भाजपा के बागी यशवंत सिन्हा का बड़ा एलान, बिहार में मोर्चा बना ताल ठोंकी

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एक और राजनीतिक मोर्चे का जन्म हुआ है। इस राजनीतिक मोर्चे का गठन पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने किया है।

पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एक और राजनीतिक मोर्चे का जन्म हुआ है। इस राजनीतिक मोर्चे का गठन पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने किया है। सिन्हा ने बिहार में एक नए राजनीतिक विकल्प की घोषणा करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनका फ्रंट भी मैदान में उतरेगा। उन्होंने खुद भी विधानसभा चुनाव लड़ने का संकेत दिया।

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वर्चुअल तरीके से चुनाव संभव नहीं

बिहार में भी लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद सियासी गतिविधियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने आज पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में नए राजनीतिक विकल्प का एलान किया। उन्होंने दावा किया कि उनका फ्रंट पूरी मजबूती से विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में पता लगेगा कि यह तीसरा फ्रंट था या पहला। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्चुअल रैलियां और वर्चुअल तरीके से चुनाव अभियान चलाना संभव नहीं है। यहां परंपरागत ढंग से ही चुनाव प्रचार किया जा सकता है। इसलिए चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर जरूर विचार करना चाहिए।

राजद और राजग पर बड़ा आरोप

बिहार में अभी तक राजद और राजद के मोर्चे को ही मजबूत माना जाता रहा है जबकि यशवंत सिन्हा का दावा है कि राजद और राजा के मोर्चे के खिलाफ उनका गठबंधन एक मजबूत विकल्प साबित होगा। उन्होंने कहा कि हमारे गठबंधन का नारा है-इस बार, बदलें बिहार। उन्होंने कहा कि हमने बहुत सोच समझ कर अपना नारा गाढ़ा है क्योंकि राजद और राजग दोनों को बिहार में 15 -15 साल तक सरकार चलाने का मौका मिला है, लेकिन दोनों ही अपने चुनावी घोषणापत्र को पूरा करने में नाकाम साबित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए 15 साल का समय काफी होता है और इन दोनों दलों को यह मौका मिल चुका है मगर दोनों बिहार की तस्वीर बदलने में पूरी तरह नाकाम रहे। इसलिए अब बिहार के लोगों को तीसरे राजनीतिक विकल्प को मौका देना चाहिए।

राजद को इस्तीफों से लगा झटका

विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही बिहार की सियासत में उठापटक का दौर शुरू हो गया है। अभी हाल में राजद के पांच विधानपरिषद सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा देकर जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। इससे राजद को करारा झटका लगा है और इसे नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है। पांच विधानपरिषद सदस्यों के इस्तीफे के साथ विधानपरिषद में राजद के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई है और इससे पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नेता प्रतिपक्ष का ओहदा भी संकट में पड़ गया है। विपक्षी महागठबंधन में तेजस्वी यादव के नेतृत्व को लेकर भी खींचतान चल रही है। महागठबंधन में शामिल दलों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चेहरा तय होगा।

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मोल-तोल में जुटे हुए हैं मांझी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम के मुखिया जीतन राम मांझी भी राजनीतिक मोल-तोल में जुटे हुए हैं। उन्होंने विपक्षी महागठबंधन की समन्वय समिति बनाने की मांग की है। पहले उन्होंने इसके लिए 25 जून की तारीख तय की थी मगर अब उन्होंनेे इसकी समय सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है।

सियासत के जानकारों का कहना है कि मांझी विधानसभा चुनाव से पहले ज्यादा से ज्यादा टिकटों की गारंटी चाहते हैं और इसके लिए वे पलटी भी मार सकते हैं। हाल ही में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान नीतीश कुमार की जी खोलकर तारीफ भी की थी। बिहार की सियासत में हर किसी को अब मांझी के अगले कदम का इंतजार है।

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