बापू का खादी आंदोलन: गांधी जी ने सिखाया था वस्त्र बनाना, यहां से हुआ शुरू

क्या आप जानते है कि इस खादी आंदोलन की शुरूआत कैसे हुई। तो हम आपको बताते है खादी के इस वस्त्र से जुडे़ गांधी जी के इस खादी आंदोलन के बारे में जिसने आम इंसान को यह सिखा दिया कि बड़ी से बड़ी चुनौती को संगठित होकर दूर किया जा सकता है।

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बापू का खादी आंदोलन: गांधी जी ने सिखाया था वस्त्र बनाना, यहां से हुआ शुरू-(courtesy- social media)

लखनऊ। आपने खादी वस्त्रों के बारे में तो सुना ही होगा। हमारे देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और खादी एक-दूसरे का पर्याय माने जाते है। देश में खादी आंदोलन की शुरूआत महात्मा गांधी ने ही की थी। लेकिन क्या आप जानते है कि इस खादी आंदोलन की शुरूआत कैसे हुई। तो हम आपको बताते है खादी के इस वस्त्र से जुडे़ गांधी जी के इस खादी आंदोलन के बारे में जिसने आम इंसान को यह सिखा दिया कि बड़ी से बड़ी चुनौती को संगठित होकर दूर किया जा सकता है।

ऐसे शुरू हुआ गांधी जी का खादी आंदोलन

ये बात उस समय की है जब गांधी जी साबरमती के आश्रम में थे। यहां गांधी जी से मिलने वालों भीड़ लगी रहती थी। ऐसी ही एक शाम को जब गांधी जी लोगों से मुलाकात कर रहे थे, तभी चंपारण से आया एक किसान उनसे मिलने पहुंचा। उस किसान ने गांधी जी को चंपारण में आम जनता पर अंग्रेजों के इशारों पर वहां के धनी लोगों द्वारा किए जा रहे अत्याचार व शोषण के संबंध में बताया।

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उस किसान ने गांधी जी को बताया कि अंग्रेजों की मिलीभगत से चंपारण के धनी लोग वहां के आम किसानों का बुरी तरह से शोषण कर रहे है। किसान मेहनत करके उपज पैदा करता है लेकिन उसके हिस्से में कुछ नहीं आता है लगान और कर्ज के ब्याज के नाम पर सारी उपज वहां के धनी लोग ले लेते है। किसानों की हालत बहुत ही खराब है, उनके घरों में खाने को अन्न नहीं और पहनने के लिए तन पर वस्त्र नहीं है।

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सभी फटे-पुराने वस्त्र पहने हुए थे

किसान की व्यथा सुनकर गांधी जी का कोमल ह्दय भर आया और उन्होंने किसान को चंपारण आने का आश्वासन दे दिया। अपने आश्वासन के मुताबिक जब गांधी जी चंपारण पहुंचे तो उन्होंने देखा कि किसान ने जो बताया था वहा के हालात उससे भी ज्यादा बुरे थे। सभी फटे-पुराने वस्त्र पहने हुए थे और कई महिलाए तो ऐसी भी थी जो वस्त्र न होने के कारण घर से बाहर नहीं निकली।

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गांधी जी ने वहां के लोगों को खादी के वस्त्र बनाना सिखाया

इससे व्यथित होकर गांधी जी ने वहां के लोगों को खादी के वस्त्र बनाना सिखाया। उन्होंने बताया कि कैसे वह केवल चरखे की सहायता से खादी के वस्त्र बना सकते है। उन्होंने इसके द्वारा अंग्रेजों और उनके चाटुकार धनी लोगों को करारा जवाब देने के लिए प्रेरित किया। गांधी जी तो चंपारण से वापस आ गए लेकिन उनके आश्रम के स्वयंसेवक ने वही रह कर लोगों को चरखे से वस्त्र बनाना सिखाया और देखते ही देखते यह एक आंदोलन बन गया। पूरे देश में इसकी चर्चा होने लगी और पूरे देश में खादी देशभक्ति का ब्रांड बन गया, यहां तक की विदेशों में भी खादी की मांग होने लगी।

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