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ये है सबसे बड़ा खतराः कोरोना के स्वस्थ मरीजों को अलर्ट जारी

कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद पूरी दुनिया में तरह-तरह के अध्ययन किए जा रहे हैं और इन अध्ययनों के चौंकाने वाले नतीजे सामने आ रहे हैं।

Roshni Khan
Updated on: 16 Jun 2020 5:33 AM GMT
ये है सबसे बड़ा खतराः कोरोना के स्वस्थ मरीजों को अलर्ट जारी
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद पूरी दुनिया में तरह-तरह के अध्ययन किए जा रहे हैं और इन अध्ययनों के चौंकाने वाले नतीजे सामने आ रहे हैं। अब दुनिया भर के 17 विशेषज्ञों की टीम ने रिसर्च के बाद बताया है कि कोविड-19 स्वस्थ लोगों में भी डायबिटीज का कारण बन सकता है। इस वायरस के हमले से उन लोगों की हालत और बिगड़ सकती है जो पहले से ही डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों ने क्लिनिकल ट्रायल के बाद कोविड-19 और डायबिटीज के बीच ये महत्वपूर्ण कनेक्शन खोजा है।

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corona positive

डायबिटीज के पुराने मरीजों के लिए ज्यादा खतरा

17 अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों का यह महत्वपूर्ण रिसर्च न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इस रिसर्च में बताया गया है की डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद उनकी हालत और नाजुक हो जाती है। कोरोना के हमले से ऐसे मरीजों की मौत का खतरा 30 फ़ीसदी तक बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भी हाल में ऐसी बात कही गई थी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हृदय रोग, अस्थमा और डायबिटीज के मरीज हाई रिस्क जोन में होते हैं और ऐसे मरीजों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा काफी ज्यादा है।

शरीर में कई रुकावटें पैदा करता है कोरोना

इस महत्वपूर्ण रिसर्च के मुताबिक संक्रमण के बाद कोरोना वायरस शरीर के काम करने के तरीके में कई तरीके की बाधाएं पैदा करता है। ग्लूकोस मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया बाधित होने के कारण मरीज की हालत नाजुक हो जाती है। इसलिए जो मरीज पहले से डायबिटीज के शिकार हैं, उन्हें इस वायरस से सतर्क रहने की जरूरत है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक हालिया शोध भी इस बात का खुलासा करते हैं कि जब कोरोनावायरस शरीर में एसीई-2 रिसेप्टर को पकड़ने के बाद शरीर में अपना संक्रमण फैलाता है तो वह फेफड़ों के साथ ही ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में शामिल अंगों को भी प्रभावित करता है। इसका असर पेंक्रियाज, छोटी आंत, लिवर और किडनी पर भी पड़ता है।

कोरोना और डायबिटीज के बीच कनेक्शन

शोधकर्ताओं की टीम में शामिल किंग्स कॉलेज लंदन में मेटाबॉलिक सर्जरी के प्रोफेसर फ्रेंसेस्को रूबिनो का कहना है कि डायबिटीज मनुष्य के लिए सबसे गंभीर की बीमारियों में से एक है। हम कोरोना वायरस और डायबिटीज के बीच कनेक्शन को खोजने की कोशिश कर रहे हैं । अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है इस संक्रमण के बाद कोरोना वायरस ग्लूकोस मेटाबॉलिज्म को कैसे बदलता है।

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आईसीएमआर ने भी जारी की एडवाइजरी

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की भी राय है कि जिन रोगियों का ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहता, उनके हर तरह के संक्रमण का शिकार होने की आशंका अधिक होती है। आईसीएमआर की ओर से जारी एडवाइजरी में ऐसे मरीजों को खान-पान का विशेष ध्यान रखने और नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की सलाह दी गई है। आईसीएमआर का कहना है कि ऐसे रोगियों को नियमित रूप से डायबिटीज की दवाओं का सेवन करना चाहिए ताकि उनका ब्लड शुगर कंट्रोल में बना रहे। संक्रमण का शिकार होने पर ऐसे लोगों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों का थोड़ी-थोड़ी देर में ब्लड शुगर मॉनिटर किया जाना चाहिए ताकि उन्हें किसी भी खतरे से बचाया जा सके।

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