजिस्टर में शामिल और रजिस्टर से बाहर सभी नागरिकों की पूरी जानकारी nrcassam.nic.in पर अपलोड की गई थी। बता दें कि इसी लिस्ट में रजिस्टर में शामिल 3.11 करोड़ लोगों के साथ-साथ रजिस्टर से बाहर 19.06 लाख लोगों की भी पूरी जानकारी थी। ऐसे में असम के लोगों के साथ-साथ देश के अन्‍य लोग भी हैरान थे। हालांकि, इसकी वजह गृह मंत्रालय ने बता दी है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद असम में एनआरसी की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अगस्त 2019 में प्रकाशित एनआरसी की अंतिम सूची से करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए थे। एनआरसी को लेकर मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने जानकारी दी थी कि अगर असम एनआरसी में माता-पिता का नाम है, तो छूटे बच्चों को डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा। उन्‍होंने बताया कि अटॉर्नी जनरल ने 6 जनवरी 2020 को शीर्ष कोर्ट के समक्ष कहा था कि ऐसे बच्चों को उनके अभिभावकों से अलग नहीं किया जाएगा और डिटेंशन सेंटर भी नहीं भेजा जाएगा।

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एनआरसी को लेकर सरकार के भीतर अभी तक कोई चर्चा नहीं

देश के कई राज्‍यों में एनआरसी को लेकर प्रदर्शनों का दौर जारी है, लेकिन सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि इसको लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने संसद में बाकायदा लिखित जवाब में यह बता दिया है। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी साफ कर चुके हैं कि एनआरसी को लेकर सरकार के भीतर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि 'अभी तक, सरकार ने 'भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरआइसी)' को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने का कोई निर्णय नहीं लिया है।'

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