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एसएमई व स्टार्टअप्स को पूंजी जुटाने में मददगार बना बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 24 Jan 2020 10:27 AM GMT

एसएमई व स्टार्टअप्स को पूंजी जुटाने में मददगार बना बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज
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मयंक शर्मा

मुम्बई: अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उद्ममों का फलना-फूलना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार तमाम कोशिशें भी कर रही है। उद्यमिता के लिए माहौल को सुलभ बनाया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा स्टार्टअप कैसे स्थापित हों, लघु एवं मध्यम उद्यम कैसे आगे कैसे बढ़ें। इन सब बातों पर चर्चा हो रही है। उद्यमिता की स्थापना और उसके विकास के लिए पूंजी सर्वाधिक महत्वपूर्ण यंत्र होता है। उद्यमी अपने पैसे लगाते हैं या दोस्तों-रिश्तेदारों-बैंकों से ऋण लेते हैं। इन परम्परागत माध्यमों के अतिरिक्त शेयर बाजार अथवा पूंजी बाजार भी उद्यमिता के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ पूंजी बाजार के माध्यम से उद्यमिता के लिए धन मुहैया कराने वाली सबसे पुरानी संस्था है। मार्च, 2012 में बीएसई ने लघु एवं मध्यम उद्यमों को पूंजी बाजार प्रवेश में दिया। जबकि दिसंबर, 2018 में बीएसई ने स्टार्टअप्स को भी पूंजी बाजार में प्रवेश देने की पहल की।

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उद्यमिता और पूंजी बाजार के बारे में बीएसई एसएमई एवं स्टार्टअप एक्सचेंज के प्रमुख अजय ठाकुर ने बताया कि सेबी के नियमों व प्रावधानों के तहत बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है। ये उद्यमिता के संवर्धन के लिए उद्यम तथा निवेशक सहायक वातावरण उपलब्ध करवाता है। यह प्लेटफॉर्म देश भर में फैली छोटी एवं मध्यम आकार की असंगठित कंपनियों (एसएमई) को एक नियामित एवं संगठित सेक्टर के तौर पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध अथवा लिस्टेड होने का मौका उपलब्ध करवाता है। सूचीबद्ध एसएमई कंपनियां बीएसई एसएमई प्लेटफार्म के माध्यम से अपने विकास के लिए वित्त बाजार में प्रवेश कर सकती हैं। बीएसई एसएमई इन कंपनियों को इक्विटी यानी पूंजी जुटाने में सहायता प्रदान करता है। ये कंपनियां एक निश्चित अवधि के बाद बीएसई के मेन बोर्ड यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर भी स्थानांतरित हो सकती हैं।

उद्यमियों के लिए अवसर

बीएसई एसएमई छोटी व मध्यम आकार की कंपनियों (एसएमई) को उनके विकास तथा विस्तार के लिए कम लागत पर इक्विटी पूंजी जुटाने की सुविधा प्रदान करता है। इसके अलावा प्रारंभिक चरणों में ही अच्छी कंपनियों की पहचान करने तथा उनमें निवेशकों को निवेश करने की सुविधा प्रदान हुए, दीर्धावधि पूंजी उपार्जन कर लाभ प्राप्त करते हुए, उन्हें आसान एक्जिट रूट भी प्रदान करता है।

कोई भी कंपनी हो सकती है लिस्ट

बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार की कंपनी लिस्ट हो सकती है। समय समय पर बाजार की स्थितियों अनुरूप एसएमई इकाइयों के लिए दिशा निर्देशों में ढील के साथ बदलाव किए गए हैं। वर्तमान गाइडलाइन्स के अनुरूप बीएसई एसएमई एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने के लिए कंपनी कम से कम तीन साल पुरानी होनी चाहिए। दो साल का उसमें प्रॉफिट होना चाहिए तथा नेट टांजिएब्ल एसेट्स कम से कम 3 करोड़ रुपये के होने चाहिए।

स्टार्टअप लिस्टिंग

2018 में शुरू हुए स्टार्टअप बीएसई प्लेटफॉर्म के लिए कंपनी कम से कम दो साल पुरानी होनी चाहिए। उसकी नेटवर्थ हमेशा सकारात्मक होनी चाहिए, नेटवर्थ को पेडअप कैपिटल या रिजव्र्स इत्यादि के आधार पर मापा जाता है। स्टार्टअप कंपनी शुरुआत के दो तीन साल अगर लॉस मेकिंग भी है तो चल सकती है, क्योंकि स्टार्टअप प्राय: शुरुआत में प्रॉफिट नहीं दिखा पाते हैं। ऐसी कंपनी भारत सरकार के डीआईपीपी विभाग के साथ स्टार्टअप के रूप में पंजीकृत होनी चाहिए। यदि डीआईपीपी के साथ कंपनी पंजीकृत नहीं है तो उसका पेडअप कैपिटल काम से कम 1 करोड़ होना चाहिए।

