किसानों के लिए खुशखबरी: मोदी सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

अब केंद्र सरकार ने किसानों के लिए नई योजना लाने वाली है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 10 हजार कृषि उत्पादक संगठनों (Farmer Producers’ Organisations -FPO) को बढ़ावा देने की योजना पर मुहर लग गई है।

Published by Roshni Khan Published: February 20, 2020 | 2:46 pm
Modified: February 20, 2020 | 2:47 pm

नई दिल्ली: अब केंद्र सरकार ने किसानों के लिए नई योजना लाने वाली है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 10 हजार कृषि उत्पादक संगठनों (Farmer Producers’ Organisations -FPO) को बढ़ावा देने की योजना पर मुहर लग गई है। जिसके लिए 4496 करोड़ रुपये का फंड दिया जाएगा। FPO छोटे और सीमांत किसानों का एक समूह होता है। केंद्र सरकार 4496 करोड़ रुपये के इस फंड के जरिए बाजार में किसानों की भागीदारी बढ़ाकर उनकी आमदनी बढ़ाएगी।

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इससे क्या होगा-

आम बजट 2019-20 में सरकार ने 10,000 नए FPO बनाने की घोषणा की थी। इनको अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इनका मुख्य काम किसानों की आय बढ़ाना के लिए कदम उठाना है। साथ ही, ये किसानों को आसान कर्ज और बेहतर मार्केटिंग के साथ नई टेक्नोलॉजी देने में मदद करेंगे।

FPO योजना को जानिए

पांच साल की अवधि (2019-2022 से 2023-24) के लिए 4496।00 करोड़ रुपये के कुल बजटीय प्रावधान के साथ 10,000 नए FPO का गठन होगा। शुरुआत में इन्हें एजेंसी स्मॉल फार्मर्स एग्री-बिजनेस कन्सोर्टियम (SFAC), नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) और नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) मदद करेंगी। राज्य भी अगर इच्छुक हों तो DAC&FW के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से एजेंसी को कार्यान्वित करने के लिए आगे बढ़ा सकते है।

DAC&FW एजेंसी समूह/राज्यों का आबंटन करेगी, जो इसी क्रम में राज्‍यों में समूह आधारित व्‍यापारिक संगठन का गठन करेंगे।

कैसे काम करेगा FPO

इन FPO को एक बिजनेस यूनिट चलाएगी। इन बिजनेस यूनिट की जो भी कमाई होगी, उसे किसानों के बीच बांटा जाएगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्केट में जैसे किसी कंपनी के पास अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम होते हैं, वैसे ही इन एफपीओ के पास भी कार्यक्रम होगा। एक अन्य अधिकारी के हवाले से लिखा गया है कि राज्य सरकारों, नाबार्ड, स्मॉल फार्मर्स एग्री बिजनेस कंसोर्टियम (SFAC) के साथ मिलकर काम करेंगे। मौजूदा समय में कुल 822 ऐसे एफपीओ हैं, जिन्हें SFAC ने प्रमोट किया है, जबकि 2,154 FPO को नाबार्ड ने प्रमोट किया है।

FPO यानी किसान संगठन बताएंगे कब और कौन से समय खेती करने पर ज्यादा उत्पादन होगा। इसके लिए ये फसल को बेचने के लिए मार्केट की जानकारी भी देंगे। साथ ही, टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल में भी ये संगठन मदद करेंगे।

इसके लिए एक पोर्टल यानी वेबसाइट शुरू की जाएगी। ये एकीकृत पोर्टल और सूचना प्रबंधन एवं निगरानी के माध्‍यम से समग्र परियोजना दिशा-निर्देश, डाटा-संग्रहण और रखरखाव जैसी सुविधा प्रदान करने के लिए SFAC के स्‍तर पर एक राष्‍ट्रीय परियोजना प्रबंधन एजेंसी (NPMA) होगी।

शुरुआत में मैदानी क्षेत्र में FPO में सदस्‍यों की न्‍यूनतम संख्‍या 300 और पूर्वोत्‍तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों में 100 होगी। हालांकि DAC&FW केन्‍द्रीय कृषि मंत्री की स्‍वीकृति के साथ आवश्‍यकता और अनुभव के आधार पर न्‍यूनतम सदस्‍यों की संख्‍या में संशोधन कर सकता है।

FPO द्वारा विशेष और बेहतर प्रसंस्‍करण, मार्केटिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए ‘एक जिला एक उत्‍पाद’ समूह के अंतर्गत FPO को प्रोत्‍सा‍हन दिया जाएगा। FPO के इक्विटी आधार को मजबूत करने के लिए इसमें इक्विटी अनुदान का भी एक प्रावधान होगा।

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DAC&FW और NABARD के द्वारा समान योगदान के साथ नाबार्ड में 1,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज गारंटी फंड और DAC&FW और NCDC के द्वारा समान योगदान के साथ NCDC में 500 करोड़ रुपये का ऋण गारंटी फंड होगा, ताकि FPO को ऋण प्रदान करने के मामले में वित्‍तीय संस्‍थानों के जोखिम को न्‍यूनतम करते हुए FPO को संस्‍थागत ऋण के निरंतर प्रवाह हेतु उपयुक्‍त ऋण गारंटी दी जा सके।

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