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चीन पर हमला: सेना अब जल्द लेगी ऐसा फैसला, सिखाएगी ड्रैगन को सबक

लगता है अब चीन पर हमला तय है। चूँकि बातचीत से अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है सो ऐसे में भारत ने सैन्य विकल्प की पूरी तैयारी कर ली है। चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ बिपिन रावत ने भी स्पष्ट किया है कि चीन अगर बातचीत से नहीं मानता है तो हमारे पास सैन्य विकल्प भी मौजूद है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 24 Aug 2020 12:23 PM GMT

चीन पर हमला: सेना अब जल्द लेगी ऐसा फैसला, सिखाएगी ड्रैगन को सबक
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नई दिल्ली। लगता है अब चीन पर हमला तय है। चूँकि बातचीत से अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है सो ऐसे में भारत ने सैन्य विकल्प की पूरी तैयारी कर ली है। चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ बिपिन रावत ने भी स्पष्ट किया है कि चीन अगर बातचीत से नहीं मानता है तो हमारे पास सैन्य विकल्प भी मौजूद है। रावत ने कहा कि चीनी सैनिक अगर बातचीत से बॉर्डर से पीछे नहीं हटती है, तो भारत के पास सैन्य विकल्प भी मौजूद है। हम उसे भी अपना सकते हैं। रावत का ये बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन सीमा सामान्य स्थिति बनाने के लिए बातचीत को लगातार असफल कर रहा है।

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राजनाथ सिंह की बैठक

चीन से लगी सीमा पर बने तनाव के मद्देनजर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सीडीएस बिपिन रावत के साथ बैठक की है। इस बैठक में वर्तमान हालात और चीन के अड़ियल रवैये पर चर्चा की।

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गयी और हालात से निपटने के लिए भविष्य के कदमों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में थल सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे ने भारत की सैन्य तैयारियों, हथियारों और सैनिकों की तैनाती, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) सहित सभी संवेदनशील इलाकों में कड़ाके की सर्दी के बीच सैनिकों की तैनाती बनाए रखने को लेकर प्रस्तुति दी।

Indian army

शांति की उम्मीद

जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि सरकार शांतिपूर्ण ढंग से मामला सुलझाना चाहती है। उन्‍होंने कहा कि एलएसी पर अतिक्रमण अलग-अलग नजरिये की वजह से होता है। रक्षा सेवाओं का काम निगरानी रखना और ऐसे अतिक्रमण को घुसपैठ में तब्‍दील होने से रोकने का है।

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सरकार चाहती है कि शांतिपूर्ण तरीके से मसले सुलझाए जाएं। अगर पूर्वस्थिति बहाल करने की कोशिशें सफल नहीं होती हैं तो सैन्‍य कार्रवाई के लिए रक्षा सेवाएं हमेशा तैयार रहती हैं।

कम नहीं हो रहा तनाव

कई दौर की बातचीत के बावजूद, पूर्वी लद्दाख में तनाव कम नहीं हो रहा है। सैन्‍य स्‍तर पर बातचीत के अलावा विदेश मंत्रालय और दोनों देशों के वर्किंग मकैनिज्म फॉर कंसल्टेशन ऐंड को-ऑर्डिनेशन ने भी चर्चा की है। दोनों पक्ष आगे बढ़ने पर बार-बार सहमत हुए हैं लेकिन धरातल पर कोई बात नहीं बनी।

गौरतलब है कि 15 जून को लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद स्थिति बिगड़ गई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीनी पक्ष के सैनिक भी हताहत हुए थे। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के 35 सैनिक हताहत हुए थे।

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