एसएमई एवं स्टार्टअप प्लेटफॉम्र्स का प्रदर्शन

अजय ठाकुर कहते हैं हमारा अब तक का प्रदर्शन काफी उत्साहजनक ही रहा है। एसएमई प्लेटफॉर्म पर 312 कंपनियां लिस्ट हो चुकी हैं। जिनमें से 75 कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करते हुए मेनबोर्ड पर भी शिफ्ट हो चुकी हैं। जबकि 55-60 एसएमई कंपनियों ने लिस्टिंग के लिए फाइल कर दिया है और सूचीबद्धता की प्रक्रिया में हैं। स्टार्टअप प्लेटफॉर्म तो अभी जल्द ही लांच हुआ है, फिर भी इस पर तीन कंपनियां लिस्ट हो चुकी हैं। पाँच अन्य स्टार्टअप ने भी मैंडेट साईन कर लिया है एवं एक स्टार्टअप ने फाइलिंग भी की है। जल्द इन स्टार्टअप्स की भी प्रक्रिया पूरी होने के साथ इनके प्लेटफॉर्म पर आ जाने की सम्भावना है।

लिस्टिंग के फायदे

अजय ठाकुर बताते हैं कि एसएमई कंपनियों के लिए लिस्टिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए विकास उन्मुख एसएमई इकाइयां पूंजी तक आसान पहुंच बना लेती हैं। लिस्टिंग से कंपनी की विजिबिलिटी और प्रतिष्ठा बढ़ती है। एक ओर जहां कंपनियों की विश्वसनीयता बढ़ती है वहीं इससे उनकी वित्तीय स्थिति भी मजबूत होती है। कंपनी के शेयर्स की मांग बढऩे के साथ कंपनी की वैल्यूएशन भी बढ़ती चली जाती है। इक्विटी द्वारा किये गए वित्तपोषण से एसएमई इकाइयों का विस्तार, विलय एवं अधिग्रहण लागत प्रभावी होने के साथ साथ करों के लिहाज से अनुकूल होता चला जाता है। लिस्टिंग के साथ कंपनियों के लिए कर्मचारी स्टॉक विकल्प भी खुल जाते हैं, जिससे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता, भागीदारी एवं उनका प्रोत्साहन सुनिश्चित होता चला जाता है।

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अजय ठाकुर के अनुसार, देश का एसएमई सेगमेंट अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये एसएमई इकाईयां बरसों से भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही हैं। एसएमई सेक्टर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं व अन्य को रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध करवा रहा है। ऐसे में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का भी फर्ज बनता है कि वह इन महत्वपूर्ण उद्यम इकाइयों को अधिकतम सहयोग प्रदान करे। जहां तक स्टार्टअप सेगमेंट की बात है तो उद्यमिता की बयार भारतीय युवाओं की रगों में रच बस गई है। भारत ने पिछले एक दशक में स्टार्टअप परिदृश्य में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है।

अगर आप अपनी एसएमई अथवा स्टार्टअप इकाई के विस्तार के लिए पूंजी की तलाश में हैं, तो आप www.bsesme.com या www.startupsbse.com पर पूरी जानकारी प्राप्त हो सकती। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की टीम से सीधी बात भी कर सकते हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज इन दोनों ही एक्सचेंजों के लिए समय समय पर इवेंट्स के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाता रहता है। इन इवेंट्स में शामिल होकर भी आप आपके स्टार्टअप अथवा एसएमई के लिए पूँजी एकत्रण से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पूंजी बाजार में प्रवेश के लिए सबसे पहले कोई भी कम्पनी अपना आईपीओ लाती है। इस आईपीओ अथवा प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश के माध्यम से कम्पनी अपना दस रुपए का एक शेयर बाजार भाव पर जन सामान्य को बेचने का प्रस्ताव प्रदान करती है। पूंजी बाजार में उस कम्पनी के प्रस्ताव की मांग के अनुरूप यह दस रुपए का शेयर बाजार भाव पर बिकता है। सामान्य भाषा में इसी प्रकार पूंजी बाजार से कम्पनी अपने विकास के लिए पूंजी इकठ्ठा करती है। आईपीओ लिस्टिंग के बाद कम्पनी के शेयर सम्बंधित एक्सचेंज पर रोजाना की मांग के अनुरूप खरीदे और बेचे भी जाते हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज एवं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भारत के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारत ही नहीं, वरन एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी स्थापना 1875 में की गई थी।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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