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68 आतंकियों की मौत: बड़े-बड़े सरगना का भी हुआ ये हाल, खत्म हुई इनकी फौज

देश में महामारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। संकट की इस घड़ी में देश के ऊपर काल बनकर आए आतंकियों ने भी कम साजिशे नहीं रची, लेकिन लॉकडाउन खुद आतंकियों पर काल बनकर टूटा।

Vidushi Mishra
Updated on: 11 Jun 2020 1:08 PM GMT
68 आतंकियों की मौत: बड़े-बड़े सरगना का भी हुआ ये हाल, खत्म हुई इनकी फौज
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नई दिल्‍ली। देश में महामारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। संकट की इस घड़ी में देश के ऊपर काल बनकर आए आतंकियों ने भी कम साजिशे नहीं रची, लेकिन लॉकडाउन खुद आतंकियों पर काल बनकर टूटा। देश में लॉकडाउन के 71 दिनों के अंतराल में केवल जम्मू-कश्मीर में ही 68 आतकंवादियों का खात्मा किया गया है। भारतीय सुरक्षाबलों को इन दिनों आतंकवाद पर बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। इसके साथ ही इसी साल जून तक जांबाजों ने 100 से ज्यादा आतंकियों को मौत के घाट उतारा है।

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बड़ी साजिश की फिराक में

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय सुरक्षाबलों ने 1 अप्रैल से 10 जून तक ही 68 आतंकी मार गिराये हैं। कश्मीर में इस साल सबसे अधिक आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन एक्टिव रहा।

भारतीय सुरक्षाबलों ने आतंकी हिजबुल के 35 स्‍थानीय आतंकियों को मौत के घाट उतारा है। साथ ही 10 जून तक मारे गए 16 आतंकियों की अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है। जिनमें से 10 विदेशी आतंकी की मौजूद थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये किसी बड़ी साजिश की फिराक में थे।

भारतीय सुरक्षाबलों ने जम्मू- कश्‍मीर में जनवरी से लेकर जून तक 100 से अधिक आतंकियों को ढेर किया है। ये आतंकी लश्‍कर-ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए मोहम्‍मद सहित अन्‍य आतंकी संगठनों से जुड़े थे।

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15 आतंकी ढेर

इसके अलावा मई में भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) और जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के संयुक्‍त अभियान में 15 आतंकी ढेर किए गए।

भारतीय सेना ने मई में कुल 20 आतंकी को मौत के घाट उतारा है। इनमें से 6 हिजबुल मुजाहिदीन के गुर्गे भी थे। वहीं इस साल जनवरी में 18, फरवरी में 7 और मार्च में 7 आतंकी ढेर किए जा चुके हैं। देखा जाए तो आतंकी किसी भी तरह से अपनी साजिश को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं।

और इसी बौखलाहट में ये आतंकी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी ये सीजफायर का उल्लंघन करने के बाज नहीं आ रहे हैं। आए दिन घाटी में गोलाबारी करते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को काफी डर में जिंदगी गुजारनी पड़ती है।

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Vidushi Mishra

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