केंद्र सरकार जल्द कर सकती है देश के पहले CDS का ऐलान, जानें इसके बारे में सबकुछ

केंद्र सरकार जल्द देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के नाम का ऐलान कर सकती है। पिछले दिनों ही सरकार ने पहले सीडीएस की नियुक्ति को लेकर एक समिति का गठन किया था।

Published by Aditya Mishra Published: December 24, 2019 | 2:59 pm
Modified: December 24, 2019 | 7:29 pm

नई दिल्ली: केंद्र सरकार जल्द देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के नाम का ऐलान कर सकती है। पिछले दिनों ही सरकार ने पहले सीडीएस की नियुक्ति को लेकर एक समिति का गठन किया था।

यह समिति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अंतर्गत काम कर रही है। इस समिति ने तीनों सेनाओं से कमांडर-इन-चीफ रैंक के अधिकारियों के नाम मंगवाए थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजी​त डोभाल के नेतृत्व में कमेटी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के इस मसले पर विचार कर रही है कि तीनों सेनाओं के प्रमुख के ऑफिस का स्वरूप कैसा हो, इसकी जिम्मेदारियां और अधिकार क्या हों जिससे यह सरकार और तीनों के बीच एक सलाहकार संस्था के रूप में काम कर सके।

केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।  इस समिति ने तीनों सेनाओं से कमांडर-इन-चीफ रैंक के अधिकारियों के नाम मंगवाए थे। सूत्रों के मुताबिक इस लिस्ट में भारतीय थल सेना प्रमुख विपिन रावत का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

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सीडीएस क्या है?

इस साल 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से सीडीएस का पद सृजित करने का ऐलान किया था। सीडीएस का काम तीनों सेनाओं के बीच समवन्य बनाना होगा।

बताया जा रहा है कि सीडीएस सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को रिपोर्ट करेंगे और सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट की कमेटी में वह सैन्य बलों की ओर से सिंगल विंडो से सलाह देंगे।

अभी कैसे काम होता है?

अभी थल सेना, नौ सेना और वायु सेना अपने अपने स्वतंत्र कमांड के अधीन काम करता है। हालांकि इनको एकीकृत किए जाने पर ज़ोर दिया जाता रहा लेकिन हर सेना अपनी योजना और अभ्यास के लिए अपने अपने मुख्यालयों के अधीन काम करती है।

अंडमान और निकोबार कमांड और रणनीतिक फोर्सेज कमांड (एसएफसी)- भारत के आण्विक हथियारों की देखरेख करती है- ये दोनों पूरी तरह एकीकृत कमांड है जिसमें तीनों सेना के अधिकारी और जवान शामिल होते हैं।

सीडीएस से क्या बदलेगा?

सीडीएस के होने से एकीकृत क्षमता विकसित करने पर काम होगा। अभी किसी स्थिति से निपटने के लिए हर सेना अपने विकल्पों को देखती है और एक योजना के साथ आती है, ऐसे में तीन योजनाएं होती है। सीडीएस के होने से तीनों सेना के ऊपर एक प्रबंधन होगा।इस हिसाब से न्यूनतम संसाधनों से कारगर नतीजा हासिल किया जा सकता है।”

हालांकि बजटीय अनुदान के कम होने के बारे में पूछे जाने पर जनरल चैत कहते हैं कि सीडीएस सेना के आधुनिकीकरण पर किफ़ायत के साथ ध्यान दे पाएंगे।

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अब आगे क्या होगा?

एक बड़ा सवाल यह भी है कि सीडीएस क्या मौजूदा सेनाध्यक्षों की तरह चार स्टार रैंक वाले अधिकारी होंगे या फिर वे पांच स्टार रैंक वाले अधिकारी होंगे?

अभी इन सवालों के जवाब नहीं हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एक पूर्व वायु सेना प्रमुख ने गोपनीयता की शर्त के साथ कहा, “आने वाले दिनों में मुश्किलें सामने आएंगी।” सीडीएस के पद से मदद मिलेगी या फिर नुकसान होगा, यह कई बातों पर निर्भर करेगा।

इस पूर्व वायुसेना प्रमुख ने कहा, “मौजूदा रक्षा सचिव को सीडीएस को रिपोर्ट करना चाहिए।सीडीएस की स्थिति वैसी होनी चाहिए, जो सबसे आगे हो। अहम नियुक्तियों और वरिष्ठ अधिकारियोंके कामकाज के आकलन में उनका दखल होना चाहिए।”

 

कम नहीं है चुनौतियां

ऐसी स्थिति में सीडीएस को लेकर कई चुनौतियों भी होंगी।पूर्व वायुसेना प्रमुख ने बताया, “अधिकारों की लड़ाई का मसला तो होगा। सीडीएस के आने से कईयों के अधिकार में कटौती होगी। अब यह राजनीतिक वर्ग को देखना है कि नौकरशाही और सैन्य बल मिलकर इस पोस्ट के अधिकार को कमतर नहीं कर दें।”

